क्या आप भी आय से अधिक खर्च से परेशान हैं ? तो जानिए इसके कारण और निवारण

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अहमदाबाद, 11 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। यदि आप भी अपनी आय से अधिक हो रहे खर्च से परेशान हैं, तो इसके कारणों का पता लगा कर अपनी समस्या का निवारण खुद ही कर सकते हैं। इसके लिये आवश्यक है कि आप अपनी आय के अनुसार घर का बजट तैयार करें और जिन छोटे-छोटे खर्चों का हिसाब रखना मुश्किल होता है, उनमें कटौती करके अपने बजट को बैलेंस करें। सबसे पहले हमें आय की तुलना में हो रहे अधिक खर्च के कारणों की पड़ताल करनी चाहिये।

आय से अधिक खर्च के यह हैं कारण

आय से अधिक खर्च का एक प्रमुख कारण है आधुनिकता का अंधानुकरण। हम एक दूसरे की देखा-देखी कुछ ऐसे खर्च कर बैठते हैं, जो हमारे बजट को गड़बड़ा देते हैं। इन्हीं में से कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।

  • सामान्यतः परिवार में एक या दो व्यक्ति कमाते हैं, जबकि परिवार का प्रत्येक स्मार्टफोन रखने लगा है।
  • एक-दूसरे की देखादेखी के कारण सामाजिक दबाव में छुट्टियों के दौरान घूमने जाने के अनावश्यक आयोजन करने से भी आय प्रभावित होती है।
  • आजकल कार खरीदना परिवारों के लिये स्टेटस सिम्बोल बन गया है।
  • आय से अधिक खर्च होने का एक प्रमुख कारण यह भी सामने आया है कि लोग अपनी जेब पर ध्यान देने के बजाय घर का बना सात्विक और पौष्टिक भोजन छोड़कर वीकेंड में होटल-रेस्टोरेंट में खाने के अनावश्यक शौक पाल रहे हैं। जो जेब पर तो भारी पड़ता ही है, स्वास्थ्य के लिये भी हानिकारक है।
  • इसके अलावा लोग सलून, पार्लर और कपड़ों के मामले में ब्राण्ड कॉन्सियस हो गये हैं।
  • समय की अनुपालना करके घर पर प्रति दिन परिवार के साथ सामूहिक भोजन करने और समय बिताने के बजाय लोग जन्म दिन और सालगिरह की पार्टियों का आयोजन करके अपने हाथों से अनावश्यक खर्च करते हैं और बाद में यही आयोजन कलह के कारण बनते हैं।
  • भव्य शादी समारोह और पारिवारिक उत्सव भी आय से अधिक खर्च कराने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
  • शिक्षा के व्यवसायीकरण ने निजी स्कूलों के साथ-साथ ट्यूशन क्लासिस को लोगों के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है। लोग यह समझने की बजाय कि उनके बच्चे को ट्यूशन की आवश्यकता है भी या नहीं, सिर्फ सामाजिक रौब के लिये अपने बच्चे को प्रतिष्ठित स्कूल और ट्यूशन क्लासिस में भेजकर चादर से बाहर पाँव फैलाते हैं।
  • जो पैसा कमाया नहीं है, उसे भी सोचे समझे बिना खर्च कर डालते हैं। लोन लेकर या क्रेडिट कार्ड से अनर्गल वस्तुएँ खरीदने के बाद जब उस पैसे की भरपाई करने का समय आता है तो सिर पीटने लगते हैं।
  • इतना ही नहीं, लोगों की नासमझी और आधुनिक जीवन शैली ने लोगों के कंधों पर अस्पतालों के खर्च का भार भी लाद दिया है।

यह सभी कारण लोगों की आय पर भार लाद रहे हैं। एक तरफ आय बढ़ने की गति धीमी है, वहीं दूसरी ओर खर्च की गति तेज होने के परिणाम स्वरूप आर्थिक संकट बढ़ता है और जीवन की शांति काफूर हो जाती है, शांति नदारद होने से व्यक्ति तनाव का शिकार हो जाता है और खान-पान का नियमन गड़बड़ाने से शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ घेर लेती हैं।

आय से अधिक होने वाले खर्च का निवारण कैसे करें ?

चाणक्य के कथनानुसार आय से अधिक खर्च मुसीबतों का कारण होता है। इसलिये आपको चाहिये कि घर के बजट के मिल-बैठकर सुनिश्चित करें और अनर्गल खर्चों में कटौती करके बचत करना शुरू करें। इतना ही नहीं, बचत को निवेश करके उसे भी आय का साधन बना सकते हैं। इस प्रकार के आयोजन न सिर्फ आपके खर्च घटाएँगे, अपितु आपकी आय के स्रोत भी बढ़ेंगे, जो आपके पारिवारिक जीवन को खुशियों से भर सकते हैं।

  • ऊपर आय से अधिक खर्च के जो कारण बताये गये हैं, उनमें से कई खर्चों पर आसानी से कैंची चलाई जा सकती है।
  • यदि परिवार के प्रत्येक सदस्य के पास स्मार्टफोन है तो उनकी संख्या घटाई जा सकती है। इससे इंटरनेट रिचार्ज आदि के खर्च में कटौती होने से बचत होगी। छुट्टियों के दिनों में घूमने-फिरने के लिये दूरस्थ स्थलों का चुनाव करने के स्थान पर नजदीकी स्थलों का चुनाव करके खर्च घटाया जा सकता है। वीकेंड में होटल-रेस्टोरेंट में खाने की बजाय घर पर रह कर सामूहिक रूप से भोजन पकाने और खाने से बचत के साथ-साथ यह सेहत के लिये भी लाभदायी होगा।
  • कार आदि वाहनों की खरीदी को स्टेटस सिम्बोल न बनाएँ और जरूरत के अनुसार वाहन खरीदें। संभव हो तो सलून और पार्लर तथा कपड़ों के मामलों में ब्राण्ड कॉन्सियस न बनें और अपनी आय के अनुसार विकल्प चुनें।
  • परिवार के साथ अधिक से अधिक समय बिताने का प्रयास करें, इससे आपका अकेलापन दूर होगा और लोगों को जुटाने के लिये जन्म दिन और सालगिरह जैसे व्यर्थ के खर्च करने से बच पाएँगे। शादी समारोह तथा अन्य पारिवारिक उत्सव भव्य बनाने का आग्रह न रख कर सीमित खर्च में काम चलाएँ। बच्चों की शिक्षा को स्टेटस सिम्बोल न बनाएँ और उन्हें महंगे स्कूलों तथा कोचिंग क्लासिस की होड़ का हिस्सा न बनाएँ। अपने बजट के अनुसार स्कूल व आवश्यकता हो तो ही बच्चों को कोचिंग दिलाएँ। समय पर फीस, बीमा प्रीमियम व अन्य बिल की भरपाई करके व्यर्थ की पेनल्टी भरने से बचें। अपनी खरीदारी की आदतों पर लगाम लगाएँ।
  • संभव हो तो लोन लेने से बचें और क्रेडिट कार्ड का सोच-समझकर उपयोग करें। इस प्रकार के आयोजनों से आप अपनी आय का सही उपयोग कर पाएंगे और आपका बजट गड़बड़ाने से परिवार में कलह भी नहीं होगी। जीवन में शांति का पुनरागमन होगा, जो आपके जीवन को फिर से खुशहाल बना देगी।
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