संतोष का सागर कलमथल : केवल 1 रुपए में इडली बेचने वाली इस वृद्धा पर हो रही ‘लाखों की बरसात’, परंतु…

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 13 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। संतोष। यह एक ऐसा शब्द है, जिस पर भारतीय दर्शन में अत्यंत भार दिया गया है। कहते हैं कि ईश्वर ने मानव का निर्माण करते समय उसे अपनी संपूर्ण रचना माना और उसे मन, बुद्धि, बल, विवेक प्रदान किए, जिसके माध्यम से मानव हर उस वस्तु का प्राप्त कर सकता है, जो जीव सृष्टि में विद्यमान 84 लाख योनियों में से 83 लाख 99 हजार 999 योनियों के प्राणी नहीं कर सकते, परंतु भारतीय अध्यात्म और दर्शन शास्त्र ने‘सब कुछ’ प्राप्त करने की इच्छा और सामर्थ्य भी रखने वाले मनुष्य को उस ‘शांति’ का महत्व भी समझाया, जिसका मूल ‘संतोष’ है। विश्व का हर मनुष्य चाहे कितनी ही सफलताएँ प्राप्त कर ले, परंतु उसका अंतिम और परम् लक्ष्य शांति ही होता है और यह शांति संतोष के बिना नहीं आ सकती।

संतोष उस चिड़िया का नाम है, जो मनुष्य की अपार इच्छाओं पर नियंत्रण पाने का सबसे सशक्त माध्यम है। जिस व्यक्ति के जीवन में संतोष आ जाता है, वह कभी-भी इच्छाओं के वश होकर व्यर्थ कर्मों में नहीं उलझता और वही करता है, जो उसकी अंतरात्मा की पुकार होती है। संतुष्ट मनुष्य कभी-भी मन से उत्पन्न इच्छाओं के अधीन अंधाधुंध भागादौड़ी नहीं करता। आज हम एक ऐसी ही महिला से आपका साक्षात्कार कराने जा रहे हैं, जो स्वयं में संतोष का सागर हैं। इस महिला का नाम है एम. कमलथल और आयु से 82 वर्ष।

महंगाई बढ़ी, पर संतोष के सागर में स्थितप्रज्ञ रहीं कमलथल

तमिलनाडु के कोयम्बटूर जिले में रहने वाली कमलथल पिछले 30 वर्षों से इडली बेच कर अपना जीवन यापन कर रही हैं। 30 वर्ष पहले वे 1 रुपए में 1 इडली बेचती थीं और आज 30 वर्ष बाद भी उनकी 1 इडली का मूल्य 1 रुपए ही है। महंगाई ने इन 30 वर्षों में अनेक ऊँची छलांगें लगा डालीं, परंतु कमलथल के संतोष के सागर में कोई हलचल नहीं हुई। आज कलमथल इडली दादी के रूप में पूरे देश में वायरल हो चुकी हैं। केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक और उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक कमलथल की सहायता को तत्पर हैं, परंतु कमलथल इससे तनिक भी इत्तेफाक नहीं रखतीं, क्योंकि उन्हें अपने जीवन में कोई कमी नहीं लगती। 30 वर्षों तक लकड़ी का चूल्हा जला कर इडली बनाने वालीं कमलथल पर आज सहायता के रूप में ‘लाखों की बरसात’ हो रही है, परंतु कलमथल एक स्थितप्रज्ञ व्यक्ति की तरह अत्यंत संतुष्ट और शांत हैं। वे न तो इस सहायता से हर्षित हैं और न ही उन्हें यह सहायता लेने में कोई संकोच है।

महिंद्रा ने शेयर किया वीडियो और शुरू हो गई सहायता वर्षा

कमलथल का एक वीडियो महिंद्रा ग्रुप के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने शेयर किया। इतना ही नहीं, महिंद्रा ने कमलथल के इडली व्यवसाय में निवेश करने की इच्छा भी व्यक्त की। लकड़ी के चूल्हे पर इडली बनातीं इडली दादी ऐसी वायरल हुईं कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने तत्काल उन्हें एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिया।

वीडियो इतना तेजी से वायरल हुआ कि मुंबई के एक निजी कंपनी ने कमलथल को इडली का बैटर बनाने के लिए मशीन उपलब्ध करा दी।

कलक्टर बोले, ‘मांगो’, कमलथल बोलीं, ‘कुछ नहीं चाहिए’

कलमथल यानी इडली दादी का वीडियो वायरल होते ही कोयम्बटूर जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया। कलक्टर राजामणि ने कमलथल को अपने ऑफिस में बुलाया और उन्हें हर आवश्यक सहायता देने का वादा किया, परंतु कलमथल ने स्पष्ट कह दिया, ‘मुझे कुछ नहीं चाहिए।’

कमलथल के इनकार के बावजूद कमलथल के शुभचिंतकों ने कलक्टर से उनके लिए घर बनाने का आग्रह किया। कलक्टर राजामणि ने कहा, ‘उन्होंने (कलमथल) ने बताया है कि उनके पास एक पट्टा है। अगर वे या उनकी कोई संतान पट्टा लाते हैं, तो हम 2.5 लाख रुपए का घर बना कर दे सकते हैं।’

प्रतिदिन 600 इडली बेचती हैं कमलथल

इंटरनेट पर वायरल होने के बाद इडली दादी कमलथल पूरे देश में विख्यात हो गई हैं, परंतु कमलथल को इससे कोई हर्ष या शोक नहीं है। कलमथल कहती हैं, ‘मैं इस बात से बहुत खुश हूँ कि लोग मेरी सहायता कर रहे हैं। 30 वर्षों से मैं इस इडली की दुकान में लकड़ी का चूल्हा इस्तेमाल कर रही हूँ। अब उन्होंने (सरकार ने) मुझे गैस स्टव दे दिया है। मैं खुश हूँ।’ 1 रुपए में इडली कैसे बेचती हैं ? इस प्रश्न पर कमलथल कहती हैं, ‘इसमें कोई घाटा नहीं है। मैं प्रतिदिन 600 रुपए की इडली बेचती हूँ। उसमें से 200 रुपए अपने पास रख लेती हूँ।’

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