VIDEO : क्या मायने हैं डेटा साइंटिस्ट बनने के, जो केवल 12 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ ने कर दिखाया ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 26 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। हैदराबाद का 12 वर्षीय सिद्धार्थ श्रीवास्तव पिल्ली इन दिनों चर्चा में है, क्योंकि वह डेटा साइंटिस्ट बन चुका है। किसी साधारण व्यक्ति को डेटा साइंटिस्ट बनने के लिए मैथ्स, कम्प्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक या एमएस तक की पढ़ाई करते हुए ये भारी-भरकम डिग्रियाँ हासिल करनी पड़ती हैं, परंतु सिद्धार्थ केवल 12 वर्ष का है और 7वीं कक्षा में पढ़ता है। इतनी अल्पायु में उसने यह बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। सिद्धार्थ इस समय हैदराबाद स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी मोंटेजीन स्मार्ट बिज़नेस सॉल्युशन्स (MONTAIGNE SMART BUSINESS SOLUTIONS) यानी SMBS में डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत् है।

सिद्धार्थ की उपलब्धि क्यों बड़ी ?

डेटा साइंटिस्ट बनना विश्लेषण और कहानी कहने में कुशल लोगों के लिए कठिन कार्य नहीं है, परंतु यह कुशलता अक्सर इंसान को एक उम्र के बाद और मैथ्स, कम्प्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक या एमएस करने के बाद आती है। साथ ही PYTHON, JAVA, R, SAS जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का ज्ञान भी आवश्यक होता है। यह सब हासिल करते हुए एक साधारण विद्यार्थी किशोरावस्था से युवावस्था में पहुँच जाता है और तब जाकर वह डेटा साइंटिस्ट बन पाता है, परंतु सिद्धार्थ ने केवल 12 वर्ष की आयु में डेटा साइंटिस्ट बनने की सारी योग्यताएँ अर्जित कर ली और आज वह सॉफ्टवेयर कंपनी एमएसबीएस में डेटा साइंटिस्ट के रूप में जॉब कर रहा है। इसीलिए यह कहा जा सकता है कि सिद्धार्थ की उपलब्धि बड़ों-बड़ों को ईर्ष्या में डालमें सक्षम है।

कौन है सिद्धार्थ श्रीवास्तव पिल्ली ?

हैदराबाद में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला सिद्धार्थ संभव था कि एक साधारण छात्र होता, उसमें पढ़ाई के साथ-साथ डेटा साइंटिस्ट बनने की विशेष लगन थी। उसके पिता ने भी उसकी इस लगन में उसका साथ दिया। सिद्धार्थ खुद कहता है कि उसके पिता ने उसे बहुत कम आयु में ही कोडिंग करना सिखाया। इतनी कम आयु में यदि वह नौकरी करने में सफल रहा है, तो इसका श्रेय उसके पिता को जाता है। वह आज जो भी है, केवल अपने पिता के कारण है।

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