मोदी के मारे-इमरान बेचारे : UN-US-RUSSIA ने नहीं दिया साथ, चीन ने भी लौटाया खाली हाथ !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 10 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। लगता हो इमरान खान को अपनी सत्तारोहण की पहली वर्षगाँठ घोर मायूसी और मातम के बीच मनानी पड़ेगी। आगामी 18 अगस्त को इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने एक वर्ष हो जाएगा, परंतु इमरान के पास अपनी सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर पाकिस्तान की जनता के समक्ष अपनी सफलताएँ गिनाने के लिए कुछ भी नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाँच वर्षों में पाकिस्तान को लेकर इस कड़ी कूटनीति अपनाई, जो इमरान खान को भी लगातार झुलसाती रही और सत्ता का एक साल पूरा होने से पहले ही मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की उद्घोषणा कर इमरान खान को पाकिस्तान में कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियाँ इमरान पर शब्दों के बाण चला रही हैं, तो आम जनता में भी इमरान की भारत नीति को लेकर बड़ा रोष है। कई कट्टर पाकिस्तानी इमरान पर गालियाँ बरसा रहे हैं, तो समझदार पाकिस्तानी इमरान की विदेश नीति विशेषकर भारत-कश्मीर नीति पर सवाल उठा रहे हैं।

UN-US ने नहीं दिया इमरान को भाव

भारत के इस कदम ने पाकिस्तान और इमरान सरकार पर इतना करारा प्रहार किया कि कट्टरपंथी पाकिस्तानी बुरी तरह तिलमिला उठे हैं। इमरान खान अपनी अवाम को दिखाने के लिए बौखलाहट में द्विपक्षीय संबंध तोड़ने-घटाने और ट्रेन रोकने जैसे उल-झुलूल फ़ैसले ले रहे हैं, तो उनकी सरकार कश्मीर मुद्दे पर दुनिया को झूठ के सहारे ललकार रही है, परंतु उनकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। मोदी के मारे इमरान बेचारे दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

सबसे पहले इमरान सरकार को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने झटका दिया। उसके बाद वॉशिंगटन से जो प्रतिक्रिया आई, उसे जान कर इमरान खुद हैरान रह गए। इमरान को विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस अमेरिका (US) का उन्होंने हाल ही में दौरा किया था, जिस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात की थी, जिस डोनाल्ड ट्रम्प ने कश्मीर मसले पर मध्यस्थता का ‘झूठा और भ्रमपूर्ण’ दावा किया था, वह भी कश्मीर मसले पर हाथ खड़े कर देगा।

परम मित्र चीन को रिझाने दौड़े कुरैशी उतरा मुँह लेकर लौटे

यूएन और यूएस से मायूसी मिलने के बाद पाकिस्तान को सबसे बड़ी उम्मीद परम् मित्र चीन से थी। इमरान ने अपने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को धारा 370 हटाने के भारत के फ़ैसले पर साथ मांगने के लिए विशेष दूत बना कर चीन भेजा, परंतु चीनी विदेश मंत्री ने कुरैशी से दो टूक शब्दों में कहा, ‘चीन नज़र में भारत-पाकिस्तान दोनों मित्रवत् पड़ोसी देश हैं और दोनों देशों से अपेक्षा है कि वे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और शिमला समझौते के तहत यह मुद्दा सुलझा लेंगे। चीन कश्मीर मुद्दे पर न्याय के पक्ष में खड़ा रहेगा।’

भारत के परम् मित्र रूस ने दिया मोदी का साथ

परम् मित्र किसे कहते हैं ? इसका उत्तर चाहिए, तो पाकिस्तान को भारत और रूस की ओर देखना चाहिए। रूस भारत का सबसे पुराना और परम् मित्र है और उसने धारा 370 पर पाकिस्तान का साथ न देकर फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह भारत का सच्चा मित्र है। रूसी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में स्पष्ट कर दिया कि भारत ने अपने संविधान के दायरे में रहते हुए जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदला और उसे दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बाँटा। मॉस्को तथ्यों की गहन पड़ताल करने के बाद इस फ़ैसले पर पहुँचा है। रूस ने आशा व्यक्त की कि दिल्ली द्वारा जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलने के कारण भारत और पाकिस्तान क्षेत्र में हालात बिगड़ने नहीं देंगे। रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘रूस भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते सामान्य रखने का लगातार समर्थन किया है। हमें उम्मीद है कि दोनों द्वपक्षीय आधार पर राजनीतिक और राजनयिक प्रयासों से अपने मतभेद सुलझा लेंगे।’

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