दिल्ली के दंगल में STAR WAR : एक्टर, क्रिकेटर, बॉक्सर और सिंगर मैदान में, सभी 7 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला

Written by

देश की राजधानी और राजनीति के केन्द्रबिन्दु दिल्ली में लोकसभा चुनाव 2019 का दंगल शुरू हो गया है। इस दंगल में एक बार फिर STAR WAR देखने को मिलने वाली है। केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने इस चुनावी दंगल में नेताओं के साथ-साथ अभिनेता, क्रिकेटर और सिंगर जैसे सैलिब्रिटीज को उतारा है। वहीं कांग्रेस ने चुनावी अखाड़े में बॉक्सर विजेन्दर सिंह को उतार कर चुनावी जंग को रोचक बना दिया है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी (आआपा-AAP) और कांग्रेस के बीच चुनावी गठजोड़ नहीं हो पाने के कारण दिल्ली की सभी 7 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस-AAP के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है।

दिल्ली में लोकसभा की 7 सीटें हैं। इन सीटों पर छठवें चरण में 12 मई को चुनाव होना है। यहाँ भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी भी चुनावी दंगल में हैं। इसलिये यहाँ त्रिकोणीय चुनावी जंग होगी। पिछली बार 2014 में भी त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा ने सभी सातों सीटों पर बाजी मार ली थी। इस बार पार्टी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी को टिकट थमाया है, जो इसी सीट से वर्तमान सांसद भी हैं और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। मनोज तिवारी ने समाजवादी पार्टी से सियासत में कदम रखा था और गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध चुनाव लड़े थे, परंतु उन्हें पराजय झेलनी पड़ी थी। इसके बाद 2013 में वह भाजपा में शामिल हुए और 2014 में पार्टी ने उन्हें दिल्ली से टिकट दिया, जिसमें जीतकर उन्होंने अपनी सियासी पहचान बनाई। बाद में 2016 में पार्टी ने उन्हें दिल्ली भाजपा की कमान थमाकर सियासत में उनका कद और बढ़ा दिया। इस बार उनके विरुद्ध कांग्रेस से दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दिलीप पांडे हैं।

इसी महीने भाजपा में शामिल हुए क्रिकेटर से राजनेता बने गौतम गंभीर को पार्टी ने पूर्वी दिल्ली से चुनावी पिच पर उतारा है। यहाँ उनका मुकाबला कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आतिशी से होगा।

दिल्ली के चुनावी अखाड़े में कांग्रेस ने दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से बॉक्सर विजेन्दर सिंह को उतारा है। दिल्ली में सिक्खों का वोट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिये एक तरफ कांग्रेस ने जहाँ पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर सिक्ख समुदाय के प्रतिनिधि अरविंदर सिंह लवली को चुनाव मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट पर पंजाबी लोक संगीत और सूफी संगीत के मशहूर गायक पद्मश्री हंसराज हंस को टिकट दिया है। हंस की राजनीतिक यात्रा की बात करें तो उन्होंने 2009 में पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल की सदस्यता ग्रहण की थी और जालंधर से चुनाव लड़ा था, परंतु सफल नहीं हुए। इसके बाद 18 दिसंबर-2014 को इस पार्टी से त्यागपत्र देकर फरवरी-2016 में कांग्रेस का हाथ थाम लिया, परंतु साल पूरा होते-होते दिसंबर-2016 में ही कांग्रेस से भी किनारा कर लिया और भाजपा में शामिल हो गये। अब भाजपा ने उन्हें दिल्ली में उत्तर-पश्चिम की एससी सीट से अपने दलित नेता उदित राज का टिकट काटकर हंस को टिकट थमाया है। यहाँ हंस के विरुद्ध कांग्रेस की ओर से राजेश लिलोठिया और आम आदमी पार्टी के गुग्गन सिंह चुनावी ताल ठोक रहे हैं।

सत्ता का केन्द्र होने से दिल्ली के चुनाव पर पूरे देश की नज़र रहेगी, इसलिये बता दें कि दिल्ली की राजनीति में सैलेब्स का सफर 1991 से शुरू हुआ था, जब कांग्रेस ने सुपर स्टार राजेश खन्ना को भाजपा के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी को चुनौती देने के लिये चुनावी मैदान में उतारा था। राजनीति की कोई खास समझ न होने के बावजूद केवल अपनी लोकप्रियता के दम पर राजेश खन्ना ने आडवाणी को दिल्ली छोड़कर गुजरात में सियासी जमीन तलाशने के लिये मजबूर कर दिया था। इसके बाद भाजपा ने उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिये फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा को मैदान में उतारा था, परंतु वह भी खन्ना के सामने टिक नहीं पाये थे और भाजपा ने उन्हें राज्यसभा में भेजकर अटल सरकार में मंत्री बनाया था। बाद में वह पटना की पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुँचे थे। अब शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के पाले में खड़े हैं।

बीते जमाने के फिल्म अभिनेता विश्वजीत चटर्जी भी तृणमूल कांग्रेस से नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, परंतु उन्हें बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने भी भाजपा जॉइन कर ली है।

केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी दिल्ली से ही राजनीति की शुरुआत की थी। वह चाँदनी चौक लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल के विरुद्ध चुनाव लड़ी थी, हालाँकि हार गई थी। इसके बाद उन्होंने 2014 में कांग्रेस के गढ़ अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को कड़ी चुनौती दी और इस बार फिर अमेठी से चुनाव लड़ रही हैं।

बात क्रिकेटरों की करें तो 1983 का विश्वकप भारत को जिताने वाली टीम के हिस्सा रहे दो बड़े क्रिकेटर चेतन चौहान और कीर्ति आज़ाद भी दिल्ली की चुनावी पिच पर बैटिंग कर चुके हैं। 2009 में भाजपा ने चेतन चौहान को पूर्वी दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारा था। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के अमरोहा से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके थे, परंतु दिल्ली में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। कीर्ति आज़ाद ने 1993 में दिल्ली की गोल मार्केट विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर भाजपा को जीत दिलाई थी। हालाँकि 1998 के चुनाव में वह हार गये और बाद में बिहार के दरभंगा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में पहुँचे थे। पार्टी के विरुद्ध बयानबाजी के कारण पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया तो अब वह टिकट की आश में कांग्रेस के साथ चले गये हैं।

दिल्ली की अन्य सीटों की बात करें तो चाँदनी चौक सीट पर भाजपा के डॉ. हर्षवर्धन, कांग्रेस के जे. पी. अग्रवाल और आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता उम्मीदवार हैं। पश्चिम दिल्ली में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश वर्मा भाजपा के, महाबल मिश्रा कांग्रेस के और बलवीर सिंह जाखड़ आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं। दक्षिण दिल्ली में भाजपा के रमेश बिधूड़ी, कांग्रेस के बॉक्सर विजेन्दर सिंह और आम आदमी पार्टी के राघव चड्डा उम्मीदवार हैं। नई दिल्ली सीट से भाजपा की मीनाक्षी लेखी, कांग्रेस के अजय माकन और आम आदमी पार्टी के ब्रजेश गोयल चुनाव लड़ रहे हैं।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares