VIDEO : ऑनलाइन कारोबार रिटेलर्स का ‘दुश्मन’ नहीं, हाथ बढ़ा कर बना लो अपना दोस्त

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 22 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। अब मोबाइल युग में घर-घर तक इंटरनेट की पहुँच हो गई है। मोबाइल फोन भी अब स्मार्ट फोन में तब्दील हो गये हैं, जिनकी एप्लीकेशन स्टोरेज में मौजूद फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसी एप्स में मात्र एक क्लिक में लोग कपड़ों से लेकर जूते, मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, फर्नीचर और हर तरह की जरूरत की वस्तुएँ घर बैठे मँगा रहे हैं। बाजार में भीड़ के बीच धक्के खाने से युवाओं और महिला ग्राहकों को ऑनलाइन खरीदारी काफी लुभा रही है। ग्राहकों के इसी व्यवहार को कैश कराने की मंशा से कंपनियाँ भी दीपावली के फेस्टिव सीज़न में लगातार कुछ न कुछ नये ऑफर दे रही हैं। दूसरी तरफ फेस्टिव सीज़न को ध्यान में रख कर खुदरा व्यापारियों ने भी माल खरीद कर अपनी दुकानें सजा दी हैं, इस आस में कि ग्राहक आएँगे, परंतु फेस्टिव सीज़न में वे जैसी खरीदारी की उम्मीद कर रहे हैं, वैसी भीड़ बाजारों में देखने को नहीं मिल रही है। इससे खुदरा व्यापारियों को लग रहा है कि ऑनलाइन बिज़नेस ने उनके व्यापार की कमर तोड़ दी है। इसीलिये कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इण्डिया ट्रेडर्स (CAIT) ने ऑनलाइन बिज़नेस के विरुद्ध देश व्यापी आंदोलन के लिये कमर कस ली है, परंतु सवाल यह उठता है कि क्या आंदोलन करने से सब कुछ ठीक हो जाएगा, क्या अमेज़न और फ्लिपकार्ट अपना कारोबार बंद कर देंगी और क्या ऑनलाइन खरीदारी करने वाला वर्ग रिटेलर्स की दुकानों में लौट आएगा ? जी नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं होगा, तो फिर यह सवाल भी उठता है कि रिटेलर्स क्या करें ? इस प्रश्न का समाधान बताते हुए आई. के. शर्मा डॉट कॉम के फाउण्डर आईके शर्मा कहते हैं कि समय के साथ चलना और बदलना ही इस समस्या का समाधान है।

क्या कहते हैं खुदरा व्यापारी ?

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इण्डिया ट्रेडर्स (CAIT) एवं अमेज़न और फ्लिपकार्ट के बीच केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय की ओर से गत 11 अक्टूबर को नई दिल्ली के उद्योग भवन में एक बैठक आयोजित कराई गई थी। इस बैठक के बाद CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतीय और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने देश के प्रमुख ब्राण्डों को एक पत्र लिखा है और उनसे पूछा है कि जिन ब्राण्ड्स के उत्पाद अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ई-वाणिज्य पोर्टलों पर बेचे जाते हैं, वे सभी ब्राण्ड्स CAIT को बताएँ कि क्या इन पोर्टलों पर विभिन्न उत्पादों पर दी जाने वाली भारी छूट इन पोर्टलों की ओर से दी जाती है या ब्राण्ड्स की ओर से दी जाती है।

क्योंकि कई ब्राण्ड्स इन पोर्टलों पर अपने उत्पाद बेचने के लिये खुदरा मार्केट में उत्पाद उतारते ही नहीं हैं और कई उत्पाद इतनी भारी छूट ऑनलाइन खरीदी पर देते हैं, जो खुदरा व्यापारियों के लिये देना संभव नहीं होता है। इससे खुदरा व्यापारियों का कारोबार चौपट हो रहा है और ऑनलाइन कारोबार मेट्रो सिटीज़ के बाद महानगरों और छोटे शहरों के बाद अब ग्रामीण इलाकों तक में पैर पसारने लगा है। इससे खुदरा व्यापारियों का कारोबार दीपावली की चकाचौंध के बीच भी काले घने अंधकार में डूबता चला जा रहा है। इन खुदरा व्यापारियों के समक्ष अपने अस्तित्व को बचाने का संकट पैदा हो गया है। इसलिये अब व्यापारियों को सभी राज्यों व शहरों में एकजुट होकर ऑनलाइन पोर्टलों तथा ब्राण्डेड कंपनियों के विरुद्ध व्यापक आंदोलन शुरू करने की नौबत आ गई है। CAIT ने ऑनलाइन पोर्टलों पर भारी छूट की घोषणा करने वालों के खिलाफ आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम उठाने की भी घोषणा की है।

खुदरा व्यापारियों को भी बदलना होगा : शर्मा

दूसरी ओर इसी मुद्दे पर आईके शर्मा डॉट कॉम के फाउण्डर आईके शर्मा का कहना है कि आंदोलन की राह पर जाने वाले व्यापारियों को यह समझना होगा कि ऑनलाइन पोर्टल अपना कोई उत्पाद नहीं बेचते हैं। इन पोर्टलों पर जो उत्पाद बिकते हैं वे भी अपने देश की कंपनियों का ही सामान बिकता है और आंदोलन से अपनी कंपनियों को ही नुकसान होगा, न कि ऑनलाइन पोर्टलों को। उन्होंने एक उदाहरण के साथ समझाया कि बड़ा बनने के लिये आवश्यक नहीं कि किसी की खींची हुई लाइन को मिटा दो या छोटा कर दो। बल्कि खुद की लाइन बड़ी करके सामने वाले की खींची हुई लाइन को छोटा करना ही उचित उपाय है। इसलिये देश के खुदरा व्यापारियों को भी एकजुट होकर समय के साथ कदम से कदम मिला कर चलने के लिये कमर कसनी होगी और समय के साथ बदलना होगा अर्थात् उन्हें भी सामूहिक रूप से अपने उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के लिये रूढ़िवादी व्यापारिक परंपरा को त्याग कर आधुनिक बनना होगा। ऐसा करके ही वे अपने उत्पादों को भी एक शहर के एक कोने में बसे बाजार से निकाल कर देश और दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचा सकते हैं और बेहतरीन क्वॉलिटी देकर विश्व भर के ग्राहकों को अपने उत्पाद से लुभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कारोबार से नफरत करने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि सीधे-सादे शब्दों में कहें तो इसकी तरफ दोस्ताना हाथ बढ़ा कर इसे अपनाना होगा, तभी सभी व्यापारियों के लिये भी बाजार में टिके रहना संभव हो पाएगा और जो पारंपरिक बेड़ियों में जकड़े रहेंगे, पुरानी मानसिकता से दुकान में बैठ कर ग्राहकों का इंतज़ार करते रहेंगे वे पिछड़ जाएँगे और संभव है कि आने वाले समय में अपना अस्तित्व खो देंगे। उन्होंने शहर-शहर जाकर प्रत्येक व्यापारी संगठन से मिलने और उन्हें कारोबार के आधुनिक तरीके अपनाने के लिये प्रेरित करने की भी बात कही है।

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