नागरिकता कानून पर उपद्रव : UP में उपद्रवियों की संपत्ति सील करने में जुटी योगी सरकार

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*सुप्रीम कोर्ट ने दिया था उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई करने का आदेश

*दंगाइयों पर चलाएगी NSA का डंडा

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 22 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। केन्द्र सरकार के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरुद्ध हिंसक विरोध प्रदर्शन के चलते उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। तीन दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया था कि प्रदर्शनकारी जिस निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहे हैं, उसकी भरपाई उपद्रवियों की संपत्ति जब्त करके ही की जाएगी। इस घोषणा के दो दिन बाद शनिवार से ही प्रदेश की पुलिस और प्रशासन एक्शन मोड में आ गये हैं और उपद्रवियों की पहचान करके उनकी संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। अकेले मुजफ्फरनगर में 50 दुकानों को सील किया गया है। वैसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 1 अक्टूबर-2018 को राज्य सरकारों के लिये आदेश जारी किया था कि, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों को ही नुकसान की भरपाई के लिये जिम्मेदार ठहराया जाये। इसी के साथ राज्य सरकार ने उपद्रवियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) का डंडा चलाने की भी तैयारी की है। राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने पर राज्य और केन्द्र सरकार इस कानून का उपयोग करती हैं। इस कानून के तहत उपद्रवियों को 3 महीने कैद की सज़ा हो सकती है।

हिंसा में 18 मौत, 263 पुलिसकर्मी घायल

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार सूबे में हुई हिंसा के दौरान लगभग डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हुई है। 263 पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं, जिनमें से 57 पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हुए हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने दावा किया है कि पुलिस की गोली से किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई है। जो भी मौतें हुई हैं, वह क्रॉस फायरिंग में हुई हैं। पुलिस ने हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से कारतूसों के 405 खोखे बरामद किये हैं। अभी तक पुलिस लगभग 705 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। 405 देशी कट्टे और पिस्तौल भी जब्त किये गये हैं। पुलिस के अनुसार 14 हजार से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की भी पहचान की है, जिनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है।

25 जिलों में इंटरनेट सेवा पर पाबंदी

यूपी सरकार ने हिंसा से निजी और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करने के लिये एक 4 सदस्यीय समिति का गठन किया है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चार टीमें नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। साथ ही संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों की पहचान करके उनकी संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही भी शुरू की है। अकेले मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने उपद्रवियों से जुड़ी 50 दुकानों को सील किया है। गोरखपुर में पुलिस ने उपद्रवियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी करके उनकी पहचान करने वाले लोगों को इनाम देने की घोषणा की है। प्रदेश के 75 में से 25 जिलों में सोमवार दोपहर 12 बजे तक के लिये इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगाई गई है। यह जिले हैं लखनऊ, सीतापुर, अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, गाज़ियाबाद, बरेली, मऊ, संभल, आज़मगढ़, आगरा, कानपुर, चंदौली, वाराणसी, फिरोजाबाद, मथुरा, पीलीभीत, बुलंदशहर, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर, मुरादाबाद और प्रयागराज।

फिरोजाबाद पुलिस भी उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस के कथनानुसार उपद्रवियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पहचान सुनिश्चित हो जाने के बाद उनके विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने का सुप्रीम कोर्ट का है आदेश

प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 1 अक्टूबर-2018 को राज्य सरकारों के लिये एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों को ही नुकसान की भरपाई के लिये उत्तरदायी ठहराया जाये। अदालत ने विभिन्न एजेंसियों से ऐसे लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) के विविध प्रावधानों के तहत सख्त और उचित कार्यवाही करने का भी आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इसलिये भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला प्रशासन की ओर से की जाने वाली उपद्रवियों की संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

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