PSA : फारूक़ ने सोचा नहीं होगा कि पिता के 41 साल पहले बनाए ‘फंदे’ में खुद फँस जाएँगे…

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 16 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक़ अब्दुल्ला को लेकर आज केन्द्र सरकार ने बड़ा रहस्योद्घाटन किया है। केन्द्र सरकार ने उच्चतम् न्यायालय (SC) को जो जानकारी दी, उसके अनुसार फारूक़ अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर के सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) 1978 के तहत हिरासत में रखा गया है। अब तक जो जानकारी थी, उसके अनुसार यही माना जा रहा था कि फारूक़ अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के दिन यानी 5 अगस्त से गृहबंदी (हाउस अरेस्ट या नज़रबंद) हैं, परंतु आज जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा, तो केन्द्र सरकार ने रहस्योद्घाटन किया कि फारूक़ अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट में आज जम्मू-कश्मीर और धारा 370 हटाए जाने को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें एक याचिका तमिलनाडु व पुड्डुचेरी के राजनीतिक दल मरुमालार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम् (MDMK) के संस्थापक और राज्यसभा सदस्य वायको ने भी दायर की थी। वायको ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई के जन्म दिवस 15 सितंबर को चेन्नई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता डॉ. फारूक़ को भी आमंत्रित किया था। वायको का कहना है कि 5 अगस्त के बाद से ही फारूक़ अब्दुल्ला से सम्पर्क नहीं हो पा रहा, जिसके चलते वायको ने सुप्रीम कोर्ट में फारूक़ अब्दुल्ला की रिहाई की मांग करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। इस याचिका पर 15 सितंबर से पहले सुनवाई नहीं हो सकी और अन्नादुरई जन्म दिवस समारोह में फारूक़ शामिल नहीं हो सके, परंतु आज जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, तब यह पता चला कि फारूक़ अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्हें जिस स्थान पर रखा जाएगा, उसे अस्थायी जेल घोषित किया जाएगा। केन्द्र सरकार ने यह कदम वायको की याचिका के बाद ही उठाया। जम्मू-कश्मीर राज्य के इस कानून यानी पीएसए के तहत प्रावधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को पीएसए के तहत गिरफ़्तार करने के बाद दो साल तक बिना किसी सुनवाई हिरासत में रखा जा सकता है।

फारूक़ के पिता शेख अब्दुल्ला ने बनाया था पीएसए

जम्मू-कश्मीर सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम यानी पीएसए वर्ष 1978 में बनाया था। फारूक़ अब्दुल्ला के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने पीएसए 1978 में घाटी में लागू किया था। इस कानून को बनाने का उद्देश्य घाटी में लकड़ी की तस्करी और तस्करों पर काबू पाना था। पीएसए के तहत हर ऐसे व्यक्ति को गिरफ़्तार किया जा सकता है, जिससे जम्मू-कश्मीर राज्य की कानून-व्यवस्था को ख़तरा हो। शेख अब्दुल्ला ने तो 41 वर्ष पहले लकड़ी तस्करी और तस्करों पर काबू पाने के लिए पीएसए बनाया था, परंतु कालांतर में राज्य सरकारों ने इस कानून को व्यापक बनाते हुए कई नेताओं और अलगाववादियों को भी इसके तहत गिरफ़्तार किया। जुलाई-2016 में आतंकवादी संगठन हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद घाटी में बड़े पैमाने पर सेना और सरकार के विरुद्ध पत्थरबाजी से लेकर प्रदर्शन हुए, जिसके चलते घाटी के सैकड़ों युवाओं को पीएसए के तहत गिरफ़्तार किया गया। धारा 370 हटाए जाने के बाद केन्द्र सरकार ने अलगाववादी नेता शाह फ़ैसल को भी दिल्ली हवाई अड्डे पर रोक कर कश्मीर लौटा दिया था और राज्य सरकार ने उन्हें पीएसए के तहत हिरासत में ले लिया था। अब जम्मू-कश्मीर सरकार ने फारूक़ अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में रखा है। फारूक़ अब्दुल्ला ने सपने में भी सोचा नहीं होगा कि उनके पिता द्वारा 41 वर्ष पहले बनाए गए कानून के फंदे में एक दिन वे स्वयं फँस जाएँगे।

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