स्वामी ने अंत तक निभाई ‘शत्रुता’ : जेटली को देखने न अस्पताल गए और न ही दी श्रद्धांजलि

Written by

* कब और क्यों पड़े थे स्वामी-जेटली के बीच शत्रुता के बीज ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 24 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। एक पार्टी और एक ही क्षेत्र में विशेषज्ञ होने के बावजूद सुब्रमण्यन स्वामी और अरुण जेटली के बीच पैदा हुई शत्रुता जेटली की अंतिम साँस तक बनी रही। स्वामी ने जेटली के साथ अपनी शत्रुता जेटली की अंतिम साँस तक निभाई। 9 अगस्त से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMS) में जीवन और मृत्यु के बीच जंग लड़ रहे जेटली ने 24 अगस्त को अंतिम साँस ली, परंतु इन 19 दिनों के दौरान स्वामी न तो जेटली को देखने के लिए एम्स पहुँचे और न ही उनके निधन के बाद ट्विटर पर कोई श्रद्धांजलि ही दी।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) के दिग्गज नेता, राज्यसभा सांसद और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली अब इस दुनिया में नहीं हैं। 9 अगस्त से एम्स में दाखिल जेटली ने 19 दिनों के बाद अंतत: आज अपनी इह लीला समेट ली। इस दौरान जेटली का स्वास्थ्य कई बार बिगड़ा और उनकी हालत लगातार नाज़ुक होती चली गई। जीवन के अंतिम क्षणों में जेटली को देखने और उनके परिवार को ढाढस बंधाने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के कई दिग्गज नेता और यहाँ तक कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, बसपा नेता मायावती तक एम्स पहुँचे, परंतु भाजपा के ही एक और दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी टस से मस नहीं हुए।

जेटली का निधन, स्वामी मौन

आम तौर पर ट्विटर पर निरंतर सक्रिय रहने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने आज भी कई ट्वीट किए, जो अधिकांश पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम, कांग्रेस के घोटालों, सीबीआई आदि से जुड़े हुए थे। स्वामी ने अंतिम ट्वीट आज 24 अगस्त, 2019 को सुबह 7.40 बजे किया, जो एनडीटीवी की सीईओ सुपर्णा सिंह से संबंधित था। स्वामी के इस अंतिम ट्वीट के ठीक 4 घण्टे और 27 मिनट बाद यानी दोपहर 12.07 बजे अरुण जेटली का निधन हो गया। यह ख़बर लिखे जाने तक जेटली के निधन को चार घण्टे बीत चुके हैं, परंतु स्वामी की ओर से दिवंगत जेटली को श्रद्धांजलि देने वाला कोई ट्वीट नहीं किया गया।

जेटली अस्पताल में, स्वामी के हमले जारी

एक तरफ अरुण जेटली एम्स में जीवन और मृत्यु के बीच युद्ध लड़ रहे थे, ऐसे समय में भी स्वामी ने जेटली के विरुद्ध मोर्चा खोले रखा था। अभी हाल ही में पाँच दिन पहले 19 अगस्त को ही स्वामी फिर एक बार जेटली पर हमला बोला। स्वामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान भारत की अर्थ व्यवस्था की सुस्ती के लिए पूर्व वित्त मंत्री जेटली को ज़िम्मेदार ठहराया। स्वामी ने कहा था, ‘मेरा मानना है कि जेटली के कार्यकाल के दौरान अपनाई गई ग़लत नीतियाँ – जैसे अधिक कर लगाना – अर्थ व्यवस्था में सुस्ती का एक कारण है। ये नीतियाँ अभी भी लागू हैं।’

क्या अंटस थी स्वामी-जेटली के बीच ?

दरअसल अरुण जेटली और सुब्रमण्यन स्वामी के बीच शत्रुता के बीज वर्ष 2013 में पड़े, जब भाजपा ने पूर्व जनसंघ नेता और उसके बाद जनता पार्टी बनाने वाले स्वामी को भाजपा में शामिल करने का मन बनाया। जेटली ने स्वामी को भाजपा में शामिल करने का खुल कर विरोध किया। भाजपा स्वामी को इसलिए पार्टी में लेना चाहती थी, क्योंकि स्वामी के पक्ष में आरएसएस और उसका पूरा वोट बैंक था। इतना ही नहीं, वे राम मंदिर के लिए वक़ालत कर रहे थे और गांधी परिवार के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे थे। जेटली के विरोध के बावजूद स्वामी को भाजपा में एंट्री मिल गई। भाजपा ने स्वामी को लोकसभा चुनाव 2014 में स्वामी को दिल्ली की किसी सीट से यह कह कर टिकट नहीं देने की वक़ालत की कि वे पंजाबी नहीं हैं। स्वामी को तभी से जेटली से चिढ़ हो गई। इसके बाद भाजपा ने स्वामी को राज्यसभा भेजने का निर्णय किया, तब भी जेटली ने विरोध किया। इसके बावजूद स्वामी को राज्यसभा का टिकट मिल गया। जेटली के निरंतर विरोध से स्वामी के मन में जेटली के प्रति शत्रुता के बीज पड़ गए।

मोदी ने जेटली को दिया महत्व

केन्द्र में जब 2014 में नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने स्वामी की बजाए जेटली को महत्व दिया और वित्त मंत्रालय सौंपा। स्वामी जेटली की नीतियों की लगातार आलोचना करते रहे। स्वामी ने हर सार्वजनिक मंच से मोदी सरकार 1 में नंबर 2 का स्थान रखने वाले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की आर्थिक नीतियों का पुरजोर विरोध किया, जिसका कई बार विरोधी दलों ने भी फायदा उठाया। मोदी ने जेटली पर भरोसा कायम रखा और स्वामी को अधिक तरजीह नहीं दी। मोदी जब दोबारा प्रधानमंत्री बने, तो उससे पहले ही जेटली ने स्पष्ट कर दिया था कि वे खराब सेहत के चलते नई सरकार में मंत्री नहीं बनेंगे। इसी कारण जेटली मोदी सरकार पार्ट 2 में मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares