यहाँ दुकानें तो हैं, मगर दुकानदार नहीं : फिर भी नहीं होती चोरी

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। देश में एक तरफ चोरी की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं और पुलिस प्रशासन चोरों से तो शासन टैक्स चोरों से परेशान है। ऐसे में यदि हम आपसे कहें कि देश में ऐसी भी जगह है, जहाँ दुकान खुली हुई है और लोग पैसे देकर सामान भी खरीदते हैं, परंतु दुकान में कोई दुकानदार मौजूद नहीं रहता तो कदाचित आप भरोसा नहीं करेंगे, परंतु यह सच है। आप भी जान लीजिए इन जगहों के बारे में जहाँ चोरी नहीं होती।

इस बाजार में अपनी दुकान लगाकर चले जाते हैं दुकानदार

हम बात कर रहे हैं पूर्वोत्तर के छोटे से राज्य मिजोरम की। इस राज्य की राजधानी आइज़ॉल के राजमार्ग पर आप बाजार में निकलेंगे तो आश्चर्य से चकित हो जाएँगे। अगर आप किसी दुकान पर दुकानदार को हाजिर नहीं देखते हैं तो दूसरी दुकान पर सामान लेने चले जाते हैं, परंतु इस बाजार में सारी दुकानों से दुकानदार नदारद मिलते हैं। वह अपनी अपनी दुकानें जमाकर दूसरे कामों के लिये बाहर निकल जाते हैं। आपको किसी दुकान पर कोई दुकानदार नहीं मिलेगा। आश्चर्य की बात तो यह है कि बिना दुकानदार के ही इन दुकानों का सामान न सिर्फ बिकता है, बल्कि दुकानदारों की अच्छी खासी कमाई भी होती है। ग्राहक को जो वस्तु खरीदनी होती है, उस वस्तु पर लिखा दाम देखकर वह पैसे डिब्बे में डाल देता है और सामान ले जाता है। शांतिप्रिय मिजोरम के लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानदारों को किसी चोरी या हिसाब किताब में किसी गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं रहती है। आइज़ॉल के राजमार्गों पर सड़क के किनारे लगी सभी तरह की दुकानें ऐसे ही बिना दुकानदार के चलती हैं। इनमें सब्जियों की दुकानें भी शामिल हैं। जब कोई पहली बार इस बाजार में निकलता है तो यहाँ के बाजारों की व्यवस्था देखकर भरोसा ही नहीं कर पाता है, वह सोचता है कि दुकानों की रखवाली के लिये कोई तो मौजूद होना ही चाहिये, मगर जनाब ! यही तो यहाँ की खासियत है। एक स्थानीय निवासी के अनुसार ऐसा सिर्फ मिजोरम में ही संभव है। मिजो लोगों को खुद पर तो भरोसा है ही, वह दूसरे लोगों पर भी उतना ही भरोसा करते हैं। आश्चर्य की बात यह भी है कि उनका यह भरोसा अब तक बरकरार भी है। उनका भरोसा इसलिये भी कायम है क्योंकि अभी तक मिजो लोगों में धूर्तता और कुटिलता जैसे दुर्गुण नहीं हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो मिजोरम एक आदर्श उदाहरण है। अभी तक ऐसा सिर्फ विदेशों में ही देखने को मिलता था, जहाँ स्वचालित मशीनों से सामान खरीदा जाता है, जबकि मिजोरम में यह परंपरा दशकों से चली आ रही है।

केरल के कुन्नूर में भी है दुकानदार रहित दुकान

दक्षिण भारतीय राज्य केरल के कुन्नूर में भी एक ऐसी दुकान है, जिसमें कोई दुकानदार देखने को नहीं मिलता है। ग्राहक अपनी इच्छानुसार वस्तु खरीद लेते हैं और उस वस्तु की कीमत दुकान में रखे बॉक्स में डालकर चले जाते हैं। कुन्नूर के Vankulathuvayal इलाके में इसी साल 1 जनवरी से जनशक्ति ट्रस्ट की ओर से एक दुकान शुरू की गई है। इस दुकान में मिलने वाली हर वस्तु का निर्माण दिव्यांग लोग करते हैं। इन वस्तुओं की बिक्री से जो आय प्राप्त होती है, उसे इन्हीं दिव्यांगों के काम में लगाया जाता है। यह दुकान सुबह 6 बजे खुल जाती है और रात को 10 बजे तक खुली रहती है। दुकान में कोई गड़बड़ी न हो, इसलिये सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं, इसके अलावा आसपास के दुकानदार विशेषकर सब्जीवाले भी दुकान पर नज़र रखने का काम करते हैं। दुकान पर बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें लिखा गया है कि इस दुकान पर कोई दुकानदार नहीं है। आपको जो वस्तु खरीदनी है, उसकी कीमत बॉक्स में डालकर वस्तु खरीद सकते हैं। दुकान को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स भी मिल रहा है। लोग सामान खरीद रहे हैं और ईमानदारी से वस्तुओं की कीमत भी चुका रहे हैं। इसलिये अब तक कोई गड़बड़ी भी नहीं हुई है। इस दुकान की सफलता से प्रेरित होकर जनशक्ति ट्रस्ट के संचालक सुगुनन पीएम और इलाकों में भी ऐसी दुकान शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

शनिधाम शिंगणापुर में बैंकों में नहीं लगते ताले

महाराष्ट्र में शनिदेव का धाम शिंगणापुर देश का एकमात्र ऐसा कस्बा है, जहाँ किसी घर या दुकान में ताला तो दूर दरवाजा नहीं लगाया जाता है, चाहे वह बैंक ही क्यों न हो। इस कस्बे में बैंक सेवा शुरू करने के लिये भारतीय रिजर्व बैंक को भी अपने नियम बदलने पड़े हैं। यह जानकर आप और भी आश्चर्यचकित हो जाएँगे कि इस इलाके में रहने वाले लोग अपना कीमती सामान जैसे कि पैसे और गहने भी किसी तिजोरी या अलमारी में नहीं रखते हैं। यहाँ यूको बैंक ने अपनी एक शाखा खोली है, परंतु शाखा खोलने के लिये इस बैंक को भी यहाँ के तौर-तरीकों को अपनाने के लिये मजबूर होना पड़ा और इस कारण इस शाखा को देश की प्रथम लॉकलेस ब्रांच का भी दर्जा प्राप्त हुआ है। बैंक की शाखा में मात्र शीशे के द्वार लगे हैं और वह इसलिये लगाए गये हैं, ताकि कोई जानवर बैंक के अंदर न घुस आये। इस इलाके में प्रचलित मान्यता के चलते 2011 तक यहाँ किसी बैंक ने शाखा नहीं खोली। यूको बैंक ने आरबीआई से विशेष अनुमति लेकर इस शाखा को शुरू किया है। शुरुआत में बैंक के अधिकारियों को डर सता रहा था कि बैंक में चोरी न हो जाए, इसलिये अधिकारियों ने कुछ समय तक बैंक के बाहर सुरक्षा गार्ड बैठाया, परंतु कुछ समय बाद जब अधिकारियों को भी भरोसा हो गया कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, तो उन्होंने सिक्युरिटी हटा दी। इस पूरे इलाके में रहने वाले सभी लोगों का सख्ती से यह मानना है कि यह इलाका शनिदेव का है और खुद शनिदेव पूरे इलाके की सुरक्षा करते हैं। इसलिये लोगों को घरों में दरवाजे या ताले लगाने की कोई जरूरत नहीं है। लोगों का यह भी मानना है कि यदि इस इलाके में कोई चोरी करता भी है तो वह स्वतः ही अंधा हो जाता है। इसी कारण 15 किलोमीटर के दायरे वाले इस इलाके में कभी कोई चोरी भी नहीं होती है।

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