पढ़िए कैसे श्रीनगर की सड़कों पर फेल बेचने वाला एक शख्स बन गया आतंकवादी ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 20 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। आप सब्जी बाज़ार में खरीदारी के लिए निकलते हैं। वहाँ सब्जी बेचने वालों के अलावा भी कई रेहड़ी वाले होते हैं, जिनमें फल बेचने वाले भी होते हैं। आप फल भी खरीदते होंगे। अब कोई रेहड़ी पर फल बेच रहा हो, तो आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि वह कोई बहुत बड़ा आसामी तो होगा नहीं। सीधी सी बात है कि फल बेचने वाला साधारण व्यक्ति ही होगा।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी एक बाज़ार में बशीर अहमद फयाज़ नामक व्यक्ति देश के अन्य फल विक्रेताओं की तरह रेहड़ी पर फल बेचा करता था। लोग उसे ग़रीब समझते थे। कई लोग तो दया का भाव रखते हुए बशीर से ही फल खरीदते थे, ताकि उसकी कुछ कमाई हो सके। लोगों को कहाँ मालूम था कि साधारण-सा ग़रीब दिखाई देने वाला फल विक्रेता बशीर कौन है ? हिन्दुस्तानी नागरिकों के फल खरीदने से गुज़ारा करने वाले बशीर के मन में हिन्दुस्तान को लेकर क्या ख़ुराफात चल रही थी ?

आपको जान कर आश्चर्य होगा कि श्रीनगर की सड़कों पर फल बेचने वाला यह बशीर अहमद फयाज़ आज दिल्ली पुलिस की हिरासत में है, क्योंकि वह साधारण और ग़रीब फल विक्रेता नहीं, अपितु दुर्दांत आतंकवादी है। बशीर को हाल ही में यानी गत सोमवार को ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल की टीम ने श्रीनगर के कोठीबाग क्षेत्र से गिरफ्तार किया। बशीर 2013 से फरार था। बशीर के दो साथी फैयाज़ अहमद लोन और अब्दुल मजीद बाबा भी बशीर के साथ ही फरार हुए थे। इनमें फैयाज़ अहमद लोन को मार्च तथा अब्दुल मजीद बाबा को मई में दबोच लिया गया था।

कौन और कितना ख़तरनाक है बशीर ?

जम्मू-कश्मीर के सोपोर में जन्मा 50 वर्षीय शीर 2007 से पहले रेहड़ी पर फल बेचता था। वह कभी जम्मू-कश्मीर का एक आम नागरिक हुआ करता था, परंतु 1990 में उसने रास्ता बदला और हिज़्बुल मुजाहिद्दीन नामक आतंकी संगठन में शामिल हो गया। फिर तो बशीर का लगातार माइंड वॉश होता चला गया। बशीर ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकी प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उसे हथियार और गोला बारूद भी मुहैया कराए जाने लगे। वैसे दिल्ली पुलिस ने फरवरी-2007 में बशीर, फैयाज़ और अब्दुल को एक पाकिस्तानी आतंकवादी शाहिद ग़फूर के साथ दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग से गिरफ्तार किया था। ये लोग दिल्ली को दहलाने की साजिश रच रहे थे। इस मामले की दिल्ली की अदालत में सुनवाई हुई। 7 अगस्त, 2013 को दिल्ली की अदालत ने शाहिद ग़फूर को तो सजा सुनाई, परंतु बशीर, फैयाज़ और अब्दुल को बरी कर दिया। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत को हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने बरी किए गए बशीर सहित तीनों आरोपियों को भी दोषी करार दिया, परंतु कुछ समय बाद जमानत मिलते ही तीनों फरार हो गए। पुलिस ने बशीर पर दो लाख रुपए का ईनाम भी घोषित कर रखा था। अंतत: गत सोमवार को बशीर पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया।

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