और इस तरह अमित शाह ने वामपंथियों के गढ़ में राहुल की ‘घुसपैठ’ के विरुद्ध भाजपा की पैठ बनाने के लिए साधे कई निशान

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देश का सबसे शिक्षित राज्य केरल वर्षों से वामपंथी पार्टियों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI यानी भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM यानी माकपा) का गढ़ रहा है। 1 नवम्बर, 1956 को स्थापित केरल में पहली सरकार 5 अप्रैल, 1957 को भाकपा के नेतृत्व में बनी। इसके बाद लगभग समय-समय पर भाकपा या माकपा के नेता यहाँ के मुख्यमंत्री रहे। बीच-बीच में कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों ने सत्ता संभाली, लेकिन ज्यादातर वामपंथियों का ही शासन रहा और वर्तमान में भी माकपा के पी. विजयन मुख्यमंत्री हैं।

वामंथियों में नाराजगी, पूर्व CM ने फिर राहुल को ‘अमूल बैबी’ कहा !

दिल्ली में बैठ कर वामपंथी नेता सीताराम येचुरी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मिल कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं, परंतु केरल में कांग्रेस की सीधी लड़ाई वामपंथियों से ही रही है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ने की घोषणा वामपंथियों को रास नहीं आ रही। पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता वीएस अच्युतानंद ने तो फेसबुक पर एक पोस्ट भी लिखा, ‘कांग्रेस का कहना है कि भाजपा उनकी सबसे बड़ी दुश्मन है, परंतु अब क्या होगा ? वो (राहुल गांधी) हमारे और भाजपा दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। मैंने राहुल को पहले भी ‘अमूल बैबी’ कहा है और एक बार फिर कह रहा हूँ, क्योंकि वे बिना सोचे-समझे कोई फैसला कर लेते हैं। हमारी पार्टी अब राहुल और भाजपा दोनों के विरुद्ध लड़ेगी।’

कांग्रेस के प्रति येचुरी के नरम रुख से वामपंथी धड़े में येचुरी का विरोध हो रहा है। अमेठी में हार का अंदेशा देख राहुल ने वायनाड का रुख तो कर लिया, परंतु उनके सामने पहली चुनौती स्थानीय वामपंथी पार्टियों के असंतोष से निपटने की है। अभी वे इस चुनौती से उबर पाते, उससे पहले तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल की घेराबंदी का ऐलान कर दिया।

भाजपा ने चला एझावा कार्ड

अमित शाह ने वायनाड से भाजपा के सहयोगी संगठन भारत धर्म जन सेना (BDJS) के नेता तुषार वेल्लापल्ली को एनडीए (NDA) उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी। तुषार केरल में 78,54,000 के करीब आबादी रखने वाले एझावा (Ezhava) समुदाय से आते हैं। बीजेडीएस की स्थापना एक सामाजिक संगठन के रूप में तुषार के पिता वेल्लापल्ली नतसेन ने की थी, जिसका उद्देश्य एझावा समुदाय का विकास करना है। समुदाय के हितों के लिए वेल्लापल्ली नतसेन ने 2015 में बीडीजेएस को राजनीतिक पार्टी बना दिया और पुत्र तुषार को अध्यक्ष बना दिया। केरल की कुल आबादी में 22 प्रतिशत से अधिक एझावा समुदाय के लोग हैं।

अमित शाह ने साधे कई निशान

अमित शाह ने वायनाड में राहुल गांधी के विरुद्ध तुषार को उतार कर कई निशान साधे हैं। स्थानीय वामपंथी नेता पहले से ही राहुल की केरल में ‘घुसपैठ’ से खुश नहीं हैं, तो दूसरी तरफ अमित शाह ने तुषार के जरिए वायनाड सहित पूरे केरल में भाजपा की पैठ बनाने की रणनीति अपनाई।

राहुल की दोतरफा घेराबंदी

अमित शाह ने स्मृति ईरानी के जरिए अमेठी में पहले ही राहुल गांधी की जबर्दश्त घेराबंदी कर दी, जिसके कारण राहुल को वायनाड से भी चुनाव लड़ने पर विवश होना पड़ा। और अब वायनाड से भी राहुल को चुनाव जीतने में नाकों चने चबवाने के लिए तुषार को एनडीए उम्मीदवार के रूप में उतार कर अमित शाह ने फिर साबित किया कि वर्तमान भारतीय राजनीति के वे सबसे बड़े चाणक्य हैं। वास्तव में तुषार को एनडीए उम्मीदवार बना कर शाह ने बड़ा दाँव चला है। बीजेडीएस ने राजनीतिक दल बनने के बाद केरल विधानसभा चुनाव 2016 में भाजपा से गठबंधन किया। बीडीजेएस ने सभी 36 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली। यद्यपि पार्टी को 3.93 प्रतिशत वोट मिले। दूसरी तरफ भाजपा केरल में वर्षों से अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में है। भाजपा अध्यक्ष ने वायनाड और तुषार के सहारे केरल में भाजपा की पैठ बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

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