VIDEO : जीवन का FLOOR छीन लेता है FLUORIDE, देखिए इस गाँव के लोगों की हालत…

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 27 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। मानव शरीर की सुदृढ़ता का मापदंड उसकी अस्थियाँ होती हैं। ये हड्डियाँ ही मानव जीवन का फ्लोर यानी आधारतल हैं, परंतु फ्लोराइड एक ऐसा हानिकारक तत्व है, जो मानव जीवन का आधार अस्थियों को दीमक की तरह चाट जाता है। हमारे देश में कई स्थान ऐसे हैं, जहाँ पेयजल यानी पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा ने लोगों को समय से पूर्व वृद्ध बना दिया है। आज हम आपको झारखंड के एक ऐसे ही गाँव लिए चलते हैं, जहाँ के लोगों को सरकार ने स्वयं कह दिया है कि वे अपना गाँव छोड़ दें, परंतु गाँव वालों की विवशता है कि वे गली हुई हड्डियों के साथ जाएँ भी तो कहाँ जाएँ ?

झारखंड में पलामू जिले के चुकरू गाँव का जीवन फ्लोराइड के कारण नर्क समान बन गया है। गाँव में पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा ने लोगों की शारीरिक रूप से इतना दुर्बल बना दिया है कि वे ठीक से उठ-बैठ नहीं पाते, चलना तो दूर की बात है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लोराइडयुक्त पानी ने चुकरू गाँव के लोगों की हड्डियों और दाँतों को मिट्टी समान जर्जर बना दिया है। कई युवा फ्लोराइड की अधिकता वाला पानी पीने के कारण असामयिक मृत्यु का शिकार बन चुके हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि सरकार भी यह मानती है कि चुकरू गाँव का पानी पीने के लायक नहीं है और इसीलिए यह गाँव रहने के लायक भी नहीं है। इसीलिए सरकार ने ग्रामीणों को अपना गाँव-घर छोड़ देने की सलाह दी है, परंतु स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस कदर विकलांग हो गए हैं कि कहाँ और कैसे रह पाएँगे, यह प्रश्न उन्हें सता रहा है। फ्लोराइडयुक्त पानी के कारण चुकरू गाँव में बड़ी संख्या में लोग विकलांग हो चुके हैं। बच्चों से लेकर युवा और वयोवृद्ध तक सभी हड्डियों और दाँतों के गलने की समस्या से जूझ रहे हैं। कुछ लोगों को तो चलने के लिए लकड़ी का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि उनके पैरों की हड्डियाँ टेढ़ी-मेढ़ी हो चुकी हैं।

क्या-क्यों-कितना ख़तरनाक है फ्लोराइड ?

जल प्रदूषण की कई श्रेणियों में सबसे ख़तरनाक तत्व फ्लोराइड है, जो साधारणत: भूजल में पाया जाता है। फ्लोराइडयुक्त भूमिगत जलस्रोत का पानी पीने से फ्लोरोसिस नामक गंभीर बीमारी होती है। वास्तव में पानी में मिला हुआ फ्लोराइड रीढ़ की हड्डी में जमा होने लगता है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर की हड्डियों को गलाने लगता है। सामान्यत: पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1 या 1.5 पीपीएम से अधिक होने पर व्यक्ति फ्लोरोसिस की बीमारी से पीड़ित हो जाता है। ऐसा नहीं है कि हमारे देश के कुछ हिस्सों में ही फ्लोराइडयुक्त पानी की समस्या है। यह समस्या बड़े-बड़े महानगरों में भी देखी जाती है। जिन व्यक्तियों के दाँतों पर हल्की गहरी आड़ी धारियाँ और धब्बे पड़े हुए हैं, वे व्यक्ति फ्लोराइडयुक्त पानी ही पी रहे हैं। ऐसे लोगों को अपने घर में फ्लोराइडयुक्त पानी से बचाव के उपाय करने चाहिए।

देखिए झारखंड में पलामू जिले के चुकरू गाँव के लोगों की दुर्दशा :

You may have missed