देश की आजादी के 70 साल बाद भी शहीद होने का दर्जा नहीं मिला – भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु

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Bhagat Singh

नई दिल्ली: महात्मा गाँधी, पंडित जवाहर लाल नेहरु, आदि को तो सभी जानते हैं। लेकिन देश के असली हीरो, असली शहीद को हर कोई नहीं जानता। हमारे भारत देश के स्वतंत्रता संग्राम (freedom struggle) के हमारे वीर क्रांतिकारियों Bhagat Singh, सुखदेव और राजगुरु ने अपना देश के खातिर, अपनी जान की बाजी लगाकर 23 मार्च 1931 को फांसी लगा  ली थी, लेकिन अफ़सोस की बात तो यह है कि जिन शहीद देशभक्त प्रमियो की वजह से आज हम स्वतंत्र की साँस ले पा रहे हैं, यह सरकार भी उन्हीं की वजह से ही है, लेकिन सरकार इन तीन शहीदों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद होने का सम्मान तक नहीं दे सकी।

कांग्रेस सरकार के समय 2013 में आरटीआई (RTI) रिपोर्ट डाली गयी थी, जिसमें यह पता चला था की केंद्र सरकार Bhagat Singh को दस्‍तावेजों (document) में शहीद नहीं मानती। जिसके बाद से भगत सिंह के परिजन ही भगत सिंह ब्रिगेड के बैनर तले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सरकारी रेकॉर्ड में शहीद घोषित करवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा यह केवल नज़र अंदाज़ किया जा रहा है, 2013 से आज 23 मार्च 2018 तक भी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि यह मामला संसद (Parliament) में भी उठाया जा चुका है। इन्ही सबसे नाराज़ इनके परिवारिक व्यक्तिओ ने तीनों शहीदों को शहीद का दर्जा दिलवाने की मांग फिर से की है जिसके कारण उन्होंने आज 23 मार्च 2018 शुक्रवार को अनश्चितकालीन अनशन (hunger strike) शुरू कर दिया है। इससे पहले भी 2016 में तीनो शहीदों के परिजनों ने मांग को लेकर जलियांवाला बाग से इंडिया गेट तक शहीद सम्‍मान जागृति यात्रा निकाली थी। वर्ष 2017 दिसंबर में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा यह बोलकर याचिका ख़ारिज (dismiss)कर दी गयी थी की ‘वह इस बारे में ऐसा कोई निर्देश नहीं दे सकता।’ दिल्ली में अनिश्चितकालीन अनशन करने की घोषणा सुखदेव के परिवार द्वारा की गयी है, जिसमें  Bhagat Singh के परिजन भी शामिल है।

 1928 में लाहौर में एक ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जबकि असल में इनकी हत्या नहीं हुई थी Bhagat Singh और राजगुरु ने गोली तो चलाई थी लेकिन वह गोली गलती से उन्हें लग गयी थी क्योकि वह एक ब्रिटिश पुलिस सुपरिन्टेंडेंट की हत्या करना चाहते थे| इस मामले के मुक़दमे के लिए भारत के तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड इरविन ने विशेष ट्राइब्यूनल का गठन किया था, जिसमे तीनों को फांसी की सजा सुना दी गयी थी, और लाहौर  के सेंट्रल जेल में  23 मार्च 1931 में इन्हें फांसी दे दी गयी थी।

आज 23 मार्च 2018 को 3 बजे से देश के शहीदों को समर्पित संस्था ‘स्वाभि‍मान देश  की मांग  दिल्ली के इंडिया गेट से राष्ट्रव्यापी शहीद स्वाभिमान यात्रा शुरू हो गयी है। यह यात्रा 15 हज़ार किलोमीटर लम्बी यात्रा संगठन के संस्थापक अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिधूड़ी के नेतृत्व में देश के सभी 29 राज्यों को कवर करते हुए 90 दिनों तक चलाऐंगे।

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