Net Neutrality नहीं होता तो शायद आप इसे भी नहीं पढ़ पाते

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Net neutrality

नई दिल्ली। Net Neutrality का मुद्दा एकबार फिर से सुर्खियों में है। टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया(TRAI) ने Net Neutrality के पक्ष में अपना फैसला दिया है। अब टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंटेट के आधार पर यूजर्स के साथ भेदभाव नहीं कर सकता है।TRAI के फैसले के बाद इंटरनेट डाटा का इस्तेमाल कैसे करना है यह फैसला यूजर्स का होगा। TRAI का फैसला Net Neutrality को लेकर अमेरिकी संचार नियामक संस्था फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (FCC) के  फैसले के ठीक बाद लिया गया है। TRAI ने Net Neutrality के पक्ष में अपना फैसला दिया है जबकि अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (FCC)ने इसके खिलाफ फैसला दिया है।

टेलीकॉम कंपनी की दखल ठीक नहीं

Net Neutrality पर TRAI का फैसला यूजर्स पर कितना असर डालेगी उसके बारे में जानने से पहले जानते हैं कि आखिरNet Neutrality है क्या? Net Neutrality का मतलब कंटेट को लेकर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर स्पीड में भेदभाव नहीं कर सकती। डाटा पैक का भुगतान करने के बाद यूजर्स स्वतंत्र होंगे कि उन्हें डाटा का इस्तेमाल किस रूप में करना है।

Net Neutrality के खिलाफ टेलीकॉम कंपनियां

तमाम टेलीकॉम कंपनियां Net Neutrality खत्म करने के पक्ष में हैं। टेलीकॉंम कंपनियों की दलील है कि इसकी वजह से उन्हें राजस्व में नुकसान हो रहा है। कंपनियों की राय है कि यह फैसला बाजार पर छोड़ देना चाहिए। जो कंपनी ज्यादा बेहतर प्लान लेकर आएगी, यूजर्स उस कंपनी के सर्विस का इस्तेमाल करेंगे।

एप्लीकेशन की चुनौतियों को समझने में हुई देर

इस फील्ड के एक्सपर्ट का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियों ने लेटेस्ट एप्लीकेशन की चुनौतियों को भांपने में देर कर दी। जब तक उनको इस बात का अहसास हुआ तब तक स्काइप, व्हाट्सएप, वीबर की पकड़ बहुत ज्यादा मजबूत हो चुकी थी। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर टेलीकॉम कंपनियां ही नहीं होंगी तो लोगों तक इंटरनेट की पहुंच कैसे होगी ? इस सवाल के जवाब में एक्सपर्ट का कहना है कि बाजार बहुत बड़ा है। भविष्य में इस तरह की चुनौतियों से लड़ने के लिए गूगल जैसी कंपनियां कोशिश कर रही हैं कि वे अपने बूते यूजर्स तक इंटरनेट पहुंचा सके।

Net Neutrality को लेकर फिलहाल कोई कानून नहीं

Net Neutrality को लेकर भारत में फिलहाल कोई कानून नहीं है। हालांकि विश्व के कई ऐसे मुल्क हैं जहां इसको लेकर कानून बनाए गए हैं। चिली पहला मुल्क है जिसने 2010 में Net Neutrality पर कानून बनाया था। यूरोप में पहले और विश्व के दूसरे मुल्क नीदरलैंड ने 2012 में Net Neutrality पर कानून बनाया था। उसी साल साउथ कोरिया ने भी कानून बनाया था। इसके बाद 2016 में रूस ने भी Net neutrality पर कानून बनाया।

Net Neutrality लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक

भारत की बात करें तो फिलहाल TRAI ने एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का सुझाव दिया है। इस कमेटी का काम यह देखना होगा कि कोई भी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर Net Neutrality के आदेशों का उल्लंघन ना करे। भारत में भी Net Neutralityपर कानून बनाने की मांग की जा रही है। अगर कानून बन जाता है तो इंटरनेट मूलभूत अधिकार बन जाएगा और यह जरूरी भी है। इंटरनेट आज दुनिया को चलाने वाली ताकत है। इसकी सफलता का राज है कि यह भेदभाव नहीं करता, इसपर किसी का नियंत्रण नहीं है। इंटरनेट की वजह से हम ताकतवर हुए हैं। सही मायने में इंटरनेट ही लोकतंत्र का सच्चा उदाहरण है। इसलिए इसपर किसी का नियंत्रण हर मायने में गलत होगा।

 

 

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