जानिए क्या है ‘ऑर्डर ऑफ ज़ायद’ सम्मान, जिसके लिए UAE ने PM मोदी को चुना

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 दिन के विदेश दौरे पर हैं। वह फ्रांस का दो दिन का दौरा पूरा करके शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबुधाबी पहुँचे, जहाँ यूएई के क्रॉउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ज़ायद’ से उनका सम्मान किया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत की 1.30 अरब जनता का सम्मान बताया और यूएई के क्रॉउन प्रिंस को इस सम्मान के लिये धन्यवाद कहा।

क्या है ‘ऑर्डर ऑफ ज़ायद’ सम्मान ?

यूएई के संस्थापक शेख ज़ायद बिन सुल्तान अल नाहयान के नाम पर 1995 में ‘ऑर्डर ऑफ ज़ायद’ सम्मान देने की शुरुआत हुई। यह सम्मान विश्व के राष्ट्र प्रमुखों तथा राष्ट्रपतियों को दिया जाता है। 1995 से लेकर अभी तक विश्व के कई बड़े नेताओं को यूएई इस अवॉर्ड से सम्मानित कर चुका है। 1995 में पहली बार यूएई ने जापान के क्राउन ऑफ प्रिंस नारुहितो को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके बाद कतर, बहरीन, कुवैत, तुर्कमेनिस्तान के शेख भी इस अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं। 2007 में यूएई ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसी साल यह सम्मान रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी दिया गया था। 2010 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ-2 को यह सम्मान दिया गया था और पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी यह सम्मान दिया जा चुका है। वहाँ के क्रॉउन प्रिंस ने गत अप्रैल माह में भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी को 2019 के इस सम्मान से अलंकृत करने की घोषणा की थी। शनिवार को यूएई के दूसरे दौरे पर पहुँचे मोदी को इससे सम्मानित करके क्रॉउन प्रिंस ने अपना वादा निभाया। यूएई का यह सम्मान पाने वाले पीएम मोदी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा कि इस सम्मान को पाकर वह काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ती मैत्री और व्यापारिक और सामरिक भागीदारी का प्रमाण है। यह सम्मान दोनों देशों के बीच सुरक्षा, शांति और समृद्धि के लिये द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर यूएई हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है।

इस अवॉर्ड से क्या लाभ होगा ?

उल्लेखनीय है कि यूएई जो खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र है और जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं। भारत और यूएई के बीच 60 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है और यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी को यह अवॉर्ड दिये जाने से भारत और यूएई के संबंधों में गर्मजोशी आएगी। इससे दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होंगे। पीएम मोदी ने अबूधाबी में एनआरआई व्यापारियों समेत वहाँ के व्यापारिक संगठनों के नेताओं के साथ भी मुलाकात की। हाल के वर्षों में भारत व यूएई के बीच कई हाई लेवल की बैठकें हुई हैं। दोनों देशों के नेताओं ने एक-दूसरे के यहाँ दौरे भी किये हैं। पीएम मोदी 2014 में पहली बार पीएम बनने के बाद अगस्त 2015 में यूएई गये थे। इसके बाद 2016 में अबू धाबी के क्रॉउन ऑफ प्रिंस मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाह्यान भारत आये थे। 2017 के भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में भी क्रॉउन प्रिंस मुख्य अतिथि थे और 2018 में पीएम मोदी ने फिर यूएई का दौरा किया था। पीएम मोदी ने वहाँ दुबई में छठी वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में बतौर चीफ गेस्ट हिस्सा लिया था। ऐसे वक्त यह सम्मान भारत को मिला है जब जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म किये जाने के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान भारत को लगातार दुनिया में बदनाम करने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर मुस्लिम देशों का समर्थन जुटाने के प्रयासों में है, ऐसे में पीएम मोदी को यह सम्मान मिलना और भी खास हो जाता है। इसका साफ साफ यह अर्थ है कि मुस्लिम देश भी पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा पर यकीन नहीं कर रहे हैं और वह अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो रहा है। कुछ दिन पहले ही यूएई के राजदूत अहमद अल बन्ना भी भारत आये थे और उन्होंने भी जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के मोदी सरकार के फैसले में कुछ भी गलत नहीं पाया था। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यह भारत का आंतरिक मामला है। हालांकि पीएम मोदी को यह सम्मान दिये जाने की पाकिस्तान में लगातार आलोचना हो रही है। पाकिस्तानी मीडिया लगातार इस पीएम मोदी के विरोध में लिख रहा है। देर शाम को पीएम मोदी विदेश यात्रा के अंतिम पड़ाव बहरीन के लिये रवाना हो गये।

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