परमाणु युद्ध पर इमरान की ‘चाल’, पर भारत लगातार बढ़ा रहा ढाल !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 3 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। 5 अगस्त, 2019 के बाद से लगातार भारत के विरुद्ध विषवमन कर रहे पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान खान इस क़दर बौखला गए कि उन्होंने परमामु युद्ध तक की धमकी दे डाली, परंतु जैसे ही इमरान को परमाणु युद्ध के गंभीर परिणामों का एहसास हुआ, उनका एटम बम फुस्स हो गया। जो इमरान भारत को परमाणु युद्ध की धमकी देते हुए पूरी दुनिया को उसके परिणाम भुगतने का भय दिखा रहे थे, जब उन्हें यह एहसास हुआ कि भारत और दुनिया तो कदाचित परमामु युद्ध के बुरे परिणाम भुगत लेंगे, परंतु उनके देश पाकिस्तान का तो सर्वनाश हो जाएगा, तो वही इमरान कह रहे हैं कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करेगा।

वैसे भारत पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के परमाणु युद्ध की धमकी वाले वक्तव्य को भी गंभीरता से नहीं ले रहा था, तो भारत ने पहले परमाणु हमला नहीं करने के वक्तव्य को भी गंभीरता से नहीं लिया है। भारत केवल पाकिस्तान को गंभीरता से लेता है। यही कारण है कि इमरान खान के परमाणु युद्ध पर बदले रवैये के बाद भारत बेफिक्र नहीं हो गया है। भारत तो लगातार पाकिस्तान ही नहीं, अपितु चीन की चालाकियों का भी सामना करने के लिए निरंतर मुस्तैद रहता है और उसकी तीनों सेनाएँ किसी भी समय किसी भी युद्ध का सामना करने के लिए तैयार रहती हैं।

मज़बूरी में ओढ़ा शराफ़त का चोला ?

दरअसल इमरान खान ने जो परमाणु युद्ध पर रवैया बदला है, उसके पीछे उनकी नीयत ठीक नहीं दिखाई दे रही। इमरान ने यह बयान उस स्थान पर दिया, जहाँ सिख धार्मिक समुदाय के लोग इकट्ठा हुए थे। इमरान ने पूर्वी लाहौर में आयोजित सिख समुदाय के एक कार्यक्रम में भितरघाती रवैया अपनाए रखते हुए ऊपरी तौर पर शांति का चोला ओढ़ते हुए कहा, ‘हम दोनों (भारत-पाकिस्तान) परमाणु हथियार संपन्न देश हैं। अगर ये तनाव बढ़ता है, तो दुनिया ख़तरे में पड़ सकती है। हमारी तरफ से पहले कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।’ कुछ घण्टों पहले तक भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दे रहे इमरान का हृदय परिवर्तन कैसे हो गया ? क्या इमरान ने मज़बूरी में शराफ़त का चोला ओढ़ा ? हक़ीकत यही है। पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जो किसी भी समय धोखा दे सकता है। उसने स्वतंत्रता के बाद से ही भारत के विरुद्ध नफ़रत का बाज़ार खोल दिया था और धोखे से कश्मीर को हड़पने के लिए 1947 में पहला ही युद्ध उस भारत से छेड़ा, जिसमें से वह पैदा हुआ था। पाकिस्तान ने 1965 और 1971 के युद्धों में भी मुँह की खाई, परंतु इसके बावजूद उसने 1999 में कारगिल में घुसपैठ कर भारत की पीठ में छुरा भोंका। ऐसे में भारत को इमरान की इस बात पर ज़रा भी विश्वास नहीं करना चाहिए कि वे कश्मीर पर शांति से बैठे रहेंगे। भले ही इमरान परमाणु युद्ध का साहस न जुटा पाएँ, परंतु वह बौखलाहट में भारत के विरुद्ध कोई न कोई बड़ा, गंभीर और ग़लत कदम उठा सकते हैं। पाकिस्तान यह जानते हुए भी ऐसी कोई शरारत अवश्य करने का प्रयास करेगा कि अंतत: नुकसान उसे ही होगा। इसीलिए भारत सरकार और सेना इमरान के किसी भी चोले में फँसने वाली नहीं हैं।

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