इसे कहते हैं ‘न्याय हठ’ : सिर्फ 33 रुपए के REFUND के लिए 733 दिनों तक लड़ी कानूनी लड़ाई और 9 लाख लोगों के लिए भी खोला 3.34 करोड़ रुपए पाने क दरवाज़ा

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राजस्थान के कोटा शहर के एक इंजीनियर सुजीत स्वामी ने दो साल की लंबी न्यायिक लड़ाई आखिरकार जीत ली और इण्डियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) को उसे 33 रुपये लौटाने पड़े। यह खबर उन लोगों के लिये महत्वपूर्ण है, जो रेलवे का टिकट बुकिंग करवाने के बाद किसी कारण से टिकट कैंसिल करवाते हैं। क्योंकि यह मामला एक सुजीत स्वामी से ही जुड़ा हुआ नहीं है। आईआरसीटीसी ने सुजीत जैसे 9 लाख लोगों से लगभग 3.34 करोड़ रुपये वसूल लिये हैं, जिनके बारे में इन 9 लाख लोगों को पता भी नहीं है।

दरअसल सुजीत स्वामी ने अप्रैल 2017 में कोटा से दिल्ली के लिये गोल्डन टैंपल मेल का 765 रुपये का टिकट बुकिंग कराया था, परंतु जब उन्होंने टिकट कैंसिल कराया तो टिकट कैंसिलेशन चार्ज के 65 रुपये कटने चाहिये थे और सुजीत को 700 रुपये वापस मिलने चाहिये थे, परंतु आईआरसीटीसी ने 65 रुपये कैंसिलेशन चार्ज और 35 रुपये सेवा कर सहित 100 रुपये काट कर सुजीत को 665 रुपये लौटाये तो सुजीत को यह 35 रुपये वापस पाने के लिये लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। हालाँकि वह अपने 35 रुपये वापस पाने में सफल रहे।

स्वामी ने सबसे पहले 35 रुपये के लिये अप्रैल-2018 में लोक अदालत में याचिका लगाई, परंतु अदालत ने यह कहकर जनवरी-2019 में याचिका का निस्तारण कर दिया कि यह मामला उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। इसके बाद स्वामी ने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से लड़ाई शुरू की। उनकी आरटीआई भी दिसंबर-2018 से अप्रैल-2019 तक एक विभाग से दूसरे विभाग में घूमती रही। अंततः लंबी लड़ाई के बाद 4 मई-2019 को आईआरसीटीसी ने 35 रुपये में से 2 रुपये काटकर 33 रुपये उनके खाते में जमा कर दिये।

स्वामी के अनुसार उनकी कानूनी लड़ाई अभी भी जारी रहेगी, क्योंकि आईआरसीटीसी ने उसके व्यावसायिक सर्कुलर 49 में कहा था कि वह उन्हें 35 रुपये लौटाएगी, परंतु उसने 33 रुपये ही लौटाए हैं। इतना ही नहीं, उन्हें अपने पैसे वापस पाने के लिये बहुत लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी है, जिसकी क्षतिपूर्ति देने के बजाय आईआरसीटीसी ने उनके पैसों में से भी 2 रुपये काट लिये।

स्वामी के अनुसार उनकी आरटीआई के जवाब में आईआरसीटीसी ने पहले कहा था कि जीएसटी लागू होने से पहले बुक कराये गये रेलवे टिकट और उनके रद्द करने के सम्बंध में रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी व्यावसायिक सर्कुलर 43 के अनुसार टिकट बुकिंग के समय वसूल किया गया सर्विस टैक्स वापस नहीं किया जाएगा, परंतु अब आईआरसीटीसी ने निर्णय किया है कि 1 जुलाई-2017 से पहले बुक करवाये गये टिकटों को रद्द करने पर बुकिंग के समय लिया गया सर्विस टैक्स पूरा वापस किया जाएगा।

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