एक शादी, 500 मेहमान, 2,000 लीटर पानी, आँसू ला देगी आगे की कहानी : तृप्त लोग न करें ‘अपराध’, तो बुझ सकती है 100 करोड़ लोगों की प्यास : जानिए क्या है इस ख़बर का मार्मिक और संवेदनशील पहलू ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

वर्तमान आधुनिक विश्व में हर व्यक्ति प्रकृति से उसका सब कुछ ले तो लेना चाहता है, परंतु उसे लौटाने को तैयार नहीं है। असीमित दोहन से प्रकृति खोखली होती जा रही है और पूरी दुनिया अनेक प्रकार के प्राकृतिक प्रकोपों से दो-चार हो रही है। चंद लोगों की सनक विश्व में बसने वाले सभी आम लोगों के वर्तमान जीवन और भावी पीढ़ी के भविष्य को अंधकारमय बना रही है। ऐसा अंधकार, जहाँ न खाने को भोजन मिलेगा, न पीने को पानी। इतना ही नहीं, जीवन का आधार साँस लेने के लिए हवा के भी लाले पड़ जाएँगे।

अब आते हैं शीर्षक पर। वर्तमान विश्व तेजी से आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहा है और अनेक ऊँचाइयाँ हासिल कर रहा है। इस कारण मानव जीवन आसान हुआ है। लोगों की जीवनशैली में सुधार आया है। इसका फ़ायदा ग़रीबों को भी मिला है, जो धीरे-धीरे अमीर होते जा रहे हैं, परंतु जो पहले से ही अमीर हैं, वे और भी अधिक अमीर हो रहे हैं। धनवानों ने धन के अतिरेक में आधुनिक विश्व में कई अच्छे काम किए होंगे, परंतु साथ ही अनेक आडंबरों को भी हवा दी है और आश्चर्य की बात यह है कि इस आडंबर की देखादेखी की होड़ लगी है और इस होड़ में हजारों ग़रीब भी शामिल हो गए हैं, जो स्वयं को बताते तो ग़रीब हैं, परंतु बात जहाँ विवेक से धन की बचत की आती है, तब देखादेखी के आगे उनका विवेक हार जाता है। इसी की उपज है भव्य विवाह समारोहों का प्रचलन।

यह उदाहरण बता देगा आपका ‘अपराध’ !

सामान्यत: एक विवाह समारोह में एक युवक और एक युवती का विवाह होता है। एक फ़ौरी अनुमान लगाएँ, तो सामान्यत: किसी विवाह समारोह में औसत 500 मेहमान आते हैं, जिनके लिए निमंत्रक की ओर से भोजन-पानी की व्यवस्था की जाती है। विवाह पहले भी होते थे और भोजन-पानी की व्यवस्था पहले भी होती थी, परंतु आज के ज़माने में आयोजक-निमंत्रक या यूँ कहें कि वर या वधु के माता-पिता अपनी संतान के विवाह समारोह को भव्य बनाने में कोई की नहीं छोड़ते और आडंबर पर लाखों रुपया खर्च कर देते हैं। इसीलिए भोजन जहाँ खड़े होकर खाना होता है, वहीं पानी की व्यवस्था में सामान्यत: 200 मिलीलीटर पानी भरी बोतलें मंगवा ली जाती हैं। अब अनुमान के हिसाब से गणना करें, तो 500 अतिथियों के लिए कम से कम 200 मिली पानी की 1000 बोतलें मंगवाई गई हों, तो मतलब साफ है कि 500 लोगों के लिए कुल 2,000 लीटर पानी की व्यवस्था की गई। यहाँ तक भी ठीक था, परंतु दृश्य जब यह देखने को मिलता है कि लोग पानी पीने के लिए 200 मिली की बोतल तो लेते हैं, परंतु पूरा पानी नहीं पीते और बचे हुए पानी से भरी बोतल जाती है कूड़े के ढेर में। इस पर से आप अनुमान लगा सकते हैं कि कम से कम 500 लीटर पानी का अपव्यय हो जाता है और यही एक गंभीर अपराध बन जाता है।

भारत में 100 करोड़ लोगों को नहीं मिलता शुद्ध पेयजल

जो लोग पूरा पानी पिए बिना बोतल डस्टबीन में डाल देते हैं, वे लोग उन 100 करोड़ भारतीयों के लिए स्वतः अपराधी बन जाते हैं, जिन्हें पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलता। ऐसा हम नहीं कह रहे, WATER ADS नामक एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट कह रही है। गत 22 मार्च को विश्व जल दिवस पर जारी इस रिपोर्ट के अनुसार इस समय विश्व में 400 करोड़ लोगों को पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है, जिसमें 25 प्रतिशत यानी 100 करोड़ भारतीय हैं। रिपोर्ट भारत को चेतावनी देती है कि यदि भूजल दोहन नहीं रुका, तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ेगा। देश के 75 प्रतिशत घरों में पीने के साफ पानी की पहुँच नहीं है। रिपोर्ट से इतर देखें, तो कुछ आँकड़े भी हमारी पानी के प्रति लापरवाही को दर्शाते हैं। जैसे कि भारत में वाहनों को धोन में रोज़ करोड़ों लीटर पानी खर्च होता है। महानगरों में पाइप लाइनों के वॉल्व की ख़राबी के कारण रोजाना 17 से 44 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है। दूसरी तरफ भारत में महिलाएँ पानी के लिए हररोज़ औसत 6 किलोमीटर का सफर करती हैं।

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