भारत के इस पुराने दुश्मन को पाक ने सौंपी आतंक की कमान : जानिए कौन है वो ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। पाकिस्तान में हाफिज़ सईद, मौलाना मसूद अजहर और सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकी होने की बात अब दुनिया से छुपी नहीं है। दूसरी तरफ पाकिस्तान उसके यहाँ पल रहे आतंकवादियों और उनके संगठनों के खिलाफ कार्यवाही को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का जबरदस्त दबाव झेल रहा है। ऐसे में इन आतंकवादियों की कोई भी हरकत पाकिस्तान के लिये खतरनाक सिद्ध हो सकती है। इसलिये पाकिस्तान ने अब नया पैंतरा चला है और वह भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिये एक नये चेहरे को सामने लेकर आया है। हालाँकि यह चेहरा भारत के लिये नया नहीं है, बल्कि उसके पुराने दुश्मनों में से ही एक है। कौन है वो चेहरा आइये जानते हैं उसके बारे में…

मुश्ताक अहमद जरगर है आतंक का नया ‘अजगर’

दरअसल, भारत की आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने दिल्ली पुलिस को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बड़े आतंकवादी हमले का अलर्ट जारी किया है। आईबी की गुप्त रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने हाफिज़ सईद और उसके आतंकी संगठनों लश्करे-तैयबा, जमात-उद-दावा, मौलाना मसूद अजहर और उसके आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद तथा सैयद सलाहुद्दीन और उसके आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पोल खुलने के बाद अब अल-उमर-मुजाहिद्दीन (AUM) के आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर को अपना नया ‘पोस्टर-ब्वॉय’ बनाया है, जो जम्मू कश्मीर के साथ-साथ भारत के किसी भी शहर में आतंकी हमले को अंजाम दे सकता है। पाकिस्तान का यह नया पोस्टर ब्वॉय मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लातराम जम्मू कश्मीर का खूँखार आतंकवादी है। इसके मॉड्यूल ने ही गत 12 जून को अनंतनाग में सीआरपीएफ (CRPF) पर आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद हुए थे और 5 जवान घायल हुए थे। इसी साल 14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले के बाद यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला था। हालाँकि पुलवामा हमले की जिम्मेदारी मौलाना मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, वहीं अनंतनाग हमले की जिम्मेदारी इस मुश्ताक अहमद जरगर के आतंकी संगठन एयूएम ने ली थी। आईबी की रिपोर्ट के अनुसार इस जरगर ने जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के लड़कों को भर्ती किया है और उन्हें जम्मू कश्मीर के अंदर तथा घाटी से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों में फिदायीन हमलों की ट्रेनिंग दे रहा है। आईबी की सलाह पर दिल्ली पुलिस ने आसपास के राज्यों की पुलिस की मदद से आईएसआई की साजिश से निपटने के लिये एनसीआर में कठोर आतंकवाद रोधी कदम उठाये हैं।

कौन है मुश्ताक अहमद जरगर ?

आईबी की रिपोर्ट के अनुसार मुश्ताक अहमद जरगर के एयूएम का मुख्यालय पीओके के मुजफ्फराबाद में है, जहाँ यह संगठन आईएसआई के अधिकारियों की निगरानी में आतंकवादी शिविर चला रहा है। आईबी के अनुसार इस शिविर में आईएसआई के अधिकारी, पाक सेना की मदद से फिदायीन टुकड़ियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। आईबी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार का लक्ष्य कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने के लिये उसे देश विदेश में हर मंच से उछालते रहना है और इसी के अंतर्गत आतंकियों को भी खास हिदायत दी गई है कि उन्हें भड़काऊ तरीके से फिदायीन हमलों को अंजाम देना है। इसलिये रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि यह आतंकी मानव बम या भारी मात्रा में विस्फोटकों से भरे वाहन के जरिये फिदायीन हमला कर सकते हैं। हमला करने के लिये अंधाधुंध गोलीबारी करने का रास्ता भी चुन सकते हैं।

कंधार कांड में भारत की कैद से रिहा हुए थे मसूद अजहर और जरगर

हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के 5 आतंकवादियों ने 24 दिसंबर-1999 को इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान का अपहरण किया था और कंधार ले गये थे, जिसमें बंधक बनाये गये 178 यात्रियों की रिहाई के बदले में आतंकवादियों ने तीन गिरफ्तार आतंकियों को रिहा करने की भारत के समक्ष शर्त रखी थी। इसमें भारत ने जिन तीन आतंकियों को रिहा किया था उनमें मौलाना मसूद अजहर और अहमद ओमर सईद शेख के अलावा तीसरा आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर था। इस प्रकार भारत के लिये यह आतंकी चेहरा नया नहीं है, बल्कि वह भारत का पुराना दुश्मन है। भारत की कैद से रिहा होने के बाद अहमद ओमर सईद शेख ने अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के अलावा कई अन्य हाई-प्रोफाइल अपराधों को अंजाम दिया था। मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद संगठन बनाया था, जबकि जम्मू एण्ड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का सदस्य रह चुका मुश्ताक 1991 में ही अपना अलग संगठन बना चुका था। 2002 में पाकिस्तान में उसे गिरफ्तार भी किया गया था, परंतु वह सिर्फ दिखावटी गिरफ्तारी थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक मुश्ताक की जड़ें जैश-ए-मोहम्मद से भी जुड़ी हैं, वह जेईएम के मदरसों में आतंकियों को ट्रेनिंग देता था।

बालाकोट एयर स्ट्राइक में मारे जाने की उड़ी थी ख़बर

ऐसा माना जा रहा था कि वह बालाकोट में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक में मारा गया, परंतु इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी। अनंतनाग हमले से पहले भी कहा जा रहा था कि मुश्ताक का कश्मीर में कोई खास दबदबा नहीं है और उसके संगठन के पास भी कोई ऐसे सोर्स नहीं है कि वो छोटे आतंकी हमले को भी अंजाम दे सके। बाद में खुलासा हुआ कि मुश्ताक ने जैश और हिजबुल मुजाहिद्दीन की मदद से अनंतनाग हमले को अंजाम दिया था। दरअसल मुश्ताक 1999 में भारतीय कैद से रिहा होने के बाद से ही किसी न किसी आतंकवादी गतिविधि से जुड़ा रहा और भारत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता रहा है। अब एनसीआर पर इस आतंकी की नज़र साबित करती है कि मुश्ताक और उसके संगठन को पाक सेना और आईएसआई की मदद मिल गई है और अब वह सुरक्षा की दृष्टि से भारत के लिये बड़ा खतरा बन सकता है। मुश्ताक पर अकेले कश्मीर में लगभग 3 दर्जन लोगों की हत्या के आरोप हैं, इससे पता चलता है कि वह कितनी खूँखार मानसिकता वाला अपराधी है।

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