अगर ये ना होते तो नीलाम हो गई होती 1500 मासूम

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Child trafficking

अंधेरी रातों में, रेड लाइट एरिया में देह व्यापार के धंधे से नाबालिगों को बचाने वाले को अजीत सिंह कहते हैं। विकास के दौर में हमारी संस्कृति और सभ्यता बहुत तेजी से बदल रही है। हम मॉडर्न हो रहे हैं, हमारा समाज ज्यादा प्रोग्रेसिव हो रहा है लेकिन देह व्यापार (Prostitution) की जड़ें आज भी कायम है। देह व्यापार के धंधे में हजारों, लाखों की संख्या में नाबालिग, युवतियां संलिप्त हैं। समाज के इस बदनुमा दाग को दूर करने के लिए वाराणसी के रहने वाले अजीत सिंह अपनी संस्था‘गुड़िया’ के जरिए रेड लाइट एरिया में काम कर रहे हैं। अजीत सिंह की बदौलत एक भी नाबालिग वाराणसी के रेड लाइट एरिया में नहीं है। अजीत सिंह ने अब तक 1500 से ज्यादा लड़कियों को इस गंदे धंधे से मुक्त कराया है। उन्हें बेहतर जिंदगी दी है।

अकेले लड़ रहे हैं Human traficking के 1500 मामले

इस नेक काम के खातिर अजीत सिंह पर कई बार जानलेवा हमले भी हो चुके हैं। लेकिन वे अपने इरादों को लेकर चट्टान की तरह अडिग रहे। अजित सिंह अकेले ह्यूमन ट्रैफिकिंग (Human trafficking) के 1500 से ज्यादा मामले लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 11 PIL दाखिल कर चुके हैं। जिन दलालों की वजह से महिलाएं इस धंधे में फंसती हैं वैसे 500 दलालों को उन्होंने जेल भिजवाया है और कोर्ट से आदेश जारी करवा कर सभी की जमानत रूकवाई। साथ-साथ उन्होंने गवाह बने सभी लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा। आज तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई है जिसमें गवाह देने वालों को किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचा हो। कोर्ट के जरिए अजीत सिंह ने दर्जनों रेड लाइट एरिया से जुड़ी प्रॉपर्टी को सीज कराया है। अजीत सिंह की संस्था “गुड़िया”  पूर्वी उत्तर प्रदेश के करीब 12 जिलों में काम करती है।

खुद की बदौलत बना दिया वाराणसी को Minor free रेड लाइट एरिया

अजीत सिंह 1993 से “गुड़िया” संस्था चला रहे हैं। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए वे बताते हैं कि एकबार मैं वाराणसी के रेड लाइट एरिया में पहुंचा तो पाया कि वहां महिलाएं खुले बाजार में नीलाम हो रही हैं। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। मुझसे यह देखा नहीं गया और मैंने उनकी जिंदगी बदलने का फैसला किया। शुरू में मैंने रेड लाइट एरिया में वहां के बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया। हर दिन दो घंटे बच्चों को पढ़ाता था। यह सिलसिला 5-7 सालों तक चलता रहा। कई सालों तक पढ़ाने के बावजूद उनकी जिंदगी नहीं बदली क्योंकि वे सारा वक्त उसी माहौल  में गुजारते थे। फिर मैंने फैसला किया कि मुझे इस माहौल को बदलना होगा। इसके लिए मैंने कानून की मदद ली। BHU समेत कई कॉलेजों के छात्रों से संपर्क किया और उन्होंने हमारी मदद की। धीरे-धीरे हमें लोगों का भी सपोर्ट मिलने लगा और हम वाराणसी को Minor free रेड लाइट एरिया बनाने में कामयाब हुए। अजीत सिंह की संस्था “गुड़िया” को नेक काम के लिए 2016 में नारी शक्ति अवॉर्ड मिला। इस संस्था को उत्तर प्रदेश सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से भी सम्मानित किया है।

 

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