वैष्णव परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पूज्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने शुरू की निमाई पाठशाला

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जहां एक तरफ कोरोना वायरस महामारी के चलते स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी सब कुछ बंद है और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए इंटरनेट और आईटी का इस्तेमाल करते हुए शिक्षण केंद्रों द्वारा बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का एक प्रयास किया गया है जो बहुत हद तक सफल भी हो रहा है। वही दूसरी तरफ आध्यात्मिकता को आगे बढ़ाने के लिए एक पहल करते हुए पूज्य श्री पुंडरीक गोस्वामी महाराज जी ने ऑनलाइन क्लास का आयोजन किया है, जिससे हर उम्र के भक्तों को आध्यात्मिकता के बारे में ज्ञान दिया जाता है और उन्हें वैष्णव धर्म के बारे में और जानने का अवसर प्राप्त होता है।

इसलिए उन्होंने निमाई पाठशाला का आयोजन किया, जिसमें भक्तों को मन्त्रों के उच्चारण, जप आदि के बारे में सिखाया जाता है। यह पाठशाला भक्तों को एक वैष्णव के रूप में विकसित होने में मदद कर रही है। इन कक्षा में 2 वर्ष के बच्चों से लेकर हर उम्र के भक्त शामिल हैं। यह कक्षाएं हर रविवार Zoom App के जरिये होती हैं।अधिक जानकारी और पाठशाला से जुड़ने के लिए इस नंबर पर संपर्क करें- 7696644494, इस कक्षा में भाग लेने के लिए आप फेसबुक ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें –NimaiPathshalaonline  

इस कक्षा में क्या क्या सिखाया जाता है-

  1. श्लोक सीखना, उनके मतलब जानना, अलग अलग ग्रंथों से जैसे श्रीमदभागवतम और श्रीमद्भगवद गीता से।
  2. जप माला कैसे करना।
  3. अलग अलग वाद्ययंत्र सीखना जैसे मृदंग और करताल आदि।
  4. गऊ माता की सेवा कैसे करना।
  5. वैष्णव सदाचार के बारे में और सब बातें सीखना।

पूज्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज की धर्मपत्नी श्रीमती रेणुका गोस्वामी जी ने हमें बताया कि, “प्रत्येक व्यक्ति को आध्यात्मिकता की मूल बातें बताने का विचार हमारे जीवन में एक मार्गदर्शक उद्देश्य रहा है, क्योंकि हम एक सम्मानित गौड़ीय वैष्णव परम्परा से आते हैं। हमने इन कक्षाओं को महाराज श्री के आशीर्वाद और प्रेरणा से 2 साल पहले अमृतसर में शुरू किया था, जहाँ व्हाट्सएप के माध्यम से मैं हर हफ्ते 1 श्लोक बच्चों को भेजती थी। और 3 माताजी हैं जो एक शिक्षक के रूप में कार्य करती हैं और इन सत्रों को अमृतरस में संचालित करती हैं और उन्हें श्लोक सिखाती हैं जो मैं उन्हें भेजती हूँ।”

उन्होंने आगे बताया, “जब लॉकडाउन हुआ और भौतिक कक्षाएं नहीं हो सकीं, तो हमने सोचा कि इन कक्षाओं को ऑनलाइन शुरू किया जाए। Academic रूप से भी सभी स्कूल ऑनलाइन शिक्षा दे रहे हैं, इसलिए हमने सोचा कि हम हर किसी को वह प्रदान करें जिसकी कमी है.. इस मकसद के साथ हमने ये कक्षाएं शुरू कीं।”

निमाईपाठशाला की जाप कक्षा में गुरूदेव महाराज जी ने बताया कि मन्दिर के अंदर प्रांगण में जाते ही दंडवत प्रणाम करके वही पर आसन पर बैठक ठाकुर जी के चरणों का ध्यान करें, जो उठा हुआ चरण है उसके नीचे जो चिन्ह है वह पहला चिन्ह वज्र है ठाकुर जी वज्र से हमारे अंदर के जो विकार है, काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि उनका नाश करके हमें अपनी भक्ति प्रदान करें! दूसरा चिन्ह अंकुश है, जिस प्रकार अंकुश से मस्त हाथी को वश में किया जाता है, उसी प्रकार ठाकुर जी हमारे मन और इन्द्रियों पर अंकुश लगायें, ताकि हमारा मन और इन्द्रियां सिर्फ ठाकुर भक्ति में लगा रहे। तीसरा चिन्ह है, ध्वजा जिस प्रकार ध्वज जिसका हो उसी की सरकार होती है, उसी तरह हमारे ऊपर भी हमारे राधा रमण सरकार का ध्वज हमेशा रहे और हम उनके ध्वजा के नीचे हमेशा भक्ति में लीन रहें। चौथा चिन्ह है, कमल जिस प्रकार कीचड़ में रहकर भी कमल अपनी सुगंध फैलाता है उसी तरह ठाकुर जी कृपा करें और हम इस विषयी जगत में रहते हुए उनकी भक्ति में लगें रहे।

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