पाकिस्तानी भाषा बोलने वाले फारूक़ की कब अकल ठिकाने आएगी ? अब तो विमान बेचने वाले ने ही खारिज़ कर दिया F-16 पर अपने ही देश की मैगज़ीन का दावा

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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के सहयोगी राजनीतिक दल और राष्ट्रवाद से इतर कश्मीर एवं पाकिस्तान समर्थक तथाकथित देशद्रोही रुख रखने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने के भारत के दावे को ग़लत बताने वाली अमेरिकी मैगज़ीन फॉरेन पॉलिसी (FP) को मोदी विरोधी हथियार बनाने की कोशिश की। मोदी विरोध की धुन में फारूक इतने अंधे हो गए कि उन्होंने एफपी के दावे को मोदी विरोध की ढाल बनाते हुए फारूक सहित 130 करोड़ लोगों की रक्षा करने वाली भारतीय वायुसेना पर भी सवाल उठाने में गुरेज़ नहीं किया।

फारूक़ को अपने ही देश की भारतीय वायुसेना पर विश्वास नहीं है, परंतु अब अमेरिका ने जो वक्तव्य दिया है, उसके बाद तो फारूक़ को यह समझ लेना चाहिए कि भारत ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को गिराया ही था, क्योंकि पाकिस्तान को एफ-16 विमान बेचने वाले खुद अमेरिका ने अपने ही देश की मैगज़ीन फॉरेन पॉलिसी की रिपोर्ट को खारिज़ कर दिया है।

अमेरिकन रक्षा विभाग पेंटागन ने स्पष्ट कहा, ‘एफ-16 लड़ाकू विमान की जाँच के संबंध में फॉरेन पॉलिसी पत्रिका के अनाम रक्षा अधिकारी के हवाले से जिस जाँच दल को पाकिस्तान भेजे जाने की बात कही है, उनके विभाग (पेंटागन) को ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह पॉलिसी का ममला है, इसलिए दो सरकारों के बीच के किसी समझौते या अमेरिका में तैयार हुए किसी हथियार के रखरखाव के संबंध में वे (प्रवक्ता) कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।’

उल्लेखनीय है कि एफपी ने दो दिन पहले यह दावा किया था कि भारत ने पाकिस्तान का कोई एफ-16 विमान नहीं गिराया। इसके बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन और भारतीय वायुसेना (IAF) ने एफपी के दावे को ख़ारिज करते हुए कहा था कि हमारे पास एफ-16 विमान गिराने के प्रमाण हैं। भारत सरकार और भारतीय वायुसेना एफ-16 विमान गिराने का दावा इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के आधार पर कर रही हैं और स्वयं अमेरिका भी इस इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के प्रमाण को महत्व देते हुए यह मानने से गुरेज़ नहीं करता कि भारतीय वायुसेना द्वारा गिराया गया विमान एफ-16 ही था।

कश्मीर और कश्मीरियों का राग आलापने वाले फारूक़ को भारत सरकार, रक्षा मंत्री और भारतीय वायुसेना की बातों पर भरोसा नहीं हुआ, पर क्या वे अमेरिका की बात का भरोसा करेंगे ?

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