जब आकाश में नहीं होगा सूर्य, तब लगेगा ग्रहण ! आप देखना चाहते हैं ? तो पहुँच जाइए इस जगह !

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अहमदाबाद 2 जुलाई 2019 (YUVAPRESS)। खगोल शास्त्रियों के लिये ग्रहण भले ही एक रोचक खगोलीय घटना हो, परंतु धार्मिक दृष्टि से ग्रहण को ग्रहों के लिये कष्टदायी माना जाता है और इसीलिये यह अशुभ माना जाता है और ग्रहण के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। जो ग्रह ग्रहण से प्रभावित होते हैं, उन ग्रहों की महादशा वाले व्यक्तियों पर भी ग्रहण का प्रभाव अवश्य पड़ता है। 2 जुलाई मंगलवार को साल 2019 का दूसरा सूर्य ग्रहण है, यह पूर्ण ग्रहण है। जबकि इसी महीने में 17 जुलाई को चंद्र ग्रहण है। इस प्रकार 2 से 17 जुलाई के दौरान पंद्रह दिन के भीतर दो-दो ग्रहण हो रहे हैं। इसलिये विशेषकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को थोड़ा सँभलकर रहने की आवश्यकता है।

भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण

वैसे तो 2 जुलाई को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। क्योंकि यह सूर्य ग्रहण रात को 11.55 बजे शुरू होगा और 3 जुलाई की सुबह 3.20 बजे तक चलेगा। ग्रहण का सूतक एक दिन पहले से ही लग जाता है। इसलिये मंगलवार को दिन के दौरान सूतक रहेगा और इस दौरान उपवास करके ईश्वर से प्रार्थना करना अच्छा माना जाता है। यह सूर्य ग्रहण न्यूजीलैंड के तट से दिखना शुरू होगा और दक्षिणी प्रशांत, चिली तथा अर्जेंटीना के कुछ भागों में दिखेगा। इसके अलावा यह सूर्य ग्रहण कुछ दक्षिण अमेरिकी देशों ब्राजील और उरुग्वे में भी देखा जा सकेगा। यह सूर्य ग्रहण लगभग 4 घण्टे और 55 मिनट तक चलेगा।

भारत में नहीं पड़ेगा ग्रहण का असर

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण के सूतक का प्रभाव उन्हीं स्थानों पर पड़ता है, जहाँ ग्रहण दिखाई देता है या जहाँ ग्रहण के दौरान सूर्य की रोशनी पड़ती है। ऐसे में भारत में इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि जब यह सूर्य ग्रहण होगा तब भारत में रात होगी। हालाँकि इसके बावजूद ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ग्रहण के दौरान कुंडली और ग्रहों की स्थिति के कारण कुछ लोगों पर इसका प्रभाव अवश्य पड़ सकता है।

यह सूर्य ग्रहण इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है। इस साल का पहला सूर्य ग्रहण इसी साल 5 जनवरी को हुआ था, जबकि साल का तीसरा सूर्य ग्रहण दिसंबर में होगा। भारत में सूर्य ग्रहण भले ही दिखाई नहीं देगा, परंतु इसे इंटरनेट के माध्यम से देखने के लिये खगोल शास्त्रियों ने तैयारी कर ली है। खगोल शास्त्र के अनुसार जब सूर्य, चंद्र और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आते हैं तब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्र के आने से पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता है और इसे पूर्ण या खग्रास सूर्य ग्रहण कहते हैं।

गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और बीमार लोग रहें सावधान !

जबकि सनातन धर्म के अनुसार ग्रहण की घटना समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें अमृत कलश मिलने पर देवों और असुरों में छीना-झपटी होती है और जब भगवान विष्णु चालाकी से मोहिनी स्वरूप धारण कर असुरों से यह कलश प्राप्त करके देवों को कतारबद्ध बैठाकर अमृतपान करवाते हैं, तब एक असुर भेष बदलकर देवों की कतार में बैठ जाता है और अमृत पान कर लेता है। इसका पता चलने पर भगवान विष्णु सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर देते हैं। वह अमृत पान कर चुका था, इसलिये अमर हो गया, सिर राहु और धड़ केतु के रूप में अंतरिक्ष में व्याप्त है, चूँकि सूर्य और चंद्र ने ही उसे पहचाना था, इसलिये वह ग्रहण के रूप में इन ग्रहों को ग्रस लेते हैं या कष्ट देते हैं। ग्रहण सूर्य और चंद्र जैसे ग्रहों के लिये अत्यंत कष्टदायी होता है, इसलिये ग्रहण को अशुभ माना जाता है और ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना या उसकी शुरुआत करना वर्जित होता है। ग्रहण के दौरान भोजन करने और पानी पीने की भी मनाही होती है और मंत्रोच्चारण कर ग्रहों को ग्रहण से पीड़ा में राहत मिले, ऐसी ईश्वर से प्रार्थना की जाती है।

गर्भवती स्त्रियों, बच्चों तथा बीमार व्यक्ति को बहुत जरूरी हो तो ही भोजन करने की सलाह दी जाती है। उन्हें ऐसा ही भोजन करना चाहिये, जिसमें ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिये तुलसीदल (पत्ता) रखा गया हो। इसी प्रकार पानी को भी ग्रहण के प्रभाव से बचाने के लिये उसमें तुलसी दल या कुश अथवा काले तिल डालने का विशेष महत्व बताया गया है। इतना ही नहीं, ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानियाँ बरतने की भी सलाह दी जाती है। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। उन्हें ग्रहण के दौरान चाकू, ब्लेड, कैंची जैसी काटने वाली वस्तुओं को उपयोग करने से बचने की भी सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे बच्चों के अंगों के विकास पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहती है।

एक दिन पहले लग जाएगा चंद्र ग्रहण का सूतक

चंद्र ग्रहण की बात करें तो चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को लगता है। चंद्र ग्रहण 17 जुलाई को लगेगा, इस दिन बुधवार है। ग्रहण का सूतक एक दिन पहले से लग जाता है। इसलिये 16 जुलाई मंगलवार को ग्रहण का सूतक लग जाएगा। यह ग्रहण अषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा। चंद्र ग्रहण का समय 16 जुलाई की मध्य रात्रि के बाद 1.32 बजे से शुरू होगा और लगभग 3 घण्टे चलेगा।

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