‘मोदी विरोध’ का उन्माद राहुल को कहीं बीच चुनाव से जेल न पहुँचा दे ! SC का यह कहना कि ‘हमने नहीं कहा चौकीदार चोर है’ भारी पड़ सकता है राहुल को, 7 दिन में देना होगा जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए ताजे फैसले का अपने राजनीतिक फायदे के लिए अपने तरीके से अर्थ निकाल कर फँस गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आज साफ कर दिया कि उसने अपने फैसले में यह कहीं नहीं कहा कि चौकीदार ने चोरी कराई है।

राफेल डील में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबाणी को 30 हजार करोड़ रुपए का फायदा पहुँचाने का लगातार आरोप लगा रहे राहुल गांधी को SC के गुरुवार के फैसले में न जाने ऐसा क्या दिखा कि उन्होंने इस फैसले को केवल राजनीतिक चश्मे से पढ़ते हुए सीधे-सीधे शब्दों में कह डाला, ‘सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि चौकीदार चोर है, चौकीदार ने चोरी कराई है।’ सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील के लीक दस्तावेजों को वैध मान कर उन पर पुनर्विचार करने और सुनवाई करने की हामी मात्र भरी थी, परंतु पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले 10 अप्रैल को आए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का राहुल गांधी ने राजनीतिक फायदा उठाने के लिए ग़लत अर्थ निकाला और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा प्रहार करते हुए ऐसा वक्तव्य दिया, जैसे मानो सुप्री कोर्ट ने खुद यह कहा हो कि राफेल डील में चौकीदार ने चोरी कराई है।

भाजपा सांसद व नेता मिनाक्षी लेखी ने राहुल के इस वक्तव्य को कोर्ट की अवमानना बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के वक्तव्य को अदालत की अवमानना माना और इसके साथ ही राहुल को अपनी अपरिपक्व राजनीति फिर एक बार महंगी पड़ सकती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को कारण बताओ नोटिस जारी कर राहुल गांधी से उनके वक्तव्य पर जवाब मांगा है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 23 अप्रैल को होगी।

सुप्रीम कोर्ट का राहुल को दूसरा जोरदार झटका

सुप्रीम कोर्ट ने उसके फैसले का ग़लत अर्थ निकालने के विरुद्ध मिनाक्षी लेखी की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करके राहुल गांधी को पहला झटका दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट ने राहुल के वक्तव्य पर जिन कड़े शब्दों से प्रहार किया, उससे स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि उसके फैसले को ग़लत तरीके से प्रचारित किया गया। ऐसा करना अदालत की अवमानना है। मिनाक्षी लेखी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने माना, ‘हमने ये बयान कभी नहीं दिया है, हम इस मसले पर सफाई मांगेंगे।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं कि जो भी विचार कोर्ट को लेकर मीडिया में कहे गए, वे पूरी तरह ग़लत हैं। इस मामले की पूरी जानकारी को लेकर हम सफाई चाहेंगे। हमें आशा है कि राहुल गांधी इस वक्तव्य पर अपनी सफाई देंगे।’

तो जेल जाने को तैयार रहें राहुल

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से उसके फैसले पर ‘चौकीदार चोर है, चौकीदार ने चोरी कराई है’ टिप्पणी करने को लेकर जवाब मांगा है। यदि सुप्रीम कोर्ट जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ, तो यह तय है कि राहुल को चुनावी मौसम में बड़ा झटका लगेगा। उल्लेखनीय है कि किसी भी अदालत की अवमानना एक गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें भी मामला जब सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा हुआ हो, तब किसी भी व्यक्ति, खास कर राजनेता को सावधानी से किसी निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए, परंतु राहुल गांधी ने अति उत्साह में आकर राफेल पर एससी के फैसले पर ऐसे बयान दिए, मानो राफेल डील में भ्रष्टाचार होने, अनिल अंबाणी को फायदा पहुँचाने, पीएम मोदी के लिप्त होने पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद मुहर लगा दी हो। अदालत की अवमानना धारा 15 का उल्लंघन मानी जाती है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने अपराधी को छह माह का कारावास, 2 हजार रुपए तक का दंड या दोनों सजा देने का प्रावधान है। यद्यपि अदालत अपराधी को क्षमा भी कर सकती है, यदि अपराधी क्षमा मांगे तो। राहुल यदि दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें कारावास-दंड की सजा सुनाई जा सकती है। राहुल के पास क्षमा याचना का विकल्प रहेगा, परंतु इस पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर निर्भर रहेगा। ऐसे में चुनावी मौसम में राहुल गांधी के लिए 23 अप्रैल का दिन महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि 23 अप्रैल को ही लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण 14 राज्यों की 115 सीटों के लिए मतदान होने वाला है। यदि मतदान वाले दिन सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला राहुल के खिलाफ जाता है, तो जिस तरह राहुल ने 10 अप्रैल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बिना समझे अपने उन्मादी बयान से 11 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान पर असर डालने की कोशिश की, उसी तरह भाजपा भी 23 अप्रैल को होने वाले तीसरे चरण के मतदान पर असर डालने की कोशिश करेगी। इतना ही नहीं, भाजपा तो 18 अप्रैल को दूसरे चरण में होने वाले 13 राज्यों की 97 सीटों के मतदान में भी सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले का राजनीतिक फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

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