EXCLUSIVE : क्या आप जानते हैं इस बार भगवान कृष्ण का ‘कौन-सा’ जन्म दिवस है ?

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* 5247 वर्ष पहले अवतरित हुए थे नंदलाला

* अंग्रेजी तारीख ‘21 जुलाई, -3228’ थी

* 89 वर्ष की आयु में दिया था गीता का उपदेश

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 23 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। अपने युग के महान जर्मन वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में कहा था, ‘संभव है आगे आनेवाली पीढ़ियाँ शायद ही यह विश्वास कर सकें कि इस प्रकार का हाड़-मांस का मनुष्य भी कभी-कभी इस धरती पर विचरण करता था।’ आइँस्टीन की यह भविष्यवाणी आने वाले कुछ हजार वर्षों में निश्चित रूप से सच सिद्ध होगी। इसका कारण यह है कि इस धरती पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया और अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठ कर जनहित में अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए विदा हो गए, जिनमें से कई हमें आज याद नहीं हैं।

भारत भी अपनी अभूतपूर्व सनातक संस्कृति की धरोहरों से समृद्ध है, परंतु प्रमाण को ही सत्य मानने वाला आधुनिक विज्ञान हमारी वैदिक-सनातन संस्कृति को पौराणिक (MYTHOLOGY) मानता है, जिसका अर्थ है जनमानस में व्याप्त केवल और केवल मान्यता। यही कारण है कि भारत में आधुनिक विज्ञान में विश्वास रखने वाले और यहाँ तक कि सरकारें भी महान ऋषि-मुनियों और हजारों महापुरुषों की विरासत को पौराणिक मान्यता में खपा देते हैं।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) में एक दल विशेष की सरकार ने भगवान राम की ओर से लंका विजय पाने के लिए रामेश्वरम् से श्रीलंका तक समुद्र में बनाए गए रामसेतु को महज एक पौराणिक मान्यता बताया। दूसरा उदाहरण यह है कि भगवान राम ने द्वापर युग में जिस अयोध्या नगरी में जन्म लेकर पूरी दुनिया को मर्यादा का पाठ पढ़ाया, वह कलयुग में अपनी ही नगरी में अपने मंदिर के निर्माण के लिए ‘रामलला विराजमान’ नामक पक्षकार के रूप में उच्चतम् न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे बड़ी विडंबना क्या हो सकती है ?

चलिए, आज राम की बात करने का दिन नहीं है। आज दिन है द्वापर युग में जन्मे भगवान कृष्ण के बारे में बात करने का। आधुनिक काल में भगवान राम से अधिक भगवान कृष्ण प्रासंगिक हैं, क्योंकि उन्हें आने वाले घोर कलयुग का आभास था और इसीलिए उन्होंने पूरी दुनिया को गीता का उपदेश देकर धर्म-कर्म, काम, अर्थ और यहाँ तक कि मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दिखाया। पूरे देश में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर भारी हर्ष और उल्लास है।

हम सब यह तो जानते हैं कि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था और हर वर्ष भारतीय-हिन्दू कैलेण्डर के इसी माह की इसी तिथि पर हम भगवान कृष्ण का अवतरण दिवस मनाते हैं, परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण का इस बार कौन-सा जन्म दिवस है ? कदाचित नहीं, तो हम बताए देते हैं। भगवान कृष्ण का इस बार 5247वाँ जन्म दिवस है। जी हाँ, कृष्ण ने आज से ठीक 5 हजार 247 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के मथुरा में अपने मामा कंस की जेल में माता देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र के रूप में अवतार धारण किया था। वाराणसी स्थित वैदिक शोध संस्थानम् के स्वामी ज्ञानांद सरस्वती की ओर से की गई काल-गणना व शोध के अनुसार भगवान कृष्ण का जब प्रागट्य हुआ, उस दिन अंग्रेजी कैलेण्डर के हिसाब से गणना की जाए, तो 21 जुलाई का दिन था। कृष्ण का जन्म 3228 ईसा पूर्व 21 जुलाई को हुआ था।

वैदिक शोध संस्थानम् के अनुसार द्वापर युद्ध में लड़ा गया सबसे बड़ा महाभारत युद्ध ईसा पूर्व 3138 में मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा के दिन आरंभ हुआ था। महाभारत के इस युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण ने जब धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, उस दिन उनकी आयु 89 वर्ष 2 माह 7 दिन थी। इस शोध के अनुसार भगवान कृष्ण ने मथुरा से लेकर वृंदावन और वृंदावन से लेकर द्वारका तक भारतीय भूमि पर 125 वर्ष 7 माह और 7 दिन विचरण किया था। कृष्ण ने जब अपने अवतरण को समेटा यानी जब वे अंतर्ध्यान हुए, उस दिन उनकी आयु 125 वर्ष 7 माह 7 दिन थी। शोध के अनुसार अंग्रेजी कैलेण्डर के हिसाब से गिनें, तो भगवान कृष्ण ने ईसा पूर्व 3102 में 18 फरवरी के दिन गुजरात में सौराष्ट्र के प्रभास पाटण स्थित भालका तीर्थ में देह त्याग किया था।

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