गांधी से थे वैचारिक मतभेद लेकिन दी “राष्ट्रपिता” की संज्ञा

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Subhash Chandra Bose Birth Day

“तुम मुझे खून दो और में तुम्हें आजादी दूंगा”.. यह नारा तो सभी को मालूम है। इस नारे को देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आज जन्मदिन है। आजाद हिंद फौज के संस्थापक का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था। 20 जुलाई 1921 को पहली बार उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई जिसके बाद वो स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। स्वतंत्रता संग्राम के अलावा वे सामाजिक उत्थान का भी काम करते रहे। बंगाल में आई भयंकर बाढ़ में घिरे लोगों को उन्होंने भोजन, वस्त्र और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का साहसपूर्ण काम किया था। समाज सेवा के काम को जारी रखने के लिए Subhash Chandra Bose ने ‘युवक-दल’ की स्थापना की।

चरणबद्ध तरीके से आजादी के खिलाफ

भले ही Subhash Chandra Bose ने महात्मा गांधी के कहने पर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े लेकिन उनके विचार महात्मा गांधी से कभी नहीं मिले। इंडियन नेशनल कांग्रेस से जुड़ने के कुछ सालों बाद उन्होंने अपना एक अलग दल बनाया। महात्मा गांधी और कांग्रेस चाहती थी कि देश चरणबद्ध तरीके से आजाद हो लेकिन वे इसके खिलाफ थे। उनका मानना था कि ऐसा कभी नहीं हो पाएगा। वे पूरे देश की आजादी चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के साथ सीधा मुकाबला करने का फैसला किया। नेताजी ने इसके लिए आजाद हिंद फौज का गठन किया। ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के मकसद से उन्होंने आजाद हिंद रेडियो स्टेशन की स्थापना की।

महात्मा गांधी को दी राष्ट्रपिता की संज्ञा

आज पूरा देश महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहता है लेकिन क्या आपको मालूम है कि Subhash Chandra Bose ही पहले शख्स थे जिन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता बुलाया था। भले ही दोनों के बीच वैचारिक मतभेद थे लेकिन एक दूसरे के प्रति अत्यधिक सम्मान था। सुभाष चंद्र बोस ने रंगून के रेडियो चैनल से महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए पहली बार राष्ट्रपिता कहा था। उसके बाद सभी ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता बुलाना शुरू कर दिया।

एमिली से की शादी

1934 में जब ब्रिटिश सरकार ने नेताजी को भारत से निर्वासित किया तो वह यूरोप चले गए। यूरोप जाकर स्वतंत्रता सेनानियों के साथ वे चिट्ठी के जरिए लगातार संपर्क में रहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एमिली से हुई जो उनके लिए असिसटेंट का काम करती थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार हो गया। कुछ सालों बाद वे फिर से भारत लौटे लेकिन एमिली को लगातार चिट्ठी लिखते रहे। ”तुम पहली महिला हो, जिससे मैंने प्यार किया। भगवान से यही चाहूंगा कि तुम मेरे जीवन की आखिरी स्त्री भी रहो.” ये लाइन नेताजी ने एमिली के लिए लिखे थे। हालांकि दोनों की शादी कब हुई उसकी तारीख को लेकर अभी भी इतिहासकारों के बीच मतभेद हैं।

मौत पर रहस्य बरकरार

Subhash Chandra Bose की मौत को लेकर रहस्य आज भी बरकरार है। वैसे माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को नेताजी जब  मंचूरिया जा रहे थे उस दौरान विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। यह विमान हादसा ताइहोकू हवाई अड्डे पर हुआ था। हालांकि RTI के जवाब में सरकार की तरफ से कहा गया कि उनकी मौत विमान हादसे में हुआ था। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में कोई विमान हादसा नहीं हुआ था।

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