कान पकड़ने लगे कांग्रेसी : अब पीएम मोदी को नहीं कहेंगे बुरा

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। हमेशा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निंदा करने वाले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की जुबान अब बदलने लगी है। कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने स्वीकार किया है कि हमेशा पीएम मोदी को बुरा (खलनायक के रूप में चित्रित करना) कहना ठीक नहीं है, तो क्या कांग्रेसी नेता अपनी भूल स्वीकार कर रहे हैं ? या फिर झूठे साबित होने से बचने के लिये एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं। इसका एक और अर्थ यह भी निकाला जा सकता है कि कांग्रेसी नेता अपनी पार्टी की ओर से हो रहीं भूलों का आंकलन करने लगे हैं या फिर यह भी हो सकता है कि कांग्रेसी नेता पटरी से उतर चुकी गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने की मशक्कत कर रहे हैं।

विनाश की राह पर चल रही है कांग्रेस ?

जबसे मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर में लागू धारा 370 को निष्प्रभावी किया है, तब से ही कांग्रेस में बौखलाहट का माहौल है। अनेक सीनियर और युवा नेता पार्टी लाइन को क्रॉस करके पीएम मोदी और उनकी सरकार की तारीफ कर चुके हैं, कुछ नेताओं ने तो कांग्रेस से इस्तीफा तक दे दिया, इनमें गांधी परिवार के करीबी कहलाने वाले राज्यसभा सांसद डॉ. संजय सिंह के अलावा भुबनेश्वर कलिता शामिल हैं। डॉ. संजय सिंह ने यह कहते हुए कांग्रेस और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद भाजपा जोइन कर ली कि आज पूरा देश पीएम मोदी के साथ खड़ा है। संजय सिंह अमेठी के राज परिवार से हैं। वह असम से राज्यसभा के सांसद थे। 2019 में कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर संसदीय सीट से टिकट दिया था, जहाँ वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये। डॉ. सिंह ने कांग्रेस से ही राजनीतिक करियर शुरू किया था। फिर राम मंदिर आंदोलन के दौरान वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गये थे। 1998 में उन्होंने कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को हराकर अमेठी से संसदीय चुनाव जीता था। संजय सिंह की धर्मपत्नी गरिमा सिंह भी अमेठी से भाजपा की विधायक हैं। जबकि भुबनेश्वर कलिता ने धारा 370 हटाये जाने के मुद्दे पर अपनी पार्टी के रुख से नाराज होकर पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप भुबनेश्वर कलिता ने कहा कि कांग्रेस अपने विनाश के रास्ते पर जा रही है और वह इसमें भागीदार नहीं बन सकते।

मोदी का मुकाबला करने के लिये क्या कर सकती है कांग्रेस ?

इसके बाद हाल ही में कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने स्वीकार किया कि पीएम मोदी ऐसी भाषा में बात करते हैं जो उन्हें लोगों से जोड़ती है। जब तक हम यह नहीं मान लेते कि वह ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें जनता सराहती है और जो काम पहले नहीं किये गये हैं, तब तक हम इस व्यक्ति का मुकाबला नहीं कर पाएँगे। उन्होंने आगाह किया कि यदि हम हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश कर रहे हैं तो हम उनका मुकाबला नहीं कर पाएँगे। मनमोहन सरकार में ग्रामीण विकास और पेयजल-स्वच्छता मंत्रालय सँभालने वाले जयराम रमेश ने कहा कि हम मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया, उसके महत्व को समझें, जिनकी बदौलत मोदी सत्ता में लौटे। उनके कामों ने ही उन्हें 30 प्रतिशत मतदाताओं ने सत्ता में वापस लाने का काम किया। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 37.4 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सत्तारूढ़ राजग को कुल मिलाकर 45 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

मोदी को बुरा कहना गलत : सिंघवी

इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जयराम रमेश के तर्क का समर्थन किया और कहा कि पीएम मोदी को बुरा कहना गलत है। ट्विटर पर समर्थन करते हुए सिंघवी ने कहा कि सरकार के काम का आकलन किसी व्यक्ति के आधार पर नहीं, अपितु मुद्दों के आधार पर करना चाहिये। सिंघवी ने कहा कि ‘मैंने हमेशा कहा है कि मोदी को बुरा कहना गलत है। सिर्फ इसलिये नहीं कि वह प्रधानमंत्री हैं, बल्कि ऐसा करके विपक्ष वास्तव में एक तरह से उनकी मदद ही करता है। काम हमेशा अच्छा, बुरा या सामान्य होता है। निश्चित रूप से उज्जवला योजना अन्य अच्छे कामों में से एक है।’

इसके बाद कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी जयराम रमेश और सिंघवी की बात का समर्थन किया और ट्वीट करके कहा कि ‘मैं छह साल से दलील दे रहा हूँ कि यदि नरेन्द्र मोदी कोई सही काम करते हैं या सही बात कहते हैं तो उनकी सराहना की जानी चाहिये। ताकि जब वह कुछ गलत करें और हम उनकी आलोचना करें तो उसकी विश्वसनीयता रहे। मैं विपक्ष के अन्य लोगों की इस राय पर सहमति के लिये स्वागत करता हूँ।’

सिंघवी ने फिर की मोदी की तारीफ

अब जब पीएम मोदी ने सोमवार को फ्रांस के बिआरित्ज में जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की और मोदी ने ट्रंप के सामने दो टूक शब्दों में कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में से ही एक है और इन मसलों पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है तो एक बार फिर कांग्रेसी प्रवक्ता सिंघवी मोदी के समर्थन में खड़े हो गये और उन्होंने मोदी के इस बयान की तारीफ करते हुए उसका स्वागत भी किया। इससे सिद्ध होता है कि मोदी से मुकाबला नहीं कर पाने को लेकर कांग्रेस नेता अपनी पार्टी के रुख की मुखर रूप से आलोचना करने लगे हैं यानी कि अपनी भूल स्वीकारने लगे हैं। इसमें यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि कांग्रेस को यदि चुनाव में मोदी का सामना करना है तो कांग्रेस को जनभावनाओं के अनुरूप व्यवहार करना सीखना पड़ेगा और मोदी सरकार की तरह ही साहसी निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। यानी कि कांग्रेस मोदी के मुकाबले पीछे ही नहीं, बल्कि बहुत पीछे छूट गई है, यह खुद कांग्रेस नेताओं के बयानों से स्पष्ट हो रहा है।

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