ये हैं US RETURN ‘श्रीराम’, जिन्होंने पाताल पर ‘चढ़ाई’ से कर दिया चमत्कार

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। एक क्लासिक फिल्म ‘आवारा’ में अभिनेत्री नरगिस पर फिल्माये गये गीत के शब्दों ‘घर आया मेरा परदेशी, प्यास बुझी मेरी अँखियन की’ को राजस्थान के एक इंजीनियर ने साकार कर दिखाया है। अमेरिका से लौटे इंजीनियर श्रीराम वेदिरे ने अपनी इंजीनियरिंग का ऐसा वैज्ञानिक चमत्कार दिखाया है कि सूखे प्रदेश के नाम से बदनाम राजस्थान में बहार आ गई है और यह प्रदेश सभी राज्यों के लिये एक प्रेरणास्रोत बन गया है। आज जल संचय के मामले में राजस्थान को देश का नंबर वन राज्य होने का गौरव प्राप्त हो रहा है, वहीं इसका श्रेय US RETURN श्रीराम वेदिरे को दिया जा रहा है।

कौन हैं श्रीराम वेदिरे ?

श्रीराम वेदिरे अमेरिका रिटर्न सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनकी पत्नी डॉक्टर हैं। श्रीराम वेदिरे 15 वर्ष तक अमेरिका में रहे और वहाँ काम किया। इसके बाद वह 2009 में भारत आकर बस गये। वह पहली बार 2011-12 में राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से मिले थे। उन्होंने पूर्व सीएम के समक्ष राजस्थान में जल संचय पर काम करने की इच्छा जताई। उस समय वसुंधरा राजे सीएम नहीं थी, इसके बावजूद उन्होंने वेदिरे की बात पर तुरंत संज्ञान लिया और माही तथा चंबल नदी के जल संरक्षण की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का काम उन्हें सौंप दिया, जिसका पूरा खर्च वसुंधरा राजे ने स्वयं उठाया।

इसके बाद श्रीराम वेदिरे ने राजस्थान की सूखी धरती को हरा-भरा बनाने और जल संचय योजना पर काम शुरू किया। उनका जुनून देखकर वसुंधरा राजे इतनी प्रभावित हुईं कि जब 2013 में वे राजस्थान की पुनः मुख्यमंत्री बनीं तो उन्होंने वेदिरे को राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिया।

वेदिरे की जिद और जुनून रंग लाये और पाँच साल में उन्होंने राजस्थान को जल संचय के मामले में इतने उच्च स्तर पर पहुँचा दिया कि नीति आयोग ने जल संचय के मामले में राजस्थान को देश का नंबर वन राज्य घोषित किया।

श्रीराम ने कैसे किया चमत्कार ?

राजस्थान में देश की कुल आबादी का 5.66 प्रतिशत भाग निवास करता है। इसी प्रकार देश के कुल भूभाग का 10.4 प्रतिशत भूभाग राजस्थान में हैं, परंतु जब जल स्रोतों की बात आती है तो राजस्थान का हिस्सा मात्र 1 प्रतिशत है। सेलीनिटी और फ्लोराइड की समस्या अलग से है। राज्य के कुल 295 ब्लॉक में से 245 ब्लॉक डार्क ज़ोन घोषित किये जा चुके थे।

इसके बाद राजस्थान में शुरू हुआ वेदिरे का जल संचय अभियान। उन्होंने एनजीओ, सीएसआर तथा सरकारी एजेंसियों के साथ मिल कर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया और मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के अंतर्गत पहले चरण में प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में सभी बावड़ियों का जीर्णोद्धार शुरू किया।

मानसून के दौरान हर साल 60 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य भी आसानी से पूरा किया।

जल स्वावलंबन के दूसरे चरण में सभी गाँवों को फव्वारा और बूँद-बूँद सिंचाई से जोड़ कर राजस्थान को हरा भरा बनाने की मुहिम को आगे बढ़ाया।

बरसाती पानी को सहेजने के लिये उन्होंने प्रदेश के सभी 22 हजार से अधिक गाँवों में साढ़े छह लाख से अधिक जल संरक्षण के काम किये। इससे राजस्थान के गाँवों में टैंकरों से होने वाली पेयजल आपूर्ति आधी रह गई।

परंपरागत जलाशयों का जीर्णोद्धार, बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर्स का दोबारा इस्तेमाल, जल ग्रहण क्षेत्रों का विकास और सघन वृक्षारोपण से राजस्थान की तस्वीर बदल गई। इसमें वेदिरे ने अभियान के दौरान साफ-साफ शब्दों में कह दिया था कि गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होने पर, संबंधित ऑफीसर की जेब से खर्च वसूल किया जाएगा। अभियान के दौरान सभी कामों का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और ऑडिट कराया गया था।

वेदिरे ने अपनी टीम के साथ मिल कर राजस्थान में चार लाख वॉटर हार्वेस्टिंग ढाँचे खड़े कर दिये। 33 जिलों में एक करोड़ से भी अधिक पौधे लगाये।

राज्य के 33 में से 21 जिलों में भूजल स्तर पाँच फुट तक ऊपर आया। सिंचाई का क्षेत्र बढ़ गया। प्रदेश की वॉटर बॉडी से सिंचाई करने का लक्ष्य 81 प्रतिशत पूरा कर लिया गया। नदियों को जोड़ने पर भी सराहनीय काम हुआ। यमुना राजस्थान लिंक कैनाल प्रोजेक्ट और राजस्थान साबरमती लिंक प्रोजेक्ट पर काम हुआ। बावड़ियों का जीर्णोद्धार करने के साथ-साथ वेदिरे ने 191 शहरों में स्थित 2,934 सरकारी कार्यालय, जिनका रूफटॉप एरिया 300 वर्ग गज से अधिक था, वहाँ रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया।

इस मेहनत का वेदिरे को सुखद परिणाम भी मिला और नीति आयोग ने राज्य को जल संचय के मामले में देश का नंबर वन राज्य घोषित किया। वेदिरे का वह सपना साकार हो गया कि दूसरे राज्य राजस्थान को देखने आएँगे और राजस्थान से सीखने आएँगे। अब वही हो रहा है। इस इंजीनियर ने अपनी इंजीनियरिंग से राजस्थान में वैज्ञानिक चमत्कार कर दिया है और सूखे प्रदेश में जल स्तर को पाँच फुट तक ऊँचा लाने की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। उनकी मेहनत से न सिर्फ प्रदेश के सूखे इलाके अब हरे भरे नज़र आ रहे हैं बल्कि प्यासे लोगों और प्यासी धरती की प्यास भी बुझ रही है।

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