हिन्द महासागर में दुश्मन को ‘खंडहर’ बना देगी INS खंडेरी : जानिए क्या है इसकी शक्ति ?

Written by

अहमदाबाद 18 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। Indian Naval Ship यानी INS खंडेरी पनडुब्बी आगामी 28 सितंबर को भारतीय नौसेना (INDIA NAVY) में शामिल होने जा रही है। दुश्मन को खंडहर बना देने वाली आईएनएस खंडेरी पनडुब्बी का नाम खंडेरी मराठा सेनाओं के द्वीप खंडेरी के नाम पर रखा गया है। महाराष्ट्र में तटवर्ती मुंबई के दक्षिण में स्थित खंडेरी द्वीप पर मराठा सेनाओं ने 17वीं सदी में अपनी सत्ता को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण खंडेरी द्वीप की ताक़त को देखते हुए भारत ने 28 सितंबर को नौसेना में शामिल होने वाली पनडुब्बी का नाम आईएनएस खंडेरी रखा है। इस पनडुब्बी का जैसा नाम है, वैसा ही इसका काम भी है। आइए जानते हैं कितनी ताकतवर है आईएनएस खंडेरी और कैसे ये दुश्मनों पर भारी पड़ेगी ?

नौसेना की समुद्री ताकत में जल्द ही इज़ाफा देखने को मिलेगा, क्योंकि 28 सितंबर को मुंबई में स्कॉर्पिन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी ‘आईएनएस खंडेरी’ नौसेना में शामिल हो जाएगी। भारतीय नौसेना की समुद्री ताक़त अब दुनिया देखेगी। आईएनएस खंडेरी को एमडीएल और फ्रांस की फ्रेंच कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा मिल कर बनाया गया है। नौसेना ऐसी कुल 6 पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करेगी, जिसमें पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 2017 में शामिल किया जा चुका है, जबकि अब 28 सितंबर को आईएनएस खंडेरी भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगी।

‘आईएनएस खंडेरी’ में क्या खास है ?

नौसेना का कहना है स्कॉर्पिन श्रेणी की सभी 6 पनडुब्बियों को नौसेना की राफेल कहा जा सकता है। यह दूसरी पीढ़ी की पनडुब्बी है, जिसका वज़न करीब 1800 टन है। इसमें कई उन्नत सेंसर्स, एंटी-शिप मिसाइल और टॉरपिडो लगे हुए हैं। यह पानी के अंदर बेहद खामोशी से ज्यादा देर तक रह सकती है। वर्तमान चुनौतियों और हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती घुसपैठ का मुकाबला करने में भी यह काफी मददगार साबित होगी। नौसेना में खंडेरी दो साल की देरी से शामिल हो रही है। इससे पहले पनडुब्बी कलवरी दिसंबर 2017 में नौसेना में शामिल हुई थी, जिसके नौ महीने बाद सितंबर 2018 में ही खंडेरी को शामिल किया जाना था, परंतु यह दो साल की देरी से 28 सितंबर, 2019 में शामिल हो रही है। इस समय नौसेना में कुल करीब 16 पनडुब्बियाँ हैं। इनमें से एक परमाणु चालित, एक बैलेस्टिक मिसाइल दागने में सक्षम और 14 परंपरागत पनडुब्बियाँ हैं। इनमें से 14 परंपरागत पनडुब्बियाँ तीन दशक का अपना सेवाकाल पूरा कर अब सेवानिवृति की प्रतीक्षा कर रही हैं। ऐसे में स्कॉर्पिन श्रेणी की इन दो पनडुब्बियों आईएनएस कलवरी और आईएनएस खंडेरी की मदद से नौसेना की पानी के अंदर दुश्मन से लड़ने की ताकत में कई गुना वृद्धि होगी। कलवरी श्रेणी की यह स्कॉर्पिन सबमरीन आईएनएस खंडेरी कई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें ऐसी तकनीक है कि दुश्मन देशों की नेवी के लिए इसका सामना करना मुश्किल होगा और यह सटीक हमला करने में सक्षम है। अब 28 सितंबर को INS खंडेरी नेवी में शामिल हो जाएगी, जिसके बाद INS करंज के भी जल्द ही नेवी को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा तीन और सबमरीन एमडीएल में बन रही हैं, जो 2022-23 तक नेवी को मिल सकती हैं।

दुश्मन की निगाह में नहीं आ सकती आईएनएस खंडेरी

आईएनएस खंडेरी हर उस काम को कर सकती है, जिसे कोई भी आधुनिक पनडुब्बी करती है। जैसे कि एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, इंटेलीजेंस इकट्ठा करना और सर्विलांस। इस सबमरीन की टॉप स्पीड करीब 20 नॉट्स की है। इस सबमरीन की खासियत है कि ये दुश्मन की निगाह से छिपी रह सकती है। यह 1150 फीट (350 मीटर) की गहराई तक जा सकती है। इसमें EXOCETSM 39 मिसाइल और टॉरपिडो दागने की क्षमता है। EXOCETSM 39 एंटी-शिप मिसाइल (Anti Ship Missile) है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 50 किमी की है। यह हवा में कम ऊँचाई पर उड़ते हुए बेहद तेज गति से दुश्मन पर मार करती है। आईएनएस खंडेरी को इसमें लगे चार MTU 12V 396 SE84 डीजल इंजन से 37 किमी प्रतिघंटे या 20 नॉट्स की ताकत मिलती है। इसके अलावा इसमें 360 बैटरियाँ लगी हैं। यह पनडुब्बी 50 दिनों तक समुद्र में रह सकती है। इसमें 8 अधिकारी और 35 सेलर के रहने की व्यवस्था है। इसमें अत्याधुनिक राडार सिस्टम लगाया गया है। यहाँ यह भी जान लीजिए कि भारत को अभी 18 डीज़ल इलेक्ट्रिक और 6 परमाणु पनडुब्बियों की आवश्यकता है। इसके अलावा चार ऐसी परमाणु पनडुब्बियाँ भी भारत को चाहिए, जिनसे लंबी दूरी की बेलेस्टिक मिसाइल को दागा जा सके। 655 किग्रा वज़नी यह मिसाइल करीब 4.69 मीटर लंबी है। इसके अलावा इसमें 30 एंटी-शिप माइन्स भी हैं।

क्या है प्रोजेक्ट 75 ?

1615 टन वज़नी आइएनएस खंडेरी सबमरीन इसी श्रेणी की आईएनएस कलवरी के बाद दूसरी पनडुब्बी है। आईएनएस कलवरी (INS Kalvari) को दिसंबर 2017 में नौसेना में शामिल किया गया था। आईएनएस कलवरी देश में बनी पहली परमाणु पनडुब्बी है, जो भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी। कलवरी क्लास की 6 पनडुब्बी मुंबई के मझगांव डॉक में एक साथ बन रही हैं और मेक इन इंडिया के तहत इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है। कलवरी के बाद खंडेरी और अब प्रोजेक्ट की तीसरी पनडुब्बी करंज 31 जनवरी को लॉन्च होगी। स्कॉर्पियन सबमरीन प्रोग्राम (Scorpene Submarine Programme) को प्रोजेक्ट 75 का नाम दिया गया है। यद्यपि यह प्रोग्राम अपने तय समय से करीब पांच साल पीछे चल रहा है। इस पूरे प्रोग्राम पर 25,700 करोड़ रुपये खर्च किये गए है। आईएनएस खंडेरी के बाद दो और सबमरीन वर्ष 2022-2023 में भारतीय नौसेना में शामिल होंगी। आईएनएस कलवरी के अलावा आईएनएस चक्र और आईएनएस अरिहंत न्युक्लियर पावर सबमरीन हैं।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares