मिलिए उन लोगों से, जिनके लिये ‘माँ’ से बढ़ कर थीं सुषमा

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अहमदाबाद, 7 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आकस्मिक निधन से हर कोई शोक में डूबा हुआ है। हर कोई उन्हें नम आँखों से याद कर रहा है। सुषमा स्वराज आम जनता के साथ सीधा जुड़ाव रखती थी। एक विदेश मंत्री के तौर पर उन्होंने जो काम किये, उससे विदेश मंत्रालय का भी लोगों से सीधा जुड़ाव हो गया था। सुषमा की एक विशेषता थी कि वह लोगों से अपनेपन के साथ मिलती थी, यही वजह है कि लोग उनसे मिलने के बाद उन्हें ममता की मूर्ति के रूप में देखते थे। विदेशों में मुश्किल में फँसे लोगों की उन्होंने संकटमोचक बनकर मदद की थी। वह माँ की तरह लोगों की चिंता करती थी और उन्हें वहाँ से निकालकर स्वदेश में अपने परिवारों से मिलाती थी। ऐसे लोगों ने भी आज सुषमा को नम आँखों से याद किया और कहा कि वह उनके उपकारों को कभी भूल नहीं सकते।

हामिद अंसारी के लिये माँ जैसी थी सुषमा

मुंबई के वर्सोवा इलाके में रहने वाले हामिद नेहाल अंसारी को ऑनलाइन चैटिंग के दौरान एक पश्तून लड़की से मोहब्बत हो गई थी और वह उस लड़की की मोहब्बत में सरहदें भूलकर 2012 में बिना वीजा के पाकिस्तान पहुँच गये थे। वहाँ पकड़े जाने के बाद उन पर जासूसी का केस चलाया गया और जेल भेज दिया गया। जब यह मामला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास आया, तो उन्होंने पाकिस्तान के सामने इस मामले को उठाया और उनकी कोशिशों के बाद दोनों ही मुल्कों के कई लोगों ने कोर्ट के सामने आकर यह साबित किया कि हामिद पाकिस्तान में बिना वीजा के अवैध रूप से जरूर घुसा है, परंतु वह जासूस नहीं है। इसके बाद 6 साल पाकिस्तान की जेल में बिताकर पिछले साल दिसंबर-2018 में हामिद अंसारी स्वदेश लौटे। भारत लौटते ही हामिद ने सबसे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की, उन्हें देखकर वह इतने भावुक हो गये कि उनके गले लगकर रो पड़े थे। अब उन्हीं सुषमा के निधन का समाचार मिलने पर हामिद फिर भावुक हो गये और कहने लगे कि वह मेरे लिये माँ की तरह थी। उनके लिये मेरे दिल में गहरा सम्मान है। वह हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेंगी। हामिद के अनुसार पाकिस्तान से लौटने के बाद सुषमा ने उन्हें भविष्य के लिये मार्गदर्शन भी दिया था। हामिद के अनुसार उनका दुनिया से जाना उनके लिये व्यक्तिगत क्षति है।

मूक बधिर गीता की स्वदेश वापसी कराई थी

चार साल पहले सुषमा स्वराज ने एक बहुचर्चित घटनाक्रम में पाकिस्तान से मूक बधिर गीता नाम की लड़की की स्वदेश वापसी कराई थी। आज गीता ने सांकेतिक भाषा में कहा कि सुषमा स्वराज के जाने से उसने अपनी चिंता करने वाली माँ जैसी अभिभावक को खो दिया। गीता भी गलती से सीमा लाँघने के कारण 20 साल पहले गीता पाकिस्तान पहुँच गई थी। चार साल पहले सुषमा स्वराज ने कड़े प्रयास करके उसकी स्वदेश वापसी कराई थी। वह 26 अक्टूबर-2015 को भारत लौटी थी। अभी गीता मध्य प्रदेश की एक सरकारी संस्था ‘मूक-बधिर संगठन’ के आवासीय परिसर में रहती है। यहाँ के वॉड्रन संदीप पंडित के अनुसार सुषमा स्वराज के निधन की खबर से गीता शोक में है। क्योंकि उसकी हर छोटी-बड़ी समस्या के बारे में सुषमा स्वराज उससे सीधे बात करती थी। गीता की स्वदेश वापसी के बाद दिल्ली और इंदौर में सुषमा स्वराज ने गीता से कई बार मुलाकात की थी। वह हमेशा गीता की एक माँ की तरह ही चिंता करती थी। 10 से ज्यादा परिवारों ने गीता को अपनी लापता बेटी बताया था, परंतु सरकारी जाँच में कोई भी परिवार गीता पर अपना दावा साबित नहीं कर पाया। पिछले वर्ष 20 नवंबर को इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान सुषमा स्वराज ने गीता को हिंदुस्तान की बेटी बताते हुए कहा था कि भारत में गीता के परिवारवाले मिलें या न मिलें, वह अब दोबारा पाकिस्तान नहीं जाएगी और भारत सरकार उसकी देखभाल करेगी।

वाराणसी की कंचन की भी की थी मदद

सुषमा स्वराज ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी की कंचन भारद्वाज की भी मदद की थी। तीन साल पहले कंचन के नाइजीरिया में तैनात इंजीनियर पति संतोष भारद्वाज का समुद्री डाकुओं ने अपहरण कर लिया था। कंचन को उस समय अपने पति को बचाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था और उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। इसके बाद जब किसी के कहने पर कंचन ने सुषमा स्वराज को ट्वीट किया तो सुषमा स्वराज ने तुरंत रिप्लाई करते हुए कंचन को ढांढ़स बँधाया और लिखा कि, ‘बहन आप खाना नहीं छोड़ें, इससे समस्या हल नहीं होगी। मैं आपके पति को छुड़वाने में कोई कसर नहीं छोड़ूँगी।’ कंचन बताती हैं कि सुषमा स्वराज ने अपनी कही बात को निभाया और संतोष की स्वदेश वापसी कराई। कंचन इसके लिये सुषमा स्वराज का आभार प्रकट करती हैं और कहती हैं कि वह उनके किये उपकार को कभी नहीं भूल सकती।

सुषमा स्वराज ने बांग्लादेश से कराई थी सोनू की वापसी

दिल्ली के सीमापुरी इलाके से छह साल पहले एक महिला ने सोनू नाम के बालक का अपहरण किया था और उसे लेकर बांग्लादेश चली गई थी। वहाँ एक शेल्टर होम में रह रहे सोनू ने जब जमाल इब्नमूसा नाम के एक व्यक्ति को अपने ऊपर हुए जुल्मों की दास्तान सुनाई तो उसने सोनू की भारत वापसी की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से संपर्क किया, तो उन्होंने सोनू की घर वापसी करवाई।

विदेशों में फँसे लोगों के लिये संकटमोचक थीं

विदेशों में मुश्किल में फँसे भारतीयों की मदद के लिये विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज काफी मशहूर रहीं। वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहती थी और लोगों की शिकायतें मिलने पर तुरंत कार्यवाही करती थी। इसी कारण विदेश मंत्रालय का आम लोगों से सीधा जुड़ाव हो गया था, जो कि इससे पहले केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मामलों तक ही सीमित था। एक बार तो सुषमा स्वराज ने उनसे पूछे जाने पर यहाँ तक कहा था कि अगर कोई मंगल ग्रह पर भी फँस गया होगा तो वहाँ भी भारतीय दूतावास आपकी मदद के लिये पहुँच जाएगा। जिन भारतीयों को उन्होंने विदेशों में मुश्किलों से उबारा है, वह सारे लोग भी सुषमा स्वराज को संकटमोचक के रूप में याद करते हैं। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शायद ही किसी को निराश किया होगा, या शायद ही वह किसी की मदद करने में विफल रही होंगी।

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