एक दिन-दो जन्म दिन : राजधानी गुजरात की, पर शासक नहीं है ‘गुजराती’ !

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* 54 साल का हुआ गांधीनगर

* रूपाणी का 63वाँ जन्म दिवस

आलेख : कन्हैया कोष्टी

गांधीनगर 2 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। गुजरात की राजधानी गांधीनगर और वहाँ बैठ कर शासन करने वाले मुख्यमंत्री विजय रूपाणी दोनों के लिए 2 अगस्त का दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि गांधीनगर आज 54 साल का हो गया, तो रूपाणी का आज 63वाँ जन्म दिवस है। गांधीनगर की स्थापना 2 अगस्त, 1965 को हुई थी, तो मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त, 1956 को हुआ था।

सोशल मीडिया पर गांधीनगर और उसके नाथ रूपाणी को जन्म दिवस की शुभकामनाएँ दी जा रही हैं। इनमें सबसे पहला नाम आता है गृह मंत्री अमित शाह का, जिनका गृह राज्य गुजरात है और संसदीय क्षेत्र गांधीनगर। इसीलिए गृह मंत्री अमित शाह ने ट्विटर पर गांधीनगर के स्थापना दिवस और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के जन्म दिवस पर शुभकामनाएँ दीं।

खड़ी-आड़ी सड़कों के जाल से बना गांधीनगर

2 अगस्त का दिन गुजरात के लिए दो तरह से महत्वपूर्ण है, परंतु पहले बात राजधानी की ही कर लेते हैं। गुजरात की स्थापना तो 1 मई, 1960 को हो गई थी और राजधानी अहमदाबाद थी, परंतु अहमदाबाद गुजरात की आर्थिक व औद्योगिक गतिविधियों का मुख्य केन्द्र था। इसीलिए तत्कालीन मुख्यमंत्री जीवराज मेहता सरकार के मन में गुजरात के लिए कोई और स्थान को राजधानी बनाने का विचार उपजा। यहीं नई राजधानी की नींव पड़ी। नई राजधानी का नाम रखने की बात आई, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री जीवराज मेहता ने 16 मार्च, 1960 को इसका नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर गांधीनगर रखने का सुझाव दिया। इसके बाद अहमदाबाद से 65 किलोमीटर दूर गांधीनगर शहर की 2 अगस्त, 1965 को गुजरात विद्युत बोर्ड (GEB) कॉलोनी के पास पहली ईंट रखी गई। उस वक्त मुख्यमंत्री हितेन्द्र देसाई थे। शहर की संरचना का दायित्व चीफ आर्किटेक्ट एच. के. मेवाडा और उनके सहयोगी प्रकाश एम. आप्टे को सौंपा गया। गांधीनगर शहर को चंडीगढ मॉडल पर विकसित किया गया और विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया। गांधीनगर में सेक्टर क, ख, ग, घ, च, छ और ज नामक खड़े और सेक्टर 1, 2, 3, 4, 5, 6 और 7 नामक आड़े रास्ते हैं। शब्दों वाले सेक्टर की सड़कों की दिशा उत्तर-दक्षिण है, जबकि अंकों वाले सेक्टर की सड़कों की दिशा पूर्व-पश्चिम है। खड़े और आड़े मार्ग प्रत्येक एक किलोमीटर पर एक-दूसरे को काटते हैं। सड़कें कुछ भागों में पूर्व-पश्चिम, तो कुछ भागों में उत्तर-दक्षिण है। गांधीनगर की संरचना में सिंधु संस्कृति की अनोखी झलक भी देखने को मिलती है। गांधीनगर हरित नगरी है और साथ ही शांत भी है। यहाँ अक्षरधाम मंदिर, बालोद्यान, गुजरात विधानसभा, इन्फॉसिटी, महात्मा मंदिर, स्वर्णिम पार्क, सरिता उद्यान, हिरन उद्यान, सचिवालय, स्वप्न सृष्टि जलोद्यान, अरमनाथ मंदिर और साबरमती नदी के तट पर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल का समाधि स्थल ‘नर्मदा घाट’ जैसे दर्शनीय स्थल हैं।

बर्मा में जन्मे मुख्यमंत्री विजय रूपाणी

अब बात करते हैं मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की। रूपाणी गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री हैं। उनसे पहले गुजरात के सभी 15 मुख्यमंत्री जो रहे, उन सबका जन्म स्थल गुजरात रहा, परंतु एकमात्र रूपाणी ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जो तकनीकी रूप से मूलत: गुजरात के नहीं हैं। विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त, 1956 को तत्कालीन बर्मा (अब म्यानमार) में रंगून के यांगोन में मायाबेन व रमणिकलाल रूपाणी के घर हुआ। जैन-बनिया (वाणिया) परिवार में जन्मे रूपाणी अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़े हैं। उनका परिवार बर्मा में राजनीतिक अस्थिरता के चलते 1960 में गुजरात के राजकोट में स्थानांतरित हो गया। विजय रूपाणी ने धर्मेन्द्रसिंहजी आर्ट्स कॉलेज से बीए और सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। विजय रूपाणी पिता द्वारा स्थापित ट्रेडिंग फर्म रसिकलाल एण्ड सन्स में भागीदार थे। उन्होंने इस फर्म में स्टॉक ब्रॉकर के रूप में काम किया। इसी दौरान विजय रूपाणी ने विद्यार्थी जीवन से ही अखिल विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी-ABVP) जॉइन कर ली। 1971 में रूपाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके राजनीतिक दल जनसंघ में प्रवेश किया। 1980 में भाजपा की स्थापना के साथ रूपाणी भाजपा नेता बन गए। आपातकाल के दौरान रूपाणी ने भुज और भावनगर की जेलों में 11 महीने काटे। 1978 से 1981 तक वे संघ के प्रचारक रहे। 1987 में रूपाणी पहली बार राजकोट महानगर पालिका (RMC) में भाजपा पार्षद के रूप में निर्वाचित हुए और ड्रैनेज समिति के अध्यक्ष भी ने। 1988 से 1996 तक वे आरएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे। रूपाणी 1995 में भी मनपा चुनाव जीते। भाजपा को बहुमत मिलने के कारण रूपाणी को 1996 से 1997 तक महापौर बनाया गया। 1998 में रूपाणी ने गुजरात भाजपा महासचिव और मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल के कार्यकाल में बनी भाजपा घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2006 में विजय रूपाणी गुजरात पर्यटन निगम लिमिटेड (TGCL) के अध्यक्ष बने। रूपाणी ने 2006 में राज्यसभा चुनाव जीता और 2012 तक वे राज्यसभा सांसद रहे। रूपाणी चार बार गुजरात भाजपा महासचिव रहे। नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्रित्वकाल में रूपाणी को 2013 में गुजरात म्युनिसिपल फाइनांस बोर्ड (GMFB) का अध्यक्ष नयुक्त किया गया। अगस्त-2014 में तत्कालीन गुजरात विधानसभा अध्यक्ष वजूभाई वाळा ने कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के कारण अध्यक्ष व विधायक पद से त्यागपत्र दिया, तब वाळा के त्यागपत्र से रिक्त हुई राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट से भाजपा ने रूपाणी को उम्मीदवार बनाया। 19 अक्टूबर, 2014 को रूपाणी ने राजकोट पश्चिम उप चुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की और पहली बार विधायक बन कर विधानसभा पहुँचे। आनंदीबेन मंत्रिमंडल में रूपाणी परिवहन, जलापूर्ति, श्रम एवं रोजगार मंत्री रहे। 19 फरवरी, 2016 को विजय रूपाणी गुजरात भाजपा अध्यक्ष बनाए गए। वे अगस्त-2016 तक इस पद पर रहे। पाटीदार अनामत आंदोलन के चलते जब 1 अगस्त, 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने त्यागपत्र दे दिया, तो भाजपा हाईकमान ने रूपाणी को गुजरात की गद्दी सौंपी। रूपाणी ने 7 अगस्त, 2016 को पहली बार गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। गुजरात विधानसभा चुनाव 220117 में भी भाजपा को बहुमत मिला और रूपाणी मुख्यमंत्री के रूप में बरकरार रहे।

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