निकाह हलाला और बहुविवाह असंवैधानिक है या नहीं, इस बात की समीक्षा अब सुप्रीम कोर्ट करेगी

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Nikah Halala

नई दिल्लीः मुस्लिम समाज में प्रचलित Nikah Halala और बहुविवाह असंवैधानिक है या नहीं, इस बात की समीक्षा अब सुप्रीम कोर्ट करेगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने मामले को संवैधानिक बेंच को रेफर करने का फैसला किया है। तथा सुप्रीम कोर्ट ने Nikah Halala और बहुविवाह को असंवैधानिक घोषित करने की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने की आदेश दिये हैं।

गोरतलब यह है कि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने इस दलील को इकरार करते हुए कहा कि पांच सदस्यीय वाली संविधान पीठ ने 2017 के अपने फैसले में तीन- तलाक को खत्म करते हुए बहुविवाह और निकाह हलाला के मामलों को इसके दायरे से बाहर रखा था। हांलांकि पीठ कहना कि आज कि पांच सदस्यों वाली नई संविधान पीठ का गठन किया जाएगा जो बहुविवाह और निकाह हलाला के मामले पर विचार विमर्श करेगी।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) ऐप्लिकेशन ऐक्ट 1937 की धारा-2 को असंवैधानिक घोषित किया जाए क्योंकि इसके तहत बहुविवाह और Nikah Halala को मान्यता दी जाती है। मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद Nikah Halala और बहुविवाह असंवैधानिक है या नहीं, इस बात की समीक्षा अब सुप्रीम कोर्ट करेगा। जबकि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल 22 अगस्त को एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर चुका है।

4 की अर्जी पर सुनवाई बिजेपी नेता भी शामिल

हालांकि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से अर्जी दाखिल की गई है। इसके इलावा सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली की दो मुस्लिम महिलाओं की ओर से भी अर्जी दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से अर्जी दाखिल कर भारत सरकार के लॉ मिनिस्ट्री और लॉ कमिशन को प्रतिवादी बनाया गया है।

इस बीच याचिकाकर्ता ने बताया कि Nikah Halala और बहु विवाह संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), 15 (कानून के सामने लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं) और अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता कहना है कि पर्नसल लॉ पर कॉमन लॉ की वरीयता है और कॉमन लॉ पर संवैधानिक कानून की वरीयता है। उन्होने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीन तलाक धार्मिक गतिविधियों का भाग नहीं है।

दिल्ली से समीना बेगम की याचिका

भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित जसोला विहार की रहने वाली समीना बेगम ने अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि Nikah Halala और बहु विवाह को चुनौती दी गई है। समीना बेगम का कहना है कि मुस्लिम पर्नसल लॉ ऐप्लिकेशन ऐक्ट 1937 की धारा-2 निकाह हलाला और बहुविवाह को मान्यता देता है। और यह संविधान के अनुच्छेद-14,15 और 21 का उल्लंघन करता है। लिहाजा इसे असंवैधानिक और गैरकानूनी घोषित किया जाए। याचिका में कहा गया कि वह खुद विक्टिम हैं। समीना के पति ने शादी के बाद उन्हें अपमानित किया और दो बच्चे होने के बाद लेटर के जरिए तलाक दे दिया। उन्होंने फिर दूसरी शादी की लेकिन दूसरे पति ने भी तलाक दे दिया।। जसोला विहार की रहने वाली समीना बेगम का कहना है कि Nikah Halala और बहुविवाह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक असंवैधानिक हो चुका है लेकिन फिर भी जारी है। तीन तलाक देने वालों के खिलाफ दहेज अपमानित का केस होना चाहिए। निकाह हलाला करने वालों के खिलाफ रेप का केस दर्ज होना चाहिए जबकि बहुविवाह करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा-494 के तहत केस दर्ज हो। याचिकाकर्ता ने शरियत एक्ट की धारा-2 को असंवैधानिक घोषित करने की गुहार लगाई। साथ ही Nikah Halala, बहुविवाह और तीन तलाक देनेवालों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत केस दर्ज करने का प्रावधान करने की गुहार लगाई है।

नफीसा खान ने भी कि अपनी याचिका

भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित महरौली की रहनेवाली नफीसा खान की ओर से कहा गया है कि उनका निकाह 5 जून 2008 को हुआ था। वह शादी के बाद अपने ससुराल में रहीं, उनके दो बच्चे हुए। इसके बाद दहेज की मांग हुई और उन्हें अपमानित किया जाने लगा। उनके चरित्र पर धब्बा लगाया गया और फिर पति ने तलाक के बिना ही दूसरी शादी कर ली। ये शादी 26 जनवरी 2018 को की गई। जब उन्होंने पुलिस को शिकायत की और पति के खिलाफ पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करने का आरोप लगाया और आईपीसी की धारा-494 के तहत केस दर्ज करने की आग्रह की तो पुलिस ने मना कर दिया और कहा कि शरियत इसकी इजाजत देता है।

तीन तलाक पर हो चुका है फैसला

पिछले साल 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में एक बार में तीन तला को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीन तलाक प्रैक्टिस अवैध, असंवैधानिक और अमान्य है।

मुस्लिम में क्या है निकाह हलाला?

हलाला के मामले को लेकर एडवोकेट एमएस खान इस के बारे में जानकारी दी कि पति ने अगर पत्नी को तलाक दे दिया और उसे इस बात का अहसास हो गया कि उससे गलती हो गई है और वह फिर से अपनी पत्नी के साथ संबंध बहाल रखना चाहता है तो महिला को Nikah Halala से गुजरना होगा। इसके तहत तलाकशुदा को दूसरे आदमी से निकाह करना होगा और संबंध बनाने होंगे फिर उसे तलाक देकर पूर्व पति से निकाह किया जा सकता है। इसके पीछे तर्क ये है कि प्रक्रिया ऐसी बनाई जाए कि कोई यूं ही तलाक न दे यानी तलाक को मजाक न बनाया जाए।

क्या है बहुविवाह?

एडवोकेट खान बहुविवाह के मामले को लेकर कहा कि इस्लामिक प्रथा में बहुविवाह का चलन है। इसके तहत एक आदमी को चार शादियां करने की इजाजत है। इसके पीछे धारणा है कि अगर कोई विधवा है या बेसहारा औरत है तो उसे सहारा दिया जाए। समाज में ऐसी औरतों को बुरी नजर से बचाने के लिए उसके साथ शादी की इजाजत दी गई थी। हालांकि समय के साथ इस कानून के दुरुपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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