सूर्यग्रहण : जानिये आपके जीवन पर क्या पड़ेगा प्रभाव ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 25 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। वर्ष 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर बृहस्पतिवार को है। सूर्य ग्रहण को लेकर कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। अधिकांश लोग सूर्य ग्रहण के देश दुनिया पर और निजी जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता कर रहे हैं। हम इन्हीं शंकाओं का समाधान करने वाले हैं।

सूर्य ग्रहण का समय और सूतक

इस साल का यह अंतिम सूर्य ग्रहण है, जो बृहस्पतिवार को सुबह 8 बजे शुरू होगा और दोपहर को 1.36 बजे तक चलेगा। इस प्रकार 58 साल के इतिहास में पहली बार 5 घण्टे और 36 मिनट का लंबा सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण के दौरान सुबह 9.06 बजे कंकण आरंभ होगा। ग्रहण का परम ग्रास अर्थात् मध्य सुबह 10.48 बजे होगा और कंकण का समापन दोपहर 12.29 बजे होगा। ग्रहण का मोक्ष काल अर्थात् समापन दोपहर 1.36 बजे होगा। इस प्रकार पूरे ग्रहण के दौरान सूर्य 3 मिनट और 34 सेकंड के लिये कंकण स्वरूप में दिखाई देगा। इसी लिये इस ग्रहण को कंकण सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा। जबकि इसी साल 6 जनवरी को भी सूर्यग्रहण हुआ था, परंतु वह भारत में दिखाई नहीं दिया था।

सबसे पहले द्वारका गुजरात में दिखेगा ग्रहण

यह ग्रहण सबसे पहले गुजरात के द्वारका में दिखाई देगा। यहाँ सुबह 8.03 बजे से ग्रहण दिखना प्रारंभ हो जाएगा, जबकि कंकण रूप में सूर्य को केवल दक्षिण भारत के कुछ राज्य केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में ही देखा जा सकेगा। शेष भारत में सूर्य ग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। तमिलनाडु के मदुरै में कंकण सूर्य ग्रहण सबसे अधिक देखा जा सकेगा। क्योंकि यहाँ ग्रासमान 93.1 प्रतिशत रहेगा, अर्थात् ग्रहण के दौरान इतना सूर्य ढँका हुआ दिखाई देगा।

शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ होने से 12 घण्टे पहले से लग जाता है। इस नियम के अनुसार भारत में ग्रहण का सूतक 25 दिसंबर बुधवार की रात 8 बजे से ही लग चुका है। ग्रहण के समापन के साथ बृहस्पतिवार को दोपहर 1.36 बजे सूतक भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद स्नान, दान और देवी-देवताओं का स्पर्श और पूजा-पाठ किया जा सकेगा।

इस सूर्य ग्रहण को काफी दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा ग्रहण 58 साल के बाद लग रहा है। यह दुर्लभ इसलिये है, क्योंकि ग्रहण के समय धनु राशि में केतु सहित 6 ग्रह एक साथ मौजूद रहेंगे। बुधवार को ही मिथुन और कन्या राशि का स्वामी ग्रह बुध वृश्चिक राशि से निकल कर धनु राशि में आ चुका है। अब 13 जनवरी तक बुध इसी राशि में रहेगा। बुध के इस राशि में आने से ही 6 ग्रहों सूर्य, शनि, गुरु, चंद्रमा, शनि और बुध का सुपर संयोग बना है। एक साथ 6 ग्रहों के किसी राशि में इकट्ठे होने का संयोग अद्भुत माना जाता है।

हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से इस ग्रहण को काफी प्रभावशाली माना जाता है। चूँकि पूरे देश में दिखाई देगा। इसलिये पूरे देश पर इसका प्रभाव भी दिखाई देगा। भारत के साथ-साथ इसका प्रभाव पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफग़ानिस्तान और चीन आदि पर भी पड़ेगा। ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दिन ही काल पुरुष की कुंडली में धनु लग्न उदय हो रहा है। भारत की राशि कर्क है और कर्क राशि के छठे भाव में यह ग्रहण लगेगा। छठा भाव रोग, शत्रु, परेशानी, विपत्ति और प्राकृतिक आपदाओं के लिये जिम्मेदार होता है। इसके अलावा धनु में शनि बिराजमान होने से इस राशि में मौजूद सभी 6 ग्रह भारी हो जाएँगे। काल पुरुष की कुंडली में जब सारे ग्रह एक तरफ चले जाते हैं तो समझना चाहिये कि जीवन में मुश्किलें आ सकती हैं।

मुश्किलों के रूप में रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। शत्रु सक्रिय हो सकते हैं, जो कि हो चुका है और भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर घाटी में संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी शुरू की है। इस गोलाबारी से भारत का एक सैन्य अफसर शहीद हो गया है, जबकि दो नागरिक घायल भी हुए हैं। प्राकृतिक आपदा के रूप में भूकंप, भारी वर्षा या भयंकर बर्फबारी हो सकती है। सूर्य ग्रहण से पूर्व इसके भी संकेत मिले हैं। पिछले दिनों ही भूकंप के झटके महसूस किये गये थे, जिसका केन्द्र अफग़ानिस्तान के हिंदूकुश में था। इस भूकंप ने अफग़ानिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान और उत्तरी भारत को हिला दिया था। उत्तर भारत में भारी बर्फबारी भी हो रही है और बुधवार को मुंबई में भी बारिश हुई है।

सूर्य ग्रहण के प्रभाव से बचने के उपाय

सूर्य ग्रहण से 15 दिन पहले, सूर्य ग्रहण के दौरान और सूर्य ग्रहण के बाद 15 दिन तक सावधान रहना चाहिये। अभी धनु मास चल रहा है, जो कि अशुभ मल मास कहलाता है। इसलिये यह आपके मान-सम्मान को हानि पहुँचा सकता है। बिज़नेस में नुकसान पहुँचा सकता है। नौकरी पर भी आँच आ सकती है। यहाँ तक कि ज्योतिषियों के अनुसार युद्ध तक के हालात पैदा हो सकते हैं। यह ग्रहण पद-प्रतिष्ठा गँवाने का भी कारण बन सकता है। राजनीति में सक्रिय लोगों के लिये भी खराब स्थिति पैदा कर सकता है। नासा ने चेतावनी दी है कि इस ग्रहण को खुली आँखों से न देखें। ग्रहण को देखने के लिये सनग्लास का उपयोग करें। इसके अलावा और सावधानी बरतनी हो तो इसे ऑनलाइन देख सकते हैं।

हालाँकि कुछ उपाय करने से ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। धनु राशि के दो भारी ग्रह शनि और सूर्य की उपासना करने से सूर्य ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है। इसके लिये ग्रहण के बाद सूर्य को 15 दिन तक जल में शहद, गुड़ अथवा लाल मिर्च डाल कर अर्ध्य देना चाहिये। इसी प्रकार शनि के प्रकोप से बचने के लिये चींटियों को आटा अथवा चीनी डालनी चाहिये। ग्रहण समाप्त होने के बाद केतु को शांत करने के लिये भी चींटियों को आटा डालना चाहिये और कुत्ते को दूध पिलाने से आनेवाला संकट टल सकता है। ग्रहण के बाद दही से तिलक अवश्य लगाएँ अथवा पानी में गंगा जल मिला कर स्नान करें, इससे ग्रहण का प्रभाव खत्म हो जाता है। शास्त्रों में ग्रहण के बाद दान का काफी महत्व बताया गया है। हालाँकि ग्रहण के बाद आटा अथवा गुड़ दान करना चाहिये, धान्य का दान नहीं करें। ब्राह्मण को दान करने से बिज़नेस में नुकसान, नौकरी पर आँच या चरित्र पर लगने वाले आरोपों से बचाव होता है।

ज्योतिषियों के अनुसार यह सूर्य ग्रहण तबाही का कारण भी बन सकता है। इसका असर देश-दुनिया के साथ-साथ निजी जीवन पर भी पड़ेगा, इसलिये लोगों को संभल कर रहने की सलाह भी दी गई है।

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