एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव के नफा-नुकसान

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Simultaneous Election

नई दिल्ली। कई सालों से पूरे देश में एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव (Simultaneous Election of Lok Sabha and Assembly polls) कराने की बात हो रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात को दोहराते आ रहे हैं। आज राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी इस बात के संकेत मिले हैं कि मोदी सरकार लोकसभा चुनाव 2019 के बजाए 2018 में विधानसभा चुनावों के साथ करा सकती है।

नीति आयोग ने पेश की थी अपनी रिपोर्ट

इस मामले से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि नीति आयोग ने एकसाथ चुनाव कराने को लेकर अपनी रिपोर्ट दी थी। नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर एकसाथ चुनाव कराना है तो कुछ राज्यों के विधानसभा कार्यकाल में बढ़ोतरी और कुछ के कार्यकाल में कटौती करनी होगी। हालांकि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में यह आसान नहीं होगा। हर साल यहां किसी न किसी राज्य में चुनाव जरूर होता है।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच आपसी सहमति जरूरी

इससे इतर एकसाथ चुनाव कराने की राह में तमाम समस्याएं हैं। कई बार चुनी गई सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाती है और बीच में चुनाव की घोषणा हो जाती है। इसके अलावा एकसाथ चुनाव (Simultaneous Election) को लेकर केंद्र और सभी राज्य सरकारों के बीच आपसी सहमति जरूरी है। तमाम राजनीतिक पार्टियों के एकजुट होने पर ही यह मुमकिन है। देश में दो तरह की पार्टियां हैं। एक राष्ट्रीय पार्टियां हैं तो दूसरी क्षेत्रीय पार्टियां हैं। दोनों दलों की विचारधारा और नीतियां अलग-अलग होती है।

संविधान के नियमों में बदलाव करने होंगे

इतिहास गवाह है कि जिन राज्यों में लोकसभा और विधानसभा (Lok sabha and Vidhan Sabha)  चुनाव एकसाथ (Simultaneous Election) होते हैं उसमें राष्ट्रीय दलों को फायदा पहुंचता है। ऐसे में क्षेत्रीय दल इसका समर्थन कभी नहीं करेगी। कानूनी चुनौती की बात करें तो एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए संविधान के नियमों (Rules of Constitution) में बदलाव करने होंगे। मौजूदा अनुच्छेदों में संशोधन के लिए संशोधन प्रस्ताव दोनों सदनों में पारित कराना होगा।

इन राज्यों में होने वाले हैं चुनाव

2018 की बात करें तो मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है। इसी साल अप्रैल महीने में कर्नाटक और मिजोरम में विधानसभा चुनाव (Assembly Polls) होने वाले हैं। 2019 की बात करें तो लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के अलावा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उड़ीसा, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे।

विपक्षी दल एकसाथ चुनाव के खिलाफ

कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को लगता है कि मोदी सरकार 2019 में एकसाथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव (Simultaneous Election) करा सकती है। बजट सत्र काफी छोटा रखा गया है जो इसकी तरफ इशारा कर रहे हैं। छोटे बजट सत्र को लेकर कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नाखुशी जताई। इससे पहले लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव और मायावती भी आशंका जता चुकी हैं कि मोदी सरकार 2018 में एकसाथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव करा सकती है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल किसी भी सूरत में एकसाथ चुनाव करवाने के मूड में नहीं दिख रही है।

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