कौन हैं विक्रम लैंडर का मलबा खोज निकालने वाले शान, जिनको नासा ने भी किया सलाम ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 3 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। 7 सितंबर, 2019 का दिन भारतीय अंतरिक्ष इतिहास का अविस्मरणीय दिवस है। भले ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का चंद्रयान 2 (Chandrayaan-2) अपने लक्ष्य को हासिल न कर सका, परंतु चंद्रयान 2 से जुड़ी हर बात सुनने के लिए आज भी हर भारतीय के मन में उत्कंठा है, क्योंकि यह इसरो का अत्यंत महत्वाकांक्षी और विश्व कल्याणकारी मिशन था। चंद्रयान 2 (Chandrayaan-2) मिशन पूरी तरह सफल नहीं रहा, परंतु इस मिशन ने भारत की गिनती अंतरिक्ष शोधकर्ताओं की सूची में शिखर पर अवश्य पहुँच दी है। आशा करते हुए लेख की ओर आगे बढ़ते हैं कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो आने वाले समय में कई और मिशनों के साथ भारत को नई उपलब्धियाँ प्रदान कराता रहेगा।

चंद्रयान 2 के प्रक्षेपण दिवस के लगभग 3 महीने बाद आज पुन: इस मिशन की स्मृतियाँ ताज़ा इसलिए हो आईं, क्योंकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (National Aeronautics and Space Administration) अर्थात् NASA ने चंद्रयान 2 के महत्वपूर्ण उपकरण विक्रम लैंडर को लेकर तसवीरें जारी की हैं। जिस विक्रम लैंडर (Vikram Lander) को पहली बार चंद्र के दक्षिणी ध्रुव पर उतर कर इतिहास रचने का काम करना था, उसका 7 सितंबर 2019 की रात को इसरो मुख्‍यालय से संपर्क उस समय टूट गया था, जब वह चंद्र की सतह से केवल 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था। विशव भर के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसरो का मिशन चंद्रयान-2 फेल नहीं हुआ है। आज हम आपको चंद्रयान 2 की सफलता या असफलता के बारे में नहीं, अपितु अमेरिका की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा जारी की गई चंद्रमा की उन तसवीरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें नासा ने चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर को खोज निकालने का दावा किया है। आइए जानते हैं क्या कहती हैं तसवीरें ?

चेन्नई के इंजीनियर शणमुगा ने की विक्रम लैंडर की शिनाख़्त

मंगलवार सुबह यानी 3 दिसंबर, 2019 को नासा ने अपने लूनर रिकॉनाइसेंस ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) यानी LRO द्वारा ली गई एक तसवीर को जारी करते हुए दावा किया है कि इस तसवीर में विक्रम लैंडर से प्रभावित जगह दिखाई पड़ रही है। नासा ने चंद्रमा की सतह पर नीले और हरे रंग के डॉट्स के आधार पर भी विक्रम लैंडर का मलबे मिलने का दावा किया है। नासा के इस दावे के पीछे चेन्नई के भारतीय इंजीनियर शणमुगा सुब्रमण्यन का तेज-तर्रार दिमाग है। वास्तव ने नासा ने अपने उपग्रहों से ली गई तसवीरों के आधार पर विक्रम लैंडर का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया था। इसके बाद चेन्नई के इंजीनियर शणमुगा सुब्रमण्यन ने इन तसवीरों का सूक्ष्मता के साथ निरीक्षण किया और इन तसवीरों में विक्रम लैंडर के मलबे का पता लगा लिया। शणमगा ने नासा को सूचित किया और इसके बाद नासा ने इस बात की पुष्टि की कि विक्रम लैंडर क्रैश हो गया है। नासा ने शणमुगा को इस सहयोग के लिए धन्यवाद प्रेषित किया है। शणमुगा ने नासा की तसवीरों के निरीक्षण के बाद जो निष्कर्ष निकाला, उसके अनुसार चंद्रमा की सहत पर मिले अनुमानित विक्रम लैंडर के मलबे की एक सकारात्मक पहचान के लिए एलआरओ परियोजना से संपर्क किया। शणमुगा के अनुसार लिक्रम लैंडर के मुख्य दुर्घनाग्रस्त स्थान के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में लगभग 750 मीटर की दूरी पर स्थित मलबे की पहचान की गई है, जिसमें पहला मोजेक 1.3 मीटर पिक्सल, 84 डिग्री कोण पर देखा गया है। उसके बाद नवंबर में मोजेक इंपैक्‍ट क्रिएटर, रे और व्‍यापक मलबा क्षेत्र की पहचान की गई। इन मलबों के 3 सबसे बड़े टुकड़े 2×2 पिक्‍सल साइज़ के पाये गये हैं। नासा ने लगभग 1:30 बजे रात विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की तसवीरें जारी की थी।

कौन हैं शणमुगा, जिनका नासा ने भी माना लोहा ?

शणमुगा सुब्रमण्यन को चेन्नई में शान के नाम से भी विख्यात हैं। शणमुगा मैकेनिकल इंजीनियर और कम्प्यूटर प्रोग्रामर हैं। वर्तमान में शणमुगा चेन्नई में ही लीनॉक्स मीडिया टेक्नोलॉजी सेंटर में तकनीकी आर्किटेक्ट के रूप में काम कर रहे हैं। 7 सितंबर, 2019 को विक्रम लैंडर की चंद्रयान 2 के माध्यम से चंद्र के दक्षिण ध्रुव पर हुई हार्ड लैंडिंग के इस पहलू की खोज में शणमुगा ने महत्वपूर्ण योगदान किया है। कॉन्निजेंट जैसी कंपनियों में काम कर चुके शणमुगा मूलत: मदुरै के रहने वाले हैं। विक्रम लैंडर के मलबे की खोज के लिए शणमुगा ने एलआरओ द्वारा ली गई तसवीरों पर इतनी बारीक़ी से काम किया कि नासा भी उनका लोह मान गया। नासा ने यह तसवीरें गत 17 सितंबर, 14, 15 अक्टूबर और 11 नवंबर को ली थीं, जिनमें से शणमुगा ने विक्रम लैंडर के मलबे को खोज निकाला। शणमुगा उर्फ शान ने इन तसवीरों में जब विक्रम लैंडर का मलबा खोज निकाला, तो नासा ने भी उन्हें इस बात का श्रेय देने में देर नहीं की। नासा के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट (एलआरओ मिशन) जॉन केलर ने शणमुगा उर्फ शान को लिखा, ‘विक्रम लैंडर के मलबे की खोज के संबंध में आपके ई-मेल के लिए धन्यवाद। एलआओसी टीम ने कन्फर्म किया है कि बताई गई लोकेशन पर लैंडिंग से पहले और बाद में बदलाव दिख रहा है। इसी जानकारी का उपयोग करते हुए एलआरओसी टीम ने उसी क्षेत्र में और खोजबीन की, तो प्राइमरी इंपैक्ट वाली जगल के साथ मलबा भी मिला। नासा और एएसयू ने इस बारे में घोषणा के साथ-साथ आपको क्रेडिट भी दिया है।’ जॉन केलर ने शान को इस बात के लिए बधाई देते हुए यह भी लिखा, ‘आपने इतनी मेहनत और समय लगा कर जो काम किया, उसके लिए बधाई। हम अधिक समय लेने के लिए क्षमा चाहते हैं क्योंकि हमें इसकी घोषणा करने के लिए पूरी तरह से संतुष्ट होना था और यह भी सुनिश्चित करना था कि सभी भागीदार इस पर अपनी टिप्पणी दें।’

नासा ने तस्वीर के जरिए दर्शाया

दुनियाभर को इस खोज के बारे में जानकारी देते हुए नासा ने ट्वीट किया, ‘हमारे नासा मून मिशन के लूनर रेकॉन्सेन्स ऑर्बिटर को चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर मिला है।’ इसके साथ ही नासा ने इंपैक्ट साइट की एक तस्वीर भी जारी की है, जिसमें लैंडर विक्रम के मलबे और लैंडिंग की जगह को दर्शाया गया है। नासा के बयान में कहा गया है कि तस्वीर में दिखने वाले हरे बिंदु स्पेसक्राफ्ट के मलबे को दिखाते हैं और नीले बिंदु लैंडिंग के बाद जमीन पर हुए बदलाव को दिखाते हैं। तस्वीर में ‘S’ नाम से जिस बिंदु को दिखाया गया है, शान ने उसी के बारे में नासा को बताया था। शान द्वारा बताई गई मलबे की जगह लैंडर की क्रैश साइट से उत्तर-पश्चिम की ओर 750 मीटर की दूरी पर है।

You may have missed