जानिये क्या है WATER BELL, जो बच्चों में कर रही है क्रांति ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। विश्व स्वास्थ्य संगठन WORLD HEALTH ORGANIZATION (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के शरीर में पानी की कमी, पीने के लिये स्वच्छ पानी का उपलब्ध न होना, दूषित पानी पीने और पीने के पानी में रासायनिक प्रदूषण के मिश्रण से स्वास्थ्य पर बहुत गहरा असर पड़ता है। इतना ही नहीं, पानी की कमी से विशेष कर बच्चों में डिहाईड्रेशन (DEHYDRATION) और डायरिया के अलावा गठिया (ARTHRITIS) और एक्ज़िमा (ECZEMA) जैसे रोग उत्पन्न होते हैं। बच्चों के लिये डायरिया और डिहाईड्रेशन जैसे रोग जान लेवा भी सिद्ध होते हैं। हालाँकि अब भारत में स्कूलों ने बच्चों को पानी की कमी से होने वाले रोगों से सुरक्षा प्रदान करने के लिये एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसकी शुरुआत तो दक्षिण भारतीय राज्य केरल (KERALA) से हुई, परंतु इस अनूठी पहल को सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA) के माध्यम से पूरे देश में प्रसिद्धि मिली, जिसके परिणाम स्वरूप अब यह पहल देश के अन्य राज्यों में भी तेजी से अमल में लाई जा रही है। इनमें कर्नाटक (KARNATAKA), तेलंगाना (TELANGANA), ओडिशा (ODISHA), छत्तीसगढ़ (CHHATTISGARH) आदि शामिल हैं।

क्या है WATER BELL की अनूठी पहल ?

दरअसल केरल के कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को समय-समय पर पानी पीने की आदत डालने के लिये WATER BELL की अनूठी प्रथा शुरू की गई है। इस प्रथा के तहत पानी पीने का समय होने पर स्कूल में घंटी (BELL) बजाई जाती है, जिसे WATER BELL का नाम दिया गया है। इसके अलावा इस प्रथा को WATER BREAK भी कहा जाता है। यह ब्रेक 15 से 20 मिनट का होता है और तीन बार यह ब्रेक दिया जाता है। पहली बार सुबह 10.30 बजे, दूसरी बार दोपहर 12.30 बजे और तीसरी बार दोपहर 2.30 बजे या कुछ स्कूलों में 3.30 बजे। इस WATER BREAK के दौरान सभी बच्चे एक स्थान पर इकट्ठा होते हैं और अपने वॉटर बेग (WATER BAG) से अथवा स्कूल की ठंडे पानी की मशीन से पानी लेकर पीते हैं। इसमें शिक्षक और शिक्षिकाएँ भी बच्चों के साथ मिल कर पानी पीते हैं। जिसको जितनी प्यास लगी होती है, उतना ही पानी पीते हैं, परंतु यह प्रथा शुरू करने का उद्देश्य यह है कि बच्चों में बार-बार पानी पीने की आदत पड़े, ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न रहे। इस दौरान बच्चों को बार-बार पानी पीने के लाभ भी बताये जाते हैं कि पानी पीने से शरीर का तरल संतुलित रहता है। माँसपेशियाँ मजबूत रहती हैं। त्वचा में चमक रहती है। पाचन ठीक रहता है और कब्ज दूर होती है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। पानी खून में मिलकर पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाता है। पानी से रक्त में जमा होने वाले विषैले पदार्थ मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। इससे शरीर में रोग नहीं होते हैं। शरीर में स्फूर्ति रहती है, जिससे पढ़ाई में मन लगता है और चिड़चिड़ापन नहीं होता है। यह भी ध्यान रखा जाता है कि बच्चे पानी पीने के लिये प्लास्टिक की बोतल आदि का उपयोग न करें। सभी बच्चे अपनी पानी की बोतल से अथवा स्टील के गिलास से पानी पीते हैं। पानी पीने में विशेष कर लड़कियाँ काफी लापरवाह होती हैं, अथवा पानी कम पीती हैं। इसका एक प्रमुख कारण स्कूलों के शौचालयों में स्वच्छता की कमी भी है। शौचालय स्वच्छ नहीं होने से लड़कियाँ बार-बार शौचालय न जाना पड़े, इसलिये पानी कम पीती हैं, जिसके कारण उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है। शरीर में पानी की कमी हो जाने से उन्हें कई प्रकार की बीमारियाँ होने का खतरा भी रहता है।

अन्य राज्यों के लिये केरल बना प्रेरणा स्रोत

केरल के सरकारी स्कूलों में शुरू की गई यह पहल अब देश के कई राज्यों तक पहुँच चुकी है। सोशल मीडिया पर केरल के स्कूलों की यह पहल प्रचारित होने के बाद पड़ोसी राज्य कर्नाटक के सरकारी स्कूलों ने भी WATER BELL की शुरुआत की है। दक्षिण कन्नड़ के उप्पिनान्गाद्य में इंद्रप्रस्थ स्कूल ने केरल के सरकारी स्कूलों से प्रेरणा लेकर WATER BELL की शुरुआत की है। इस स्कूल के शिक्षकों के अनुसार इस पहल के बाद बच्चों की सेहत में सुधार भी देखने को मिल रहा है। कर्नाटक के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने इस बारे में प्रशासन को आवश्यक निर्देश भी दिये हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के गढ़कटरा गाँव के सरकारी स्कूल में भी यह पहल की गई है।

तेलंगाना में तो सरकार ने WATER BELL नाम से कार्यक्रम ही शुरू कर दिया है। ताकि स्कूली बच्चे पर्याप्त मात्रा में पानी पियें और स्वस्थ रहें। इस कार्यक्रम के तहत स्वयं शिक्षक बच्चों को पानी पिलाते हुए नज़र आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में टाइनी टाट्स स्कूल में भी बच्चों को समय-समय पर पानी पिलाने के लिये WATER BELL की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों का मानना है कि स्कूली टाइम के दौरान बच्चे पानी पीने में लापरवाही बरतते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसलिये इस कार्यक्रम से बच्चों के स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ रहा है और अभिभावक भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

ओडिशा के गंजाम जिले के सभी स्कूलों में भी WATER BELL कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिले के सभी स्कूल प्रशासनों तथा आँगनवाड़ी केन्द्रों को भी निर्देशित किया गया है कि बच्चों को समय-समय पर पानी पिलाना न भूलें।

उत्तराखंड के हल्द्वानी जिले में भी स्कूलों में नियम लागू किया गया है कि सभी बच्चे कम से कम दो बार अपनी पानी की बोतल खाली करके ही घर जाएँगे। अभी ठंडी के मौसम में प्यास जल्दी नहीं लगती है, इसलिये बच्चे पर्याप्त पानी नहीं पी रहे हैं, परंतु इससे उनके शरीर पर बुरा असर पड़ता है। इसलिये स्कूल पीरियड के दौरान फिलहाल कम से कम दो बार पानी पिलाने की व्यवस्था की गई है। यह नियम सभी कक्षाओं में लागू किया जा रहा है।

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