दिल हो तो सरदारों जैसा : हाईवे निर्माण के लिए 72 वर्ष पुराना गुरुद्वारा भी कर दिया ‘राष्ट्र को समर्पित’ !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 13 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। हमारे देश में सरदार शब्द सुनते ही एक तो लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की छवि उभरती है और दूसरे सिख समुदाय के पगड़ी धारी सरदारों के चेहरे आँखों के सामने आ जाते हैं। यद्यपि आज हम सरदार पटेल की बात नहीं कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं सिख समुदाय के सरदारों की। सिख समुदाय या सरदारों का यह समुदाय अपनी ज़िंदादिली, उदारता, साहसिकता, बहादुरी, शूरवीरता के लिए विख्यात है। समय-समय पर इस समुदाय के लोगों ने राष्ट्र के लिए अपना सब कुछ दाँव पर लगा देने से परहेज नहीं किया। इनकी उदारता के उदाहरण भी कई बार देखने को मिलते हैं। सरदारों का दिल सागर जैसा विशाल होता है। वे अपने देश, धर्म, समाज, नगर-गाँव से लेकर अपने भाई-बंधु और मित्र के लिए समय आने पर कुछ भी कुर गुज़रने से हिचकिचाते नहीं हैं। ऐसा ही एक उत्तम उदाहरण जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में सामने आया है, जहाँ सिख समुदाय के लोगों ने धर्म को विकास के मार्ग की बाधा नहीं बनने दिया।

वास्तव में केन्द्र सरकार यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण (NHAI) जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-बारामूला को जोड़ने के लिए एक राष्ट्रीय राजमार्ग (NATIONAL HIGHWAY) बनाना चाहते हैं, परंतु इस हाईवे के निर्माण मार्ग में एक 72 वर्ष पुराना गुरुद्वारा पड़ता है। इस गुरुद्वारे के कारण श्रीनगर-बारामूला राजमार्ग का निर्माण पिछले एक दशक से अटका हुआ था, परंतु अब सिख समुदाय ने श्रीनगर जिला प्रशासन के समक्ष यह गुरुद्वारा तोड़ने पर सहमति दे दी है। सिख समुदाय और जिला प्रशासन के बीच हुए समझौते के अनुसार तोड़े जाने वाले गुरुद्वारे के समीप एक वैकल्पिक स्थान पर नए गुरुद्वारे का निर्माण किया जाएगा। सिख समुदाय ने विकास के कार्य में सहयोग देकर पूरे देश के लोगों के समक्ष यह अनुपम दृष्टांत प्रस्तुत किया है कि बात जब विकास की हो, तो धार्मिक भावनाओं के साथ थोड़ा समझौता कर लेना चाहिए, क्योंकि विकास भी एक प्रकार का धर्म ही है, जिसका सहस्त्रों लोगों को लाभ पहुँचेगा।

गद्गद् हुए श्रीनगर उपायुक्त

श्रीनगर-बारामूला राजमार्ग के लिए जिस गुरुद्वारे को तोड़े जाने को सिख समुदाय ने हरी झंडी दी है, उसका निर्माण वर्ष 1947 में किया गया था। इस गुरुद्वारे का नाम है गुरुद्वारा दमदमा साहिब। यह गुरुद्वारा बारामूला में बारामूला-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग 1ए पर स्थित है। इस गुरुद्वारे में मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय पाकिस्तान से आए प्रवासी भारतीयों की बहुत सेवा की। यहाँ वर्तमान में लंगर चलाया जाता है। 72 वर्ष पुराना और ऐतिहासिक होने के बावज़ूद गुरुद्वारे तोड़ने पर सहमति देने पर सिख समुदाय के लोगों के प्रति श्रीनगर उपायुक्त शाहिद इक़बाल चौधरी गद्गद् हो गए। सहमति बनने के बाद चौधरी ने कहा, ‘यह ऐतिहासिक है। श्रीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए गुरुद्वारा समिति ने सहमति दे दी। हमारी बातचीत हो रही थी। वैकल्पिक भूमि और सहयोग के लिए हमारा ऑफर उन्होंने स्वीकार कर लिया। संगत को धन्यवाद देने के लिए कोई शब्द नहीं है।’

और शुरू हुआ गुरुद्वारा तोड़ने का कार्य

दमदमा साहिब गुरुद्वारा समिति की ओर से सहमति मिलने के बाद श्रीनगर जिला प्रशासन ने 72 वर्ष पुराने और सेवा की मिसाल रहे गुरुद्वारे को तोड़ने का कार्य प्रारंभ कर दिया। गुरुवार को श्रीनगर उपायुक्त चौधरी और गुरुद्वारा प्रबंधन सदस्यों की उपस्थिति में गुरुद्वारा दमदमा साहिब को तोड़ने का कार्य शुरू किया गया। जब तक नई जगह पर गुरुद्वारा नहीं बन जाता, तब तक यह एक स्थायी स्थान में रहेगा। राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) को सिख समुदाय की ओर से दी गई डिज़ाइन के अनुसार नए गुरुद्वारे के निर्माण का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। शीघ्र ही नए गुरुद्वारे का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा।

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