विचित्र विरोधाभास : कहीं गाँव में नहीं लगते ताले, कहीं पूरा गाँव ही है चोर !

Written by

अहमदाबाद 17 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। हमारे देश में कई तरह विचित्र और विरोधाभासी घटनाएँ देखने-सुनने को मिलती हैं, जिनमें देश में कई ऐसे गाँव और शहर हैं, जहाँ के घरों में लोग ताले नहीं लगाते, क्योंकि वहाँ न कोई चोर है और न ही कोई चोरी होती है। कुछ जगहों पर ऐसे बाज़ार भी हैं, जहाँ दुकानें हैं, माल है, परंतु दुकानदार नहीं है। लोग खुद ही सामान उठाते हैं, दाम चुकाते हैं और चले जाते हैं।

प्रामाणिकता की ऐसी विचित्र घटनाओं के बीच एक विरोधाभासी घटना भी सामने आई है, जहाँ गाँव में चोर नहीं बसते, अपितु पूरा का पूरा गाँव ही चोर है। कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति जन्मजात अपराधी नहीं होता है। परिस्थितियाँ उसे अच्छे या बुरे रास्ते पर ले जाती हैं, परंतु पूरा का पूरा गाँव बुरे रास्ते पर क्यों चलने को विवश हुआ ? आश्चर्य की बात यह है कि इस गाँव के लोगों का जीवन यापन ही चोरी से चलता है। इस गाँव का नाम उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हैं। इस गाँव से पुलिस भी अब परेशान हो गई है। इस गाँव के लोग गरीबी और बेरोजगारी के चलते चोरी का खानदानी काम करते हैं। दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे चोर को पकड़ा है,चोरी करना उसका ही पेशा नहीं बल्कि खानदान के साथ पूरे गाँव का यही काम है। बचपन उसका चोरी करने के तरीके सीखने में ही बीता और बड़े होकर उसने कई चोरियों की वारदात को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ दिल्ली में सिर्फ तीन ही मामले लिंक हुए हैं। इस खानदानी चोर को दिल्ली के बाड़ा हिंदूराव पुलिस स्टाफ ने पकड़ा है। आरोपी ने पुलिस की पूछताछ में यह दावा किया है, कि गाँव का हर शख्स सिर्फ चोरी करके ही अपना पेट भरता है। जिसके बाद पुलिस भी हैरान रह गई..इस बारे में जब गाँव की लोकल पुलिस से पूछताछ की गई तब यह बात सही निकली,लोकल पुलिस का कहना है उनका पूरा स्टाफ इस गाँव से परेशान है…क्योंकि पुलिस को इस गाँव के बारे में पता रहते हुए भी वो कुछ कार्रवाई कर नहीं सकती..इस चोर गाँव से न सिर्फ पुलिस बल्कि आसपास के लोग भी परेशान हैं…

उज्जैन में लगे महाकुंभ के दौरान की थी कई चोरियाँ

जिस तरह से वह अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देता था। उसने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। 2016 में उज्जैन में लगे महाकुंभ के दौरान यूपी के गोंडा जिले के एक ऐसे गाँव के बारे में पता चला था, जहां रहने वाला हर शख्स चोर है। उज्जैन पुलिस ने बताया था कि पूरा गाँव ही कुंभ मेले में आया हुआ था और इनका मकसद स्नान या पूजा करना नहीं बल्कि चोरी करना था। इस दौरान कई चोरी की रिपोर्ट लिखी गई यही वह वक्त था जब इस चोर गाँव के बारे में पुलिस को पता चला था।

एक ऐसा गाँव, जो बनाता है अवैध हथियार

भारत में एक गाँव ऐसा भी है, जो हथियार बनाने को लेकर बदनाम है। यह गाँव मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा की सतपुड़ा पहाड़ियों पर बसा हैं। यह गाँव बदनाम है। इस गाँव का नाम पाचोरा गाँव हैं, जिसकी आबादी लगभग 900 हैं। पाचोरा गाँव में 150 सिकलीगर परिवार रहते हैं, जो पूरे देश में अवैध हथियार बनाने के लिए कुख्यात हैं। 2003 में सरकार ने वादा किया था कि युवाओं को रोजगार दिया जाएगा, जिसके बाद सिकलीगरों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पाचोरा के लोगों ने हथियार के कारोबार को बंद कर दिया था। दूसरी तरफ सरकार इन लोगों को रोजगार नहीं दे पाई, तो गाँव के 90 प्रतिशत लोग खेती-किसानी, मजदूरी या छोटे मोटे व्यवसाय से जुड़ गए थे, परंतु 10 प्रतिशत लोगों ने फिर से अवैध हथियार बनाने का गोरखधंधा शुरू कर दिया। कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश हत्या कांड में प्रयुक्त पिस्तौल इसी गाँव में बनी थी, जिसके बाद यह गाँव फिर से सुर्खियों में आ गया था। यहाँ के लोगों का कहना है कि गरीबी के कारण गाँव के युवा चोरी-छिपे अवैध हथियार बनाने और बेचने के धंधे में अभी भी लगे हुए हैं।

Article Tags:
· · ·
Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares