पूरा देश परेशान इस मेहमान से : जानिए कौन है वो और कब जाएगा ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। देश के इस मेहमान ने पहले आने में देरी करके लोगों को चिंता में डाला और अब ये मेहमान जाने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि जाने से पहले इसने लोगों को परेशानी में डाल दिया है। आप सोच रहे होंगे, हम किस मेहमान की बात कर रहे हैं ? तो आपको बता दें कि ये मेहमान है दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून, जिसका इंतज़ार पूरा देश 1 जून से ही करने लगता है, परंतु तब इसने दस्तक देने में देर लगाई और लोगों से खूब इंतज़ार करवाया। अब फिर वो लोगों से इंतज़ार करवा रहा है। लोग उससे पूछ रहे हैं कि ‘अतिथि तुम कब जाओगे ?’

अभी विदा नहीं होने वाला मॉनसून !

अक्टूबर का महीना शुरू हो चुका है। अभी तक मॉनसून को लौट जाना चाहिये था, परंतु वह लौटने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि उसने लोगों की नाक में दम कर रखा है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्यतः 1 सितंबर से ही पश्चिमी राजस्थान से लौटना शुरू कर देता है और 1 अक्टूबर तक यह देश के आधे हिस्से को छोड़ चुका होता है। अक्टूबर के अंत तक यह देश छोड़ चुका होता है। इस बार जाने से पहले यह लोगों को न सिर्फ सता रहा है, बल्कि रुला रहा है। मौसम विभाग का भी कहना है कि आने के बाद अब जाने के मामले में भी मॉनसून बहुत देरी कर रहा है। ये कब लौटना शुरू करेगा, इसका अनुमान मौसम विभाग भी नहीं लगा पा रहा है। उसका कहना है कि 2 अक्टूबर के बाद ही वह अनुमान लगा पाएगा कि मॉनसून जाते-जाते भी इतना भयंकर रूप धारण क्यों कर रहा है ? क्यों उसने बिहार को पानी में डुबो दिया है। अभी वह पुणे में बेमौसम की भयावह बारिश से तबाही मचा रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी सभी नदियाँ उफान पर हैं। कब तक लोगों को ऐसी भयावह बारिश से और जूझना पड़ेगा ? क्योंकि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर-पूर्वी राज्य, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा अभी भी जाते हुए मॉनसूनी बादलों से घिरे हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार अभी भी समूचे उत्तर-पश्चिम भारत पर मॉनसून सक्रिय है, जबकि अभी तक इसे इस इलाके को छोड़ कर दक्षिण भारत की तरफ आगे बढ़ जाना चाहिये था। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मॉनसून अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक देश छोड़ सकता है।

4 अक्टूबर तक 33 प्रतिशत भागों में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने मॉनसून का मिजाज देखते हुए चेतावनी जारी की है कि अगले 4 अक्टूबर तक देश के 33 प्रतिशत भागों में भारी बारिश हो सकती है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मुंबई, पुड्डूचेरी, कराइकल, कर्नाटक और केरल शामिल हैं।

मॉनसून के जाने में देरी के 3 कारण हैं

मौसम विभाग की मानें तो जाते हुए मॉनसून में देरी के तीन बड़े कारण हैं। पहला कारण है गुजरात के सौराष्ट्र और उससे जुड़े उत्तर-पूर्वी अरब सागर के पास बना निचला दबाव, जिसके कारण यहाँ एक चक्रवात-सा बना हुआ है। दूसरा कारण है चक्रवाती दबाव दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर भी बना हुआ है और तीसरा कारण है बंगाल की खाड़ी के उत्तरी भाग में निचले दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इन्हीं कारणों से पूरे देश में मॉनसूनी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है।

सामान्य से 10 प्रतिशत ज्यादा हुई बारिश

देश में जब से इस साल मॉनसून सक्रिय हुआ है, तब से लेकर अभी तक पूरे देश में सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। इसका प्रभाव ये है कि अब देश में पानी की कमी नहीं है, हालांकि यदि मॉनसून ज्यादा समय तक रुकता है तो सर्दी का मौसम समय से पहले आ जाएगा। इस प्रकार ठंडी का मौसम भी फिर ज्यादा समय तक रहेगा। यदि 10 प्रतिशत से अधिक बारिश होती है तो मौसम विभाग की भाषा में इसे ज्यादा बारिश का दर्जा दिया जाता है।

  • पूर्वी-उत्तर पूर्वी भारत में सामान्य बारिश 1,410.4 मि.मी. होती है, इस बार अभी तक 1,240.7 मि.मी. बारिश हो चुकी है। इस प्रकार इस भाग में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
  • उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य बारिश 599.5 मि.मी. बारिश होती है, जिसकी तुलना में इस वर्ष अभी तक 586.0 मि.मी. बारिश हो चुकी है। यहाँ मात्र 2 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
  • मध्य भारत में 976.6 मि.मी. सामान्य बारिश होती है। इस वर्ष मध्य भारत में अभी तक 1,262.8 मि.मी. बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक है।
  • इसी प्रकार दक्षिण भारत में 726.2 मि.मी. सामान्य बारिश होती है। इस वर्ष यहाँ 840.9 मि.मी. बारिश हो चुकी है। इस प्रकार दक्षिण भारत में भी 16 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है।

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में उफनती नदियों और घरों में घुसे पानी से जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित है। इसे देखते हुए आम लोगों की भावना है कि अब मॉनसून को विदा हो जाना चाहिये।

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