सूर्यग्रहण के समय भाई महावीर शर्मा के साथ करिए सुंदरकांड का लाइव पाठ

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हम सब यह जानते हैं कि कल सूर्यग्रहण है तो मंत्र जप और ध्यान के लिए ग्रहण को बहुत ही शुभ समय माना जाता है। इसलिए भाई महावीर शर्मा जो एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं वह अपने निवास स्थान से ही लाइव सुंदरकांड का पाठ करेंगे। सुन्दरकाण्ड का पाठ सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक होगा।

आप सभी नीचे दिए गए लिंक से भाई महावीर शर्मा जी के साथ मिलकर सूर्यग्रहण के समय सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं।

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भाई महावीर शर्मा जी के भजन आप संस्कार TV Channel  पर अक्सर देखते हैं, Youtube चैनल Bhavpravah www.youtube.com/bhavpravah भी भाई जी के भजनों का प्रसारण करता है। भाव प्रवाह Youtube Channel भजन सम्राट आदरणीय श्री विनोद अग्रवाल जी से प्रेरणा लेकर भजन करने वाले युवा भक्तो दुआरा चलाया जा रहा है, इस चैनल को Subscribe करके आप भजनों का आनंद उठा सकते हैं।

भाई महावीर शर्मा अपनी अनूठी भजन शैली के लिए जाने जाते हैं, जिसमे ब्रज रस के प्रेम भाव, गोपी प्रेम और कृष्ण विरह की अनुपम छवि झलकती है। दिल्ली में रहने वाले भाई महावीर शर्मा भजन संकीर्तन केवल भगवान श्री कृष्ण प्रेमवश करते है और विश्व भर में हरिनाम संकीर्तन के प्रचार के लिये भ्रमण करते रहते है।

कोरोना महामारी के चलते lockdown में संकीर्तन सभा अभी सम्भव नही हो पा रही है तो ऐसे में भी भाई महावीर शर्मा हरिनाम का प्रचार Online Facebook और Youtube के माध्यम से लगातार कर रहे हैं।

Bhai Mahavir Sharma जी युवा पीढ़ी को अपने पढ़ाई, बिज़नेस और नौकरी के साथ साथ कुछ समय भगवान के नाम और भजन में लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि भगवान के प्रति आपका अटूट प्रेम ही एक ऐसी कड़ी है जो आपको एक न एक दिन भगवान के दर्शन करने में सहायक होगी।

सुन्दरकाण्ड पाठ का महत्व

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण पर आधारित महाकाव्य रामचरित मानस का पंचम सोपान है सुंदरकाण्ड। सुंदरकाण्ड में रामदूत, पवनपुत्र हनुमान का यशोगान किया गया है। इसलिए सुंदरकाण्ड के नायक श्री हनुमान हैं।

दरअसल, हनुमानजी, सीता माता की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटांचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटांचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे। तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका निर्मित थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीता माता की भेंट हुई थी। सुंदर पर्वत पर ही सबसे प्रमुख घटना घटित होने के कारण इसका नाम सुंदरकाण्ड रखा गया। सुन्दर पर्वत पर ही अशोक वाटिका थी इसी अशोक वाटिका में ही हनुमानजी और सीता माता का मिलन हुआ था, इसीलिए इस काण्ड का नाम सुन्दरकाण्ड रखा गया।

वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड की कथा सबसे अलग है। सुंदरकाण्ड ऐसा अध्याय है, जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का काण्ड है। सुंदरकाण्ड का पाठ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। किसी भी प्रकार की परेशानी या संकट हो, सुंदरकाण्ड के पाठ से यह संकट तुरंत ही दूर हो जाता है।

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