यात्री गण कृपया ध्यान दीजिए : अब आपकी डिमांड पर चलेगी रेलगाड़ी !

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 सितंबर 2019 (युवाPRESS)। ऑस्ट्रेलिया की जितनी कुल आबादी है, उतनी आबादी भारत में प्रति दिन ट्रेनों में यात्रा करती है। इतनी विशाल आबादी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने के लिये देश में 12,617 रेलगाड़ियाँ दौड़ती हैं। इसके अलावा माल ढोने के लिये 7,349 माल गाड़ियाँ भी चलती हैं, जो लाखों टन माल की ढुलाई करती हैं। इतना ही नहीं, पूरे देश में 7, 349 रेलवे स्टेशन भी हैं। ट्रैक के लिहाज से भारतीय रेलवे दुनिया के बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक है और इसका चौथा क्रम है। देश में लगभग 67,368 किलोमीटर में रेलवे ट्रैक फैले हुए हैं। भारत में रेलवे सिस्टम 173 साल पुराना है। देश में भारतीय रेल की स्थापना 8 मई 1845 को हुई थी। देश की पहली ट्रेन 18 अप्रैल 1853 को मुंबई और ठाणे के बीच चली थी। 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण हुआ था। देश की विशाल आबादी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार इन यात्रियों को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। यह सौगात क्या होगी ? इसी प्रश्न का हम यहाँ आपको जवाब देंगे।

रेलकर्मियों को मिली सौगात, अब यात्रियों को मिलेगी भेंट

मोदी सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को 11 लाख रेलवे कर्मचारियों को दीवाली का बोनस देने की घोषणा की है। कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों की तनख्वाह के बराबर बोनस देने का निर्णय किया है। इससे केन्द्र सरकार के खजाने पर 2,024 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। बता दें कि केन्द्र सरकार लगातार छठे वर्ष रेलवे कर्मचारियों को बोनस देने जा रही है।

इतना ही नहीं, मोदी सरकार ने रेलगाड़ियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिये भी तोहफा सोच लिया है। दरअसल केन्द्र सरकार रेल यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी ‘वेटिंग’ को खत्म करने जा रही है। इसके अलावा सरकार ऐसी सहूलियत देने पर विचार कर रही है, जिससे यात्रियों की डिमांड पर रेलगाड़ी चलाई जा सके। केन्द्र सरकार अगले 4 वर्ष में दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट पर यात्रियों की माँग के आधार पर रेलगाड़ियाँ चलाने की तैयारी में है। इससे रेलगाड़ियों में वेटिंग की परेशानी खत्म हो जाएगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी. के. यादव के अनुसार दिल्ली-मुंबई तथा दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर समर्पित माल गलियारा यानी डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर (DFC) 2021 तक बन जाने के बाद केन्द्र सरकार का यह सपना साकार किया जा सकता है। इन दोनों रूट पर डीएफसी का निर्माण हो जाने के बाद अर्थात् माल गाड़ियों के लिये अलग से गलियारा बन जाने के बाद इन दोनों रूटों से माल गाड़ियों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। इससे इन रूटों पर अधिक से अधिक यात्री रेलगाड़ियाँ चलाई जा सकेंगी।

यादव के अनुसार दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-हावड़ा के साथ-साथ खड़गपुर-विजयवाड़ा के समर्पित माल गलियारे पर भी काम चल रहा है। अगले एक साल में इसके लोकेशन सर्वे का काम पूरा हो जाएगा। यादव के अनुसार ये डीएफसी लगभग 6,000 किलोमीटर लंबे होंगे और इन्हें अगले 10 वर्ष में पूरा किया जाएगा। जब यह काम पूरा हो जाएगा, तो रेलवे बोर्ड के पास मौजूदा रेल मार्गों पर कई और रेल गाड़ियाँ चलाने के विकल्प बढ़ जाएंगे। रेलगाड़ियाँ बढ़ने से रेल यात्रियों की वेटिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी। हालाँकि ऐसा होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। यादव के अनुसार निजी संचालकों की मदद से देश में 160 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से दौड़ने वाले डिब्बे उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाएगा।

नवंबर से चलेगी अहमदाबाद-मुंबई निजी ट्रेन

इसी के साथ आपको बता दें कि रेलवे ने इंडियन रेलवे टूरिज्म एंड कैटरिंग कॉर्पोरेशन यानी आईआरसीटीसी को अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल और दिल्ली-लखनऊ के बीच तेजस एक्सप्रेस का परिचालन शुरू करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। अहमदाबाद-मुंबई के बीच तेजस एक्सप्रेस का परिचालन नवंबर माह से शुरू हो सकता है। इन दोनों ट्रेनों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आईआरसीटीसी को तीन सालों के लिये सौंपा गया है। पीपीपी मॉडल पर चलने वाली इस ट्रेन के लिये रेलवे बोर्ड ने मार्गदर्शिका भी जारी कर दी है। यह सप्ताह में पाँच दिन चलेगी और इसका किराया राजधानी व शताब्दी की तरह डाइनैमिक होगा। रेलवे बोर्ड की ओर से तैयार किये गये ब्लूप्रिंट के अनुसार इन ट्रेनों में कोई छूट, विशेषाधिकार या ड्यूटी पास नहीं दिया जाएगा। इन ट्रेनों में टिकट जाँच का काम भी रेलवे स्टाफ नहीं देखेगा। इन ट्रेनों का नंबर भी अलग प्रकार का होगा। हालाँकि इन ट्रेनों को रेलवे स्टाफ, लोको पायलट, गार्ड और स्टेशन मास्टर द्वारा ही परिचालित किया जाएगा। इन ट्रेनों का किराया इन्हीं रूट पर चलने वाले विमानों से 50 प्रतिशत कम होगा। यह ट्रेनें सेमी हाई स्पीड ट्रेनें होंगी।

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