भारत ने फिर दिखाया अपना दम, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का किया सफल परीक्षण

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Supersonic cruise missile Brahmos

नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार को राजस्थान के पोखरण रेंज में दुनिया के सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (Supersonic cruise missile Brahmos) का एक सफल परीक्षण किया। सूत्रों के मुताबिक यह मिसाइल उंचाई पर तेजी से उड़ान भरने और रेडार की आंख से बच निकलने की क्षमता रखती है। बता दें कि 12 जून 2001 को ब्रह्मोस मिसाइल का पहला परीक्षण किया गया था।

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का नाम भारत के ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। यह मिसाइल आवाज के लगभग तीन गुना अदिक अथार्त 2.8 माक की गति से हमला करने का दम रखती है। इका रेंज 290 किलोमाटर के करीब है जो दुश्मनों को युद्ध के मैदान में छके छुड़ा सकती है। यह लगभग 300 किलोग्राम तक भारी युद्ध की सामग्री को ले जाने में सक्षम है।

भारत Supersonic cruise missile Brahmos इस्तेमाल दुश्मन देशों के सीमा में घुसपैठ करने वाले आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। बता दें कि यह हवा से जमीन पर मार करने में पूरी तरह से सक्षम है जिसके चलते अब दुश्मन देश को पसीना आ रहा है। इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के द्वारा समुंद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स, अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों और कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स पर हमला असानी से किया जा सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइल (Supersonic cruise missile Brahmos) को बनाने के लिए भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम और रूस के प्रथम डेप्युटी डिफेंस मिनिस्टर एन.वी. मिखाइलॉव ने एक इंटर-गवर्मेन्टल अग्रीमेंट पर अपने हस्ताक्षर किये थें। यह अग्रीमेंट 12 फरवरी 1998 को हुआ था। यह मिसाइल भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओएम द्वारा मिलकर बनाया गया है।

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल सिस्टम पर आधारित मिसाइल है। इसके बनने से भारत मिसाइल तकनीकी में अग्रणी देश बन चुका है। यह मिसाइल सबसे पहले 2005 में भारतीय नौ सेना में शामिल की गई थी। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार निशाना लगाने के बाद यह अपना मार्ग भी बदल सकता है इससे यह फायदा होगा कि जिस पर मिसाइल दागी जा रही है उसने यदि अपना मार्ग बदला तो यह भी उसी ओर अपना मार्ग बदल लेगी ओर उस ध्वस्त कर देगी।

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