Smartphone की लत हाथ की उंगलियों को बेकाम बना सकती है

Smartphone Addiction

नई दिल्ली: दुनियां भर की भाग दौर में हर व्यक्ति अपनी अपनी निजी लाइफ में बिजी है, फिर चाहे वो युवक हो या युवतियां। आदमी सुबह घर से निकल अपनी जॉब पर चले जाते हैं, तो दूसरी ओर महिलाये भी तेज़ी से आगे बढ़ कंधे से कंधा मिलकर आगे बढ़ रही है। 6-7 वर्ष से 17-18 वर्ष के स्टूडेंट्स की बात की जाए तो वह लगभग अपनी स्टडीज और co-curricular एक्टिविटीज में बिजी रहते हैं। 18 वर्ष से 23 वर्ष के ग्रेजुएट्स की बात की जाए तो वह अपनी स्टडीज और जॉब में बिजी रहते हैं इसके अलावा आजकल के युवा Smartphone का इतना अधिक उपयोग करते हैं कि वे इसके लत का शिकार हो रहे हैं।

2 से 3 वर्ष के बच्चे को देखा जाये तो वह नई पोधे के सामान होते हैं, जिसका समय रहते ध्यान दिया जाए तो वह बहुत सुन्दर गुणवान बनते हैं और ठीक से ध्यान न दिया जाए तो वे कई प्रकार के बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। महंगाई के चलते अधिकतर माँ भी कामकाजी हो गयी है। जिस कारण वह अपने बच्चो का पूर्ण ध्यान नहीं रख पाती। किसी भी बच्चे के लिए अति अवश्यक है कि वह अपने आस पास के (वातावरण) environment को समझे। घर पर बच्चे की माँ काम करने में इस प्रकार व्यस्त हो जाती है कि बच्चे को खाना के लिए खाना दे देती है, खेलने के लिए खिलोने दे देती हैं, या T.V के आगे T.V देखने के लिए बैठा देती है। इन सबके बावजूद भी अगर बच्चा रोता है या परेशान करता है, तो उसे Mobile phone दे दिया जाता है। phone हाथ में आने के बाद बच्चा अपनी समझ से उल्टा सीधा फिन्गेर्स से टच करके मोबाइल चलाना सीख ही जाता है।

Technology के चलते Smartphone (Mobile Phone) अब कॉल करने या सुनने के अलावा भी बहुत से उपयोग में आता आता है, फिर चाहे वो फोटोज खीचने, सोंग सुनने या गेम्स खलना आदि ही क्यों न हो। गेम्स खलना तो वेसे भी बच्चो का शोक होता हैं। गर्मी की तपती धुप और सर्दी की बर्फीली हवा के चलने के कारण अधिकतर माँ अपने बच्चे को बहार खलने नहीं भेजना चाहती और घर में ही रखती है। घर के अंदर रहकर बच्चा चार दीवारों के बीच रहने का आदि हो जाता है। घर में रहकर न ही सारा दिन सोया या फिर आराम किया जा सकता है, न ही खाया जा सकता है, और न ही सारा दिन खेला (play) जा सकता है। सभी काम एक लिमिट में ही किये जाते हैं। इन सबके बाद भी केवल mobile phone एक ऐसा यन्त्र है जो 24 घंटे use होता हैं। Smartphone खाते – पीते, घूमते हुए या बिस्तर पर लेटे हुए भी use किया जाता है। स्टडीज की ओर ध्यान दिया जाए तो अब स्टडीज भी online हो गयी हैं, Nursery के बच्चे से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट के विद्यार्थी तक online पढाई करते हैं।

आज से कुछ वर्ष पहले तक जहा कॉपी किताब लिए बिना नर्सरी का बच्चे स्कूल नही जा सकते थें, वहां आज technology ने तरकी कर ली है। आज स्कूल में नर्सरी के विद्यार्थी कॉपी किताब ले जाने के बजाये mobile phone और tablet जैसे यंत्रो के द्वारा पढाई करते हैं। इन यंत्रो द्वारा पढ़ाई करना कोई गलत बात तो नहीं हैं, लेकिन इसके दुरूपयोग भी बहुत हैं। अधिक मोबाइल use करने से इसका असर आँखों पर पड़ता है, जिससे eyesight weak हो जाती है, और छोटी – छोटी उम्र के बच्चो के चश्में लग जाते हैं। इसके अलवा भी बेहद खतनाक दुरपयोग तो तब होता है, जब 2 से 4 वर्ष के बच्चे Smartphone और tablet जैसी लत के शिकार हो जाते हैं। उन्हें कॉपी और पेंसिल अगर दे दी जाये और उनसे कॉपी पर कुछ भी लिखवाया जाए तो वह नहीं लिख पायंगे क्योंकि इन बच्चों के हथेली और हाथ के thumb के द्वारा mobile phone पकड़ना तो सिखा दिया गया है लेकिन हाथ से किस प्रकार पेंसिल को पकड़कर लिखना हैं, ये उन्हें नहीं बताया गया। बच्चों के हाथ की एक तरह से अकड़ ही गयी हैं। कॉपी पेंसिल का बच्चों को उपयोग करना अति आवश्यक है, अन्यथा इनका उपयोग न होने के कारण उनके आने वाले future में वह पेंसिल और कॉपी से काम करना तो देरी से सीख ही जायंगे लेकिन बड़ी कक्षाओ में अधिक गलतियाँ करंगे जो उन्हें तरकियों की उचाइयों तक पहुचने में कठिन साबित हो सकता हैं। अगर सभी माता – पिता के द्वारा उनकी पेरेंटिंग की और अधिक ध्यान दिया जाए तो फिर चाहे कोई भी बच्चा ही क्यों न हो उसे Success होने से कोई भी नही रोक सकता।

युवाप्रेश आपको अगाह कर रहा है कि छोटे बच्चों को Smartphone से दूर रखें, नहीं तो वे इसकी लत का शिकार हो सकते हैं।

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