Union Budget 2018: जानें बजट की ऐतिहासिक बातें

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Union Budget 2018

वित्त मंत्री अरुण जेटली आज मोदी सरकार के कार्यकाल का पांचवा और आखिरी बजट (Union Budget 2018) पेश कर रहे हैं। अगले साल आम चुनावों को देखते हुए यह बजट काफी लोकलुभावन होने की उम्मीद की जा रही है। बता दें कि 29 जनवरी से शुरु हुआ संसद का बजट सत्र 9 फरवरी तक चलेगा। अर्थव्यवस्था की बात करें तो Economic Survey के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और साल 2018-19 में 7-7.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी।

Important facts of Budget 

आजाद भारत का पहला Union Budget 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री RK षणमुखम चेट्टी ने घोषित किया था।

अभी तक सबसे ज्यादा बार केन्द्रीय बजट घोषित करने का रिकॉर्ड पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के नाम पर है, जिन्होंने कुल 10 बार Union Budget घोषित किया। उनके बाद पी. चिदंबरम (9 बार) और प्रणब मुखर्जी (8 बार) का नाम शामिल है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी देश की इकलौती महिला हैं, जिन्होंने बजट पेश किया। दरअसल साल 1969 में मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय अपने पास रखते हुए बजट पेश किया था।

बजट पेश होने से 10-12 दिन पहले वित्त मंत्रालय में एक हलवा परंपरा का आयोजन किया जाता है, जिसमें मंत्रालय में ही हलवा बनाकर उसे सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच बांटा जाता है। बजट आने से कुछ दिन पहले तक वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का संपर्क बाकी दुनिया से काट दिया जाता है और बजट घोषित होने के बाद ही ये अधिकारी अपने परिवार और रिश्तेदारों से मिल सकते हैं। यह सब बजट की गोपनियता बनाए रखने के उद्देश्य से किया जाता है।

साल 1997-98 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा घोषित किया गया बजट (Union Budget) अभी तक का “Dream Budget” माना जाता है। दरअसल इस बजट में काफी ज्यादा आर्थिक सुधारों को मंजूरी दी गई थी। साथ ही टैक्स की दरों को भी कम करने, कॉरपोरेट टैक्स से सरचार्ज हटाने जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए थे।

साल 1999 तक सभी केन्द्रीय बजट 28 फरवरी को शाम 5 बजे पेश किए गए, लेकिन तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदलते हुए पहली बार बजट शाम के बजाए सुबह 11 बजे पेश किया।

वहीं साल 2016 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक और बदलाव करते हुए बजट (Union Budget) को 28 फरवरी के बजाए 1 फरवरी को पेश करना शुरु कर दिया है।

साल 2016 तक केन्द्रीय बजट और रेलवे बजट अलग अलग पेश किए जाते थे, लेकिन साल 2017 से रेल बजट को केन्द्रीय बजट में ही समाहित कर दिया गया। इस साल भी दोनों बजट (Union Budget) साथ ही पेश किए गए हैं।

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