केरल : बिल्डर-बाबु-बाहुबलियों के ‘भ्रष्ट गठजोड़’ ने सरकारी खजाने को यूँ लगाया 76,50,00,000 रुपए का चूना

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* कोच्चिं समुद्री तट पर निर्मित मरदु फ्लैट्स अवैध घोषित

* 138 दिनों में 3 बिल्डिंगों के 306 फ्लैट्स गिराए जाएँ : SC

* मकान मालिकों को 25-25 लाख रुपए देने का आदेश

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 27 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। उच्चतम् न्यायालय (SC) ने केरल में कोच्चिं समुद्री तट पर निर्मित तीन भवनों का अवैध घोषित करते हुए इन्हें अगले 138 दिनों के भीतर गिराने का आदेश दिया है। कोच्चिं के मरदु क्षेत्र में बने इन तीन भवनों में कुल 306 फ्लैट्स (मकान) हैं। एससी ने केरल सरकार को आदेश दिया कि वह प्रत्येक फ्लैट मालिक को 25 लाख रुपए मुआवजा राशि दे।

सुप्रीम कोर्ट ने तो वही किया, जो उसे करना चाहिए था, परंतु यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि समुद्री तट पर इन अवैध भवनों का निर्माण हुआ कैसे ? कोच्चिं के मरदु क्षेत्र में समुद्री तट पर स्थित जिन 3 भवनों को गिराने का आदेश दिया गया है, वे लगभग 6 दशक पुराने हैं।

इन बिल्डिंगों में द जैन्स कोरल कव (The Jains Coral Cove) में 122 फ्लैट्स हैं, जिनका निर्माण जैन हाउसिंग एण्ड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने किया था। इसी प्रकार एच20 होली फेथ (H20 Holy Faith) नामक भवन में 90 फ्लैट्स हैं, जिनका निर्माण होली फेथ बिल्डर्स एण्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया था, तो तीसरी बिल्डिंग का नाम है आल्फा सेरेने (Alfa Serene), जिसमें 94 फ्लैट्स हैं। इसका निर्माण आल्फा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया था। कोच्चिं पुलिस ने इन इमारतों में रहने वालों की शिकायत पर पिछले वर्ष यानी 25 अक्टूबर, 2018 को मरदु में तटीय क्षेत्र नियमन (CRZ) अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में उपरोक्त तीनों बिल्डरों के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। सीआरज़ेड कानून का उल्लंघन कर भवनों का निर्माण करने वाले इन बिल्डरों के लगभग 60 बैंक खाते सील किए गए हैं। इनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (आपराधिक विश्वास हनन) और 430 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यद्यपि कोच्चिं पुलिस ने गोल्डन कायलोरम नामक बिल्डिंग के बिल्डर के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की है, क्योंकि उसके विरुद्ध कोई शिकायत नहीं मिली है।

कैसे हो जाता है अवैध भवन का निर्माण ?

मामला चूँकि सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो आज इस विवाद पर निर्णय भी आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों फ्लैटों में रहने वाले 306 मकान मालिकों को 25-25 लाख रुपए मुआवजा राशि देने का आदेश दिया है। यह मुआवजा राशि केरल सरकार देगी। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि केरल सरकार के ख़जाने से इन मकान मालिकों को कुल 76,50,00,000 (76 करोड़ 50 लाख) रुपए दिए जाएँगे, परंतु प्रश्न फिर वही खड़ा होता है कि आखिर किस कारण केरल सरकार के खजाने को 76.50 करोड़ रुपए का चूना लगने जा रहा है ? इसका सीधा-सा उत्तर है बिल्डरों, सरकारी बाबुओं और बाहुबली नेताओं का भ्रष्ट गठजोड़। किसी भी भवन के निर्माण का प्लान सबसे पहले स्थानीय निकाय (नगर पालिका/महानगर पालिका) के विचाराधीन लाया जाता है। स्थानीय निकाय के अधिकारी जब इस प्लान को स्वीकृति देते हैं, तभी यह स्थानीय निकाय की निर्वाचित बॉडी के समक्ष पहुँचता है, जो जनता के चुने हुए राजनेताओं से बनी होती है। स्थानीय निकाय की शासन-प्रशासन दोनों ही बॉडीज़ की ओर से मंजूरी मिलने के बाद यह प्लान राज्य सरकार में सम्बद्ध मंत्रालय के अधिकारियों यानी बाबुओं के पास पहुँचता है, जिसे बाद में मंत्रालय का मंत्री (जो राजनीतिक दल का नेता होता है) की मंजूरी मिलती है। प्लान की मंजूरी की इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित ढंग से पूर्ण करवाने में बिल्डर पूरी ताकत झोंक देता है। बिल्डर का सरकारी बाबुओं और सत्ता में बैठे नेताओं के साथ भ्रष्ट गठजोड़ नियमों को ताक पर रख कर प्लान को मंजूरी दे देता है और इस तरह एक अवैध भवन का निर्माण होता है।

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