इस सैनिक ने पत्नी को फोन करके दी ऐसी सलाह कि वो सन्न रह गई…

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अहमदाबाद, 30 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम) । पूर्वोत्तर में इण्डो-बांग्ला चेकपोस्ट पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान ने अपनी पत्नी को फोन करके ऐसी सलाह दी जिसे सुनकर पत्नी सन्न रह गई । इस बीएसएफ जवान का नाम था रविन्द्र कुमार, जो अब इस दुनिया में नहीं है । दरअसल रविन्द्र कुमार बघेल बीमार थे और उन्हें अंदेशा हो गया था कि अब वह जीवित घर नहीं लौटेंगे । इसलिये रविन्द्र कुमार ने पत्नी को फोन करके कुछ ऐसी बातें कहीं, जिससे पत्नी भी सोच में पड़ गई। इसके बाद कुछ अनहोनी की आशंका से परिवार ने पुत्र से मिलने जाने की तैयारी तो की, परंतु वह बेटे के पास पहुँचते उससे पहले ही बेटे की मृत्यु की सूचना उनके पास आ गई । बेटे की मृत्यु की सूचना मिलते ही इस परिवार पर जैसे वज्राघात हुआ और पूरा परिवार शोक में डूब गया।

बीमार होने के बाद बीएसएफ जवान की मृत्यु

उत्तर प्रदेश के कासगंज के गंजडुंडवारा की ग्राम पंचायत सनौड़ी खास के मजरा नगला गढ़िया गाँव निवासी काली चरण के तीन बेटों में से बड़ा बेटा रविन्द्र कुमार बीएसएफ में क्लर्क के पद पर था । रविन्द्र कुमार इण्डो-बांग्ला चेकपोस्ट के डौकी क्षेत्र में तैनात था । रविन्द्र 22 जून को उप निरीक्षक पद की विभागीय परीक्षा देने के लिये पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में आया था । 23 जून को अचानक रविन्द्र कुमार की तबीयत बिगड़ गई । निमोनिया बुखार के उपचार के लिये क्षेत्राधिकारी सैफुल रहमान ने उसे मेघालय के निगरिम सिविल अस्पताल शिलॉन्ग में भर्ती कराया था, जहाँ उपचार के दौरान 27 जून की देर शाम को रविन्द्र कुमार की मृत्यु हो गई ।
26 जून को जब रविन्द्र कुमार की तबीयत खराब हुई और उसे उपचार के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब ही रविन्द्र कुमार को आभास हो गया था कि अब उनका जीवित घर लौटना असंभव है । इसलिये उसी शाम रविन्द्र कुमार ने घर पर अपनी पत्नी आरती को फोन किया और उससे बात की । बातचीत के दौरान रविन्द्र कुमार ने पत्नी से अपनी इकलौती पुत्री 4 वर्षीय रश्मि के बारे में जो कुछ कहा, उसे सुनकर आरती सन्न रह गई । रविन्द्र कुमार ने आरती से कहा कि वह उसकी प्यारी बेटी रश्मि का पूरा ध्यान रखे, उसे अच्छी शिक्षा दिलाए और उसे बेटे की तरह पाले । रविन्द्र कुमार की यह बात सुनकर आरती को लगा कि कोई तो बात है, जो रविन्द्र छुपा रहे हैं ।

परिवार बेटे से मिलता, उससे पहले ही मिल गई मृत्यु की सूचना

आरती को रविन्द्र कुमार की चिंता सताने लगी और उसने अपने ससुर काली चरण तथा सास उर्मिला से इस बारे में बात की । इसके बाद पूरे परिवार ने तय किया कि वह रविन्द्र कुमार से मिलने के लिये मेघालय जाएँगे । परिवार जाने की तैयारियाँ कर ही रहा था कि दूसरे ही दिन ऐसी खबर आई, जिसे सुनकर परिवार पर वज्राघात हो गया । परिवार के साथ-साथ पूरा गाँव शोक में डूब गया । रविन्द्र तीन भाइयों में सबसे बड़ा था । रविन्द्र के दूसरे नंबर के भाई का नाम अशोक है और सबसे छोटे तीसरे क्रम के भाई चंद्रशेखर ने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है । वह नौकरी की तलाश में है ।

शोक में डूबा परिवार और गाँव, नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई

27 जून की देर शाम रविन्द्र कुमार की मृत्यु हो जाने के बाद अगले दिन सैनिकों की एक टुकड़ी रविन्द्र कुमार का शव लेकर गाँव पहुँची, जहाँ सैनिकों ने रविन्द्र को अंतिम सलामी दी । इस अवसर पर स्थानीय एसडीएम शिवकुमार सिंह, तहसीलदार तिमराज सिंह, उप-तहसीलदार आसिफ अली खान, क्षेत्राधिकारी गवेन्द्रपाल गौतम, थानाधिकारी हरि सिंह वर्मा आदि अधिकारी भी गाँव पहुँचे और रविन्द्र कुमार को अंतिम सलामी देकर विदा किया ।
उल्लेखनीय है कि 2013 में बीएसएफ में भर्ती हुए रविन्द्र कुमार होली के त्यौहार पर छुट्टी लेकर अपने घर आए थे । इसके बाद 23 मार्च को परिजनों से फिर आने का वादा करके ड्यूटी पर लौट गये थे । दरअसल बीमार होने के बाद रविन्द्र कुमार को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था और इसीलिये उन्होंने 26 जून की शाम लगभग 6 बजे अपनी पत्नी से फोन पर अंतिम बार बात की थी ।

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