VIDEO : हेलमेट पहना होता तो जानलेवा नहीं होता हादसा : जागरूकता के लिये तेरहवीं में बाँटे हेलमेट

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। यूँ तो शास्त्रों में मृतक की आत्मा की शाँति के लिये तेरहवें दिन ब्रह्मभोज कराने का उल्लेख है और ब्राह्मणों को घट दान करने का भी विशेष महत्व है। भोज करने वाले ब्राह्मणों को घट में घरेलू उपयोग में आ सके, ऐसा बर्तन और वस्त्रादि दान किया जाता है। सामान्यतः भारतीय समाज में इस प्रथा का अनुकरण भी किया जाता है, परंतु कुछ परिवारों ने प्राणघातक हादसों से सबक लेकर अन्य लोगों में भी जागरूकता लाने के लिये कुछ ऐसी अनुकरणीय पहल की हैं, जो सराहनीय हैं।

देश में हर साल सड़क हादसों में होती हैं 1.5 लाख मौतें

लोकसभा में सरकार की ओर से दी जानकारी पर गौर करें तो सरकारी आँकड़ों के अनुसार देश में हर साल सड़क हादसों के कारण लगभग 1.5 लाख लोग अपनी जान गँवाते हैं। औसत देखें तो हर एक घण्टे में लगभग 53 हादसे होते हैं और इनमें लगभग 17 लोगों की जान जाती है। सड़क हादसों के लिहाज से उत्तर प्रदेश की सड़कें सबसे अधिक जानलेवा साबित होती हैं। इसके बाद क्रमशः तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और हरियाणा की सड़कें सड़क हादसों के लिहाज से संवेदनशील हैं। इनके बाद क्रमशः ओडिशा, पंजाब, छत्तीसगढ़, केरल, झारखंड, असम, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गोवा और पुड्डुचेरी का नाम आता है।

टू-व्हीलर्स से हो रही 50 प्रतिशत से अधिक मौतें

देश में सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें भी टू-व्हीलर राइडर्स की मृत्यु का आँकड़ा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साउथ ईस्ट एशियन रीज़न के एडवाइज़र पतंजलि देव नायर के अनुसार भारत में सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में से 50 प्रतिशत से भी अधिक मौतें टू-व्हीलर्स राइडर्स की हो रही हैं। वैसे तो इन मौतों के कई कारण हो सकते हैं, परंतु एक सबसे महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि लोग अच्छी क्वालिटी के हेलमेट नहीं पहनते हैं। बाइक पर दो से अधिक सवारियाँ बैठाते हैं और तेज रफ्तार से बाइकें दौड़ाते हैं। सड़क हादसों की जो अन्य वजहें हैं उनमें साड़ी या दुपट्टे का फँसना, बाइक स्लिप हो जाना, नशे की हालत में गाड़ी चलाना, हाई-वे पर तीव्र गति से वाहन हाँकना, सड़कों पर मौजूद गड्ढे और स्पीड ब्रेकर आदि के कारण भी हादसे होते हैं। इनके अलावा हिट एण्ड रन भी हादसों का एक कारण बन गया है।

हेलमेट लगाने से मृत्यु की संभावना 70 प्रतिशत तक घटती है

डब्ल्यूएचओ के अनुसार हेलमेट लगाने से हादसों में मृत्यु की संभावना 70 प्रतिशत तक घट जाती है। आईएसआई हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक बाजार में उपलब्ध हेलमेट में से 50 प्रतिशत हेलमेट आईएसआई मार्क वाले नहीं हैं। एसोसिएशन ने नॉन आईएसआई हेलमेट बैन करने की सरकार से माँग भी की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कपूर के अनुसार मोटर व्हीकल एक्ट में भी लिखा गया है कि आपको आईएसआई मार्क वाला हेलमेट ही पहनना है। लड़कियों और बच्चों के लिये भी हेलमेट उपलब्ध हैं। सरकार को चाहिये कि नॉन आईएसआई हेलमेट पहनने को कानूनी अपराध घोषित करे, ताकि हर साल जो डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों में जान गँवा रहे हैं, उनकी संख्या घटकर आधी से भी कम हो जाए।

इन परिवारों ने परिजन की मृत्यु पर बाँटे हेलमेट

पुणे के बारामती स्थित करवागंज गाँव की एक 47 वर्षीय महिला की 10 फरवरी को सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। यह महिला बिना हेलमेट पहने स्कूटी चला रही थी। महिला की तेरहवीं पर उसके जेठ, जो हाई-वे पुलिस में बतौर दरोगा तैनात है, उसने अपनी बहू की तेरहवीं पर 70 लोगों को हेलमेट बाँटकर लोगों को हेलमेट पहनने का संदेश दिया। हनुमंत बनकर के अनुसार उसका छोटा भाई अपनी पत्नी पूनम के साथ बाइक पर जा रहा था, तब यह हादसा हुआ था। दोनों ने ही हेलमेट नहीं पहना था, इसलिये दोनों गंभीर रूप से घायल हो गये, जिसमें पूनम की मौत हो गई और हनुमंत का भाई भी बाल-बाल बच गया है। इस हादसे पंद्रह दिन पहले ही हनुमंत का 22 साल का भतीजा भी सड़क हादसे में घायल हुआ था, उसे भी सिर में गंभीर चोटें आई थी। उसने भी हेलमेट नहीं पहना था। इन दो हादसों से पूरा परिवार सदमे में था।

मध्य प्रदेश के सतना शहर के टिकुरिया टोला में रहने वाले 49 वर्षीय राजेन्द्र गुप्ता की सड़क हादसे में मृत्यु के बाद उनके परिवारजनों ने भी लोगों में हेलमेट पहनने की जागरूकता लाने के लिये हेलमेट बाँटे थे। राजेन्द्र गुप्ता ने भी हेलमेट नहीं पहना था, जिसकी वजह से हादसे में सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मृत्यु हो गई। गुप्ता परिवार ने तेरहवीं के दिन ब्राह्मणों को केवल 35 हेलमेट बाँटे और कुछ नहीं दिया। गुप्ता परिवार का कहना है कि अगर राजेन्द्र गुप्ता ने हेलमेट पहना होता तो हादसा उनके लिये जानलेवा साबित नहीं होता और आज वह हमारे बीच होते। ऐसा किसी और के साथ न हो, इसलिये हमने लोगों को हेलमेट बाँटे हैं।

आप भी देखिये शोक संतप्त परिवार का अनुकरणीय कार्य…

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