देश के 2.75 करोड़ लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट से आई यह 100 गुना बड़ी खुशखबर : कहीं आप भी तो शामिल नहीं ? जानने के लिए तुरंत CLICK करें

Written by

निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की अब बल्ले-बल्ले होनेवाली है, क्योंकि अब उनकी पेंशन की टेंशन दूर हो जाएगी। उन्हें सीमित पेंशन की जगह कई सौ गुना बढ़कर पेंशन मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने अपने केरल उच्च न्यायालय (HC) के फैसले को बरकरार रखा है, जिसके चलते अब निजी क्षेत्र में काम करने वाले देश के करीब 2.75 करोड़ कर्मचारियों की पेंशन राशि 100 गुना तक बढ़ जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 30 करोड़ निजी कर्मचारी हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से फायदा होगा।

उल्लेखनीय है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की शुरुआत 1995 में हुई थी। तब निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का अधिकतम वेतन वार्षिक 6,500 रुपये और मासिक वेतन 541 रुपये में से 8.33 प्रतिशत राशि ही कर्मचारी भविष्य योजना (EPS) में जमा करा सकता था। मार्च 1996 में इस नियम में बदलाव किया गया कि यदि कर्मचारी अपने पूरे वेतन के हिसाब से ईपीएस में योगदान देना चाहे और कर्मचारी का नियोक्ता भी सहमत हो तो उसे पेंशन भी उसी हिसाब से मिलेगी। सितम्बर 2014 में ईपीएफओ की ओर से पुराने नियमों में फिर कुछ संशोधन किये गये और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन की गणना वार्षिक 6,500 के स्थान पर अधिकतम 15,000 रुपये के 8.33 प्रतिशत के हिसाब से करने को मंजूरी दी गई।

हालाँकि साथ में ईपीएफओने यह पेंच भी फंसा दिया गया कि अगर कोई कर्मचारी पूरे वेतन पर पेंशन लेना चाहता है तो उसकी पेंशन पिछले पांच साल के वेतन के हिसाब से तय की जाएगी। इससे पहले यह पिछले एक साल के वेतन पर तय की जा रही थी। इससे कई कर्मचारियों का वेतन कम हो गया और ईपीएफओ के विरुद्ध कई राज्यों में मामले अदालत तक पहुंचने लगे।

ऐसे ही एक मामले पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने ईपीएफओ की ओर से 2014 में किए गए बदलाव को रद्द कर दिया और पुराना नियम जारी रखने का आदेश दिया। इससे पेंशन फिर पिछले एक साल के औसत वेतन पर तय होने लगी। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ से कहा कि इस स्कीम का लाभ ऐसे लोगों को भी देना चाहिये जो पहले से पूरे वेतन के आधार पर पेंशन स्कीम मे योगदान दे रहे हैं। इस फैसले से अनेक कर्मचारियों को फायदा हुआ। निजी क्षेत्र में काम करनेवाले एक कर्मचारी की पेंशन जो मात्र 2,372 रुपये थी, इस फैसले के बाद बढ़कर 30,592 रुपये हो गई। इसके बाद उस कर्मचारी ने अन्य कर्मचारियों को भी इस स्कीम का लाभ दिलाने का बीड़ा उठाया।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares