कश्मीर को जागीर मानने वालों पर थप्पड़ बरसा रहे कश्मीरी

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रंग ला रहा मोदी का ‘विकास का सपना’

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाये 5 दिन बीत गये हैं। इस बीच कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं आई है। शुक्रवार को 5वें दिन घाटी में जो स्थितियाँ देखने को मिल रही हैं, उससे जाहिर है कि कश्मीर नागरिक प्रदेश को अपनी जागीर समझने वालों को करारा जवाब दे रहे हैं। इतना ही नहीं, कश्मीरी नागरिक धीरे-धीरे रोजमर्रा के जीवन को पटरी पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो दर्शाता है कि उन्हें भी अब कश्मीर में हालात बदलने की उम्मीद है। इस प्रकार पीएम नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार का कश्मीर के विकास का सपना धीरे-धीरे जवान हो रहा है।

कश्मीरी ऐसे दे रहे हैं जवाब

जिन लोगों ने जम्मू कश्मीर को अपनी जागीर समझा और सामान्य लोगों के जीवन को दूभर बनाकर अपनी जेबें भरी। उन लोगों को कश्मीर के नागरिकों से ही करारा जवाब मिल रहा है। धारा 370 हटाने से पहले सुरक्षा कारणों से जम्मू-कश्मीर में सरकार की ओर से कुछ ऐहतियाती कदम उठाए गये थे, जिनमें सशस्त्र बलों की तैनाती बढ़ाना, धारा 144 लागू करना, संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगाना, कुछ गिरफ्तारियाँ करना और मोबाइल सेवा तथा इंटरनेट सेवा स्थगित करना शामिल है। इससे सामान्य नागरिकों को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा, परंतु इसके बाद अब सरकार धीरे-धीरे पाबंदियों में ढील दे रही है, ताकि सामान्य जन-जीवन को बहाल किया जा सके।

इसी कड़ी में 5वें दिन स्कूल कॉलेज खोलने की इजाजत दी गई तो इनमें बालकों और युवाओं की उपस्थिति सामान्य देखी गई। कठुआ और सांबा जिले में सामान्य दृश्य देखने को मिले, जो दर्शाते हैं कि इन जिलों में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों को काम पर लौटने के निर्देश

हालात सामान्य होते देखकर प्रशासन ने शुक्रवार से सभी स्कूल-कॉलेजों को पहले की तरह ही खोलने की इजाजत दी तो सभी शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में पहले की तरह ही नियमित कामकाज शुरू हो गया। प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों को भी तत्काल काम पर लौटने का निर्देश दिया है। राज्य के मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी सरकारी कर्मचारी जो डिविजनल लेवल और जिला स्तर पर काम करते हैं, वह तुरंत अपनी ड्यूटी पर उपस्थित हो जाएँ और कामकाज शुरू करें।

फल-सब्जियों-मेडिकल की दुकानें ही नहीं, एटीएम भी खुले

केवल स्कूल-कॉलेज ही नहीं, कई इलाकों में रोजमर्रा की चीजों के लिये दुकानें भी खुलने लगी हैं, जिससे लोग जरूरत की चीजें खरीदने के लिये घरों से बाहर निकलने लगे हैं।

चीजें खरीदने के लिये पैसों की भी जरूरत पड़ती है। इसलिये एटीएम के बाहर भी चहल पहल देखने को मिल रही है। बाजारों में खासकर फल, सब्जियाँ और मेडिकल की दुकानें खुली देखने को मिल रही हैं।

बकरीद पर कश्मीर लौटने वालों के लिये बस-ट्रेन की सुविधा

बकरीद को ध्यान में रखकर भी लोग शॉपिंग के लिये चिंतित थे, मगर हालात सामान्य होते देखकर लोगों ने राहत की सांस ली है। बकरीद का त्यौहार मनाने के लिये अन्य राज्यों में कामकाज करने वाले और पढ़ने वाले कश्मीरी लोग घरों की ओर लौट रहे हैं, उनके लिये मदद उपलब्ध कराने को बसों तथा कैब की सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। श्रीनगर के जिलाधिकारी शाहिद चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पहुँच रहे लोगों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिये परिवहन की व्यवस्था की गई है। ईद पर घर लौटने वालों के लिये ऊधमपुर और जम्मू से विशेष ट्रेनों की भी व्यवस्था की गई है।

उल्लेखनीय है कि गुरुवार रात को ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में कश्मीरी नागरिकों को भरोसा दिलाया था कि बकरीद का त्यौहार मनाने में लोगों को कोई परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि लोग खुशी-खुशी ईद मना सकें।

कश्मीरियों की शांति पाकिस्तान और विपक्ष को दे रही कड़ा संदेश

इस प्रकार पाबंदियों में ढील के बावजूद कहीं से किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। आम नागरिक अपनी रोजमर्रा की जिंदगी शांतिपूर्ण ढंग से जी रहे हैं। केवल कुछ राजनीतिक लोग हल्ला मचा रहे हैं, जिन्हें यह धारा हटने के बाद अपनी राजनीतिक दुकान बंद होने तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में अन्य लोगों के आगे आने से राजनीतिक नुकसान होने का अंदेशा है। कश्मीरी नागरिकों की यह शांतिपूर्ण पहल अब तक जम्मू कश्मीर को आतंक के काले साये में जकड़ कर रखने वाले आतंकियों और उनके आकाओं के गाल पर भी करारा तमाचा है, जिन्होंने अभी तक कश्मीरी नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार नहीं होने दिया और उन्हें भी आतंक की काली अंधेरी गली में घसीटने का प्रयास किया। कश्मीरी नागरिकों की शांति पाकिस्तान के लिये भी कड़ा जवाब है, जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष झूठ पर झूठ बोलकर उसे कश्मीर को लेकर गुमराह करने का प्रयास कर रहा है और झूठा शोर मचा रहा है कि कश्मीर के लोगों पर जुल्म हो रहे हैं। कश्मीरी नागरिकों की शांति देश के उन विपक्षियों को भी कड़ा संदेश है जो कश्मीरी नागरिकों का नाम लेकर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं और अपनी राजनीति को चमकाना चाहते हैं।

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